क्या अंग्रेज चोर नहीं थे... जानिए उनके अनोखी चोरीयों के वृतांत... .
अनोखी चोरीयों के वृतांत.... (१) सम्राट विक्रमादित्य प्रमार ने 56 ई. पू. में विक्रम संवत् प्रवर्तित किया, यह इतिहास में प्रवर्तित महत्वपूर्ण संवत् और कैलेण्डर था, उनके इस युग की देखादेखी रोम के शासक जुलिअस सीजर ने की और फिर जुलिअस का एक त्रुटिपूर्ण जुलियन कैलेण्डर बना। अंग्रेज जब यहाँ आए तो बड़े अच्छे से ईसाई नववर्ष जनवरी को नववर्ष मनाना सिखाया, ताकि वैदिक नवसंवत्सर तथा विक्रम संवत् ( जो शको पर भारत की भारी विजय का द्योतक थी) उसे भारतीय भुलकर मानसिक रूप से भी गुलाम बन जाए। (२) कई महत्वपूर्ण ग्रंथ जलाकर नष्ट भी किये। महाराष्ट्र के शिवकर जी बापू तलपड़े (1895) से विमान का शोध संशोधन आदि चुराया और ८-९ साल बाद राइट बंधुओं को उसका श्रेय दे दिया गया। यह कैसे हुआ..? इस 👇🔗व्हिडीयों में स्वदेशी आंदोलन के प्रवक्ता स्व. राजिव दिक्षीत द्वारा बताया गया है। (https://youtu.be/XiLP1MIHR5E) (३) जगदीशचंद्र बसु बताते हैं कि उनकी एक शोध का पेटेंट देने के बहाने उनकी शोध पत्रिकाएं अंग्रेजी षड्यंत्र के तहत चोरी की शिकार हुई जिसमें रेडियो से संबंधित शोध का ब्यौरा था और फिर उसका श्रेय भी विदेश...