Stupid Allopathy

 एलोपैथिक डॉक्टर खुले विचारों वाले नहीं हैं! उनकी बुनियादी शिक्षा चिकित्सा की अन्य पद्धतियों द्वारा स्वीकार न किए जाने का एक कारण है!


- वैद्य जयन्त देवपुजारी (अध्यक्ष सेंट्रल कौंसिल ऑफ़ इंडियन मेडिसिन)


उपचार का जाल - कैसे चिकित्सा देखभाल का अत्यधिक उपयोग आपके स्वास्थ्य को बर्बाद कर रहा है और आप इसे रोकने के लिए क्या कर सकते हैं, रोज़मेरी गिब्सन और जनार्दन प्रसाद सिंह की 2010 की पुस्तक है।


उपचार का जाल - कैसे चिकित्सा देखभाल का अत्यधिक उपयोग आपके स्वास्थ्य को बर्बाद कर रहा है और आप इसे रोकने के लिए क्या कर सकते हैं...?


हृदयरोग की दवाओं का एक बड़ा कारोबार है । यदि हमारे देश के 7,00,00,000 हृदयरोगियों को 1000 रुपये प्रतिमाह की दवाई खाना पड़ती है । तो केवल दवाओं का ही प्रतिमाह का कारोबार 7,00,00,000,000 रुपये होता है । क्या कोई दवा निर्माता कंपनी चाहेगी कि वह इतना बड़ा व्यवसाय नष्ट कर दे । नहीं , बिल्कुल नहीं । इसीलिये ये नित नई रिसर्चों के बहाने दवाओं की बिक्री लगातार जारी रखते हैं और रखेंगे । इस बात में संदेह नहीं कि एलोपैथी ने कई संक्रामक बीमारियों जैसे- चेचक , पोलियो आदि पर विजय पाई है । लेकिन सफलता के इस नशे में चूर होकर वे पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को निर्दयता पूर्वक कुचलते चले गए और लोगों को अपनी विजय - गाथा के साथ ये विश्वास दिला दिया कि केवल एलोपैथी ही एकमात्र उपाय है । लेकिन असंक्रामक या नान - कम्यूनीकेबल बीमारियों में एलोपैथी लगभग पूर्णतः असफल हुई है । यही वजह है कि वैकल्पिक मान ली जा चुकी चिकित्सा पद्धतियाँ फिर से उदित हो रही हैं ।


दिल्ली एम्स के भूतपूर्व हृदयरोग विशेषज्ञ और लेखक डॉ . विमल छाजेड़ का कथन विचारणीय है- “ विडम्बना यह है कि एलोपैथी विज्ञान ने साधारणसी समझ को भी भुला दिया है । हृदय रोग की वास्तविक समस्याओं को हल करने की बजाय इस विज्ञान ने असामान्य व अतार्किक उपचार को अपनाया है । यह ऐलोपैथी चिकित्सा वास्तविक समस्याओं का निदान किये बिना , अधिक से अधिक दवाओं , केवल दवाओं पर पूर्णतः निर्भर हो गई हैं । "


Dr. John R. Durell लिखते हैं - (The New England Botanic, Medical and Surgical Journal, Volumes 3-4. p. 49. मे)  :

" The circumstances , however , of his condition , delineated in the following remarks , together with the fact that his treatment was that of stupid Allopathy , were enough to move any ."


(https://books.google.co.in/books?id=XM1XAAAAMAAJ&pg=PA249&dq=ridiculous+allopathy&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwjXp7Gmh_iFAxWlaPUHHWxUBFs4FBDoAXoECAMQAw#v=onepage&q=ridiculous%20allopathy&f=false)


यानि स्वामी रामदेव पहले व्यक्ति नही, अपितु प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल में एलोपैथी को मूर्ख stupid कहकर संबोधित किया जाता है यह उल्लेखनीय तथ्य है।


एलोपैथी को जिस तरह मेडिकल जर्नल में stupid कहा गया है वैसे ही उसे प्रसिद्ध चिकित्सकों द्वारा छद्म विज्ञान pseudo science भी कहा गया है। लेकिन ये दोनो शब्द इसने स्वयं से हटाकर युं छिपा रखे हैं कि कोई सामान्यतः कहना तो दुर सोच भी नहीं पा रहा। सबकी बुद्धि पर भी मानो इन्ही फार्मा माफियाओं का कब्जा हो गया है। और पाठ्यक्रम व विकिपीडिया सबपर इनका कब्जा होने से उल्टा इनके विरूद्ध प्रणालियों पर इन्होने ये नाम चिपकाने का काम किया है। 

"Diagnosis from the Eye"

(A New Art of Diagnosing with Perfect Certainty from the Iris of the Eye the Normal and Abnormal Conditions of the Organism in General and of the Different Organs in Particular; a Scientific Essay for the Public and Medical Profession) 

इस में इसे सैद्धांतिक रूप से छद्म विज्ञान माना गया है। क्योंकि एलोपैथी के मूल सिद्धान्त ही प्रकृति व विज्ञान विरूद्ध है ।

इसे Dr. Henry Edward Lane ने रचा है।

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इसमें कोई संदेह नहीं है, एलोपैथिक दवा (पारंपरिक पश्चिमी चिकित्सा का वर्णन करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द) आघात और जीवाणु संक्रमण से निपटने में शानदार है, लेकिन यह पुराने दर्द, ऑटोइम्यून बीमारी और अपक्षयी स्थितियों के प्रबंधन में प्राकृतिक चिकित्सा जितनी प्रभावी नहीं है।


-Apurva Gaglani

(the truth behind allopathic and medical lies) 

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