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आयुर्वेद के शाश्वत सिद्धांत ...

आयुर्वेद उपवेद के विस्तार में चरक सुत्र आर्ष है। तभी तो चरक मे तर्क व सिद्धांत है। संपूर्ण वैदिक चिकित्सा निरापद तभी तो है। कुछ पाखंडियों ने बाद में चिकित्सा मे भी तर्क विहिन किंवदंतियों को जोडा, लेकिन वो आयुर्वेद ग्रंथ में नही मिलती अपितु लोक किंवदंतियों व इतिहास पुराण में है। लेकिन बृहत्रयी इनसब से सुरक्षित है। यदि चिकित्सा भी पाखंड से भर जाये तो प्राणो पर ही संकट आ जाएगा। लघुत्रयी मे भी कोई संकट नही। प्रामाणिक है। अनेकानेक विद्वतापूर्ण ग्रन्थों की उपलब्धता अब नही रही। आयुर्वेद के ग्रंथों का लाखों की संख्या में भष्म हो जाना आयुर्वेद का नाम लेतें ही तत्काल स्मरण करने योग्य तथ्य है। यह इसके अनेक शाखाओं के विलुप्त होने का कारण है।  प्रस्तुत है चरक मे सिद्धांत की परिभाषा : जिस तथ्यको अनेक परीक्षकोंके द्वारा अनेकविध परीक्षा करके उसका तर्कसंगत निर्णय स्थापित किया जाता है , वह सिद्धान्त कहा जाता है । सिद्धान्तो नाम स यः परीक्षकैर्बहुविधं परीक्ष्य हेतुभिश्च साधयित्वा स्थाप्यते निर्णयः । ( च०वि ०८। ३७ ) इस परिभाषा से क्या तात्पर्य निकाल सकते हैं? तात्पर्य यह कि आयुर्वेद का त्रिदोष सिद्धां...

Allopathy

एलोपैथी को जिस तरह मेडिकल के ही कुछ प्रामाणिक दिग्गजों ने ही सप्रमाण वैज्ञानिक आधार पर "स्टुपीड" कहाँ हैं वैसे ही वैज्ञानिक आधार पर ही "छद्म विज्ञान" भी कहा है। ये लोग इन जानकारियों को दबाने मे सफल हो गये हैं क्योंकि सबकुछ इनकी मुठ्ठी मे है। लेकिन एलोपैथी पर ऐसे-ऐसे कथन है जिनको प्रसारित प्रचारित किया जाय तो कम से कम मेडिकल के छात्रों मे उक्त पैथी की झूठी महिमामंडित छवि का भंडाफोड़ देखकर सत्य असत्य का बोध हो जाएगा और एलोपैथी की विज्ञान वाली झूठी छवि का पाप धीरे-धीरे सीधे-सीधे सबको पता चलेगा। अनेकानेक को अभी कुछ ज्ञात नहीं है। बडी वैज्ञानिक चिकित्सा समझकर या विज्ञान समझकर कोई जनसाधारण उधर के क्लीष्ठ क्षेत्र में कदापि ध्यान नहीं देता। वैकल्पिक मे प्रबल रिसर्च की आवश्यकता है। और रोगो को मूलतः ठीक करने के विपुलतम उदाहरणों की बाढ अभी शेष है। लेकिन जितना भी कुछ हुआ है वो ट्रेलर है। आगामी दिनों में मेडिकल माफिया के अंत के लिए विज्ञान को ढाल बनाकर हिंसक चिकित्सा व्यापार पर जनजागृति अनिवार्य सामयिक विषय है।  11: 20 am, 13 may 2024 ✍️ A. M. विचार प्रसार 

Stupid Allopathy

 एलोपैथिक डॉक्टर खुले विचारों वाले नहीं हैं! उनकी बुनियादी शिक्षा चिकित्सा की अन्य पद्धतियों द्वारा स्वीकार न किए जाने का एक कारण है! - वैद्य जयन्त देवपुजारी (अध्यक्ष सेंट्रल कौंसिल ऑफ़ इंडियन मेडिसिन) उपचार का जाल - कैसे चिकित्सा देखभाल का अत्यधिक उपयोग आपके स्वास्थ्य को बर्बाद कर रहा है और आप इसे रोकने के लिए क्या कर सकते हैं, रोज़मेरी गिब्सन और जनार्दन प्रसाद सिंह की 2010 की पुस्तक है। उपचार का जाल - कैसे चिकित्सा देखभाल का अत्यधिक उपयोग आपके स्वास्थ्य को बर्बाद कर रहा है और आप इसे रोकने के लिए क्या कर सकते हैं...? हृदयरोग की दवाओं का एक बड़ा कारोबार है । यदि हमारे देश के 7,00,00,000 हृदयरोगियों को 1000 रुपये प्रतिमाह की दवाई खाना पड़ती है । तो केवल दवाओं का ही प्रतिमाह का कारोबार 7,00,00,000,000 रुपये होता है । क्या कोई दवा निर्माता कंपनी चाहेगी कि वह इतना बड़ा व्यवसाय नष्ट कर दे । नहीं , बिल्कुल नहीं । इसीलिये ये नित नई रिसर्चों के बहाने दवाओं की बिक्री लगातार जारी रखते हैं और रखेंगे । इस बात में संदेह नहीं कि एलोपैथी ने कई संक्रामक बीमारियों जैसे- चेचक , पोलियो आदि पर विजय पा...