भोज बनाम महमूद गजनवी
#भोज_बनाम_महमूद_गजनवी
इतिहासकारों के अनुसार धारेश्वर भोज भारत का पहला हिन्दु राजा था जिसने विदेशी मुस्लिम आक्रमणकारियों को इस देश में पांव जमाने नही दिये । अफगानिस्तान के गजनबी ने जब - जब आक्रमण किया , भोज ने उसे देश की सीमाओं के बाहर खदेड़ा । सर्वप्रथम भोज ने वर्ष १००८ ई . में लाहौर के नृपति शाही आनंदपाल को सुल्तान महमूद गजनवी के आक्रमण का मुकाबला करने अपनी सेना भेजी । इसी तरह उसके पुत्र त्रिलोकपाल जो वर्ष १०१९ - २० ई . में लाहौर का शासक था उसे भी अपनी सेना भेजी एवम् भोज ने गजनवी के आक्रमणों को नाकामयाब किया ( धार गजेटियर ) . गर्दीजी कृत " जैनुल अखबार " के विवरण अनुसार वर्ष १०२४ - १०२६ ई . में महमूद गजनवी ने भारत पर दोबारा आक्रमण किया । वह जैलसमेर , मारवाड , गुजरात मार्ग से आगे बढ़ा । गुजरात के चालुक्य नरेश भीम प्रथम की सेना गजनवी के सैन्यबल के सामने टिक न सकी और उसने सोमनाथ मंदिर की तोड़फोड़ कर खुब लूट - पाट मचायी । किन्तु राजा भोज की विशाल सेना की खबर सुनते ही वह सिंध के रास्ते रेगिस्थान होते हए वापस अफगानिस्थान लौट गया । उसे वापसी में अपनी सेना एवम् पशुओं की भारी प्राणहानि झेलनी पड़ी । राजा भोज ने सोमनाथ मंदिर की मरम्मत करवाई । तथा लेले कृत " दी परमाराज ऑफ धार एन्ड मांडू " में जानकारी दृष्टिगत होती हैं कि राजा भोज ने मूहमद गजनवी के आक्रमणों का मुकाबला करने के उद्देश्य से हिंदू राजाओं का एक सशक्त संघ बनाया था जिस में कलचुरी नरेश लक्ष्मीकर्मा तथा चौहान आदि राजपूत वंशी नृपतिगन सम्मिलित थे । “ फरिश्ता " में इस संघ की संयुक्त सेना में अजमेर , कनौज , कालिंजर , लाहौर आदि राज्यों की सेनाओं के सम्मिलित होने की पूष्टि की है ताकि लाहौर नरेश जयपाल आक्रमणकारी गजनबी को लोहा दे सके । ए . इं . खंड ३ , पृष्ठ ४६ पर उल्लेख मिलता है कि जब महमूद गजनबी के पुत्र मलिक सलाल मसूद ने सन १०४३ ई . में लाहौर पर आक्रमण किया तब राजा भोज के नेतृत्व में हिंदू राजाओं की संयुक्त सेना ने बहराइच के मैदानपर एक माह तक घनघोर युद्ध किया और उसे वापस भगाया । तद्पश्चात संयुक्त सेना ने हांसी , थानेश्वर , नागरकोट आदि के किलों को मुसलमानों से आजाद किया । गजनबी के सेनापति तोग्गल से लाहौर का किला मुक्त कराने के लिये भोज ने लगातार सात माह तक युद्ध कर अंत में जीत हासिल की ।
#क्या_कारण_था_कि__भोज__परमार__के__बाद__धार__को__योजनाबद्ध_तरीके_से_निशाने_पर_लिया_गया?
गजनवी के पुत्र #सालार_मसूद को बहराइच के पास एक मास के युद्ध में मारकर मालवचक्रवर्ति भोज ने सोमनाथ का प्रतिशोध लिया और फिर 1026-1054 की अवधि के बीच भोपाल से 32 किमी पर स्थित भोजपुर शिव मंदिर का निर्माण करके मालवा में सोमनाथ की स्थापना कर दी। विख्यात पुराविद् अनंत वामन वाकणकर ने अपनी पुस्तक "'द ग्लोरी ऑफ द परमाराज आफ मालवा'" में 'कोदंड काव्य' के आधार पर तुरूष्को (तुर्को) पर भोजराज की विजय की पुष्टि की है। यही कारण था कि बाद के काल में मालवा पर भी मुस्लिम आक्रांताओं का लगातार आक्रमण होता रहा और खासकर धार एवं भोपाल को योजनाबद्ध निशाने पर लिया गया।
#विचार_प्रसार 🚩🚩🚩🚩🚩
✍️जय मां भारती 🇮🇳🇮🇳🙏🙏
इतिहासकारों के अनुसार धारेश्वर भोज भारत का पहला हिन्दु राजा था जिसने विदेशी मुस्लिम आक्रमणकारियों को इस देश में पांव जमाने नही दिये । अफगानिस्तान के गजनबी ने जब - जब आक्रमण किया , भोज ने उसे देश की सीमाओं के बाहर खदेड़ा । सर्वप्रथम भोज ने वर्ष १००८ ई . में लाहौर के नृपति शाही आनंदपाल को सुल्तान महमूद गजनवी के आक्रमण का मुकाबला करने अपनी सेना भेजी । इसी तरह उसके पुत्र त्रिलोकपाल जो वर्ष १०१९ - २० ई . में लाहौर का शासक था उसे भी अपनी सेना भेजी एवम् भोज ने गजनवी के आक्रमणों को नाकामयाब किया ( धार गजेटियर ) . गर्दीजी कृत " जैनुल अखबार " के विवरण अनुसार वर्ष १०२४ - १०२६ ई . में महमूद गजनवी ने भारत पर दोबारा आक्रमण किया । वह जैलसमेर , मारवाड , गुजरात मार्ग से आगे बढ़ा । गुजरात के चालुक्य नरेश भीम प्रथम की सेना गजनवी के सैन्यबल के सामने टिक न सकी और उसने सोमनाथ मंदिर की तोड़फोड़ कर खुब लूट - पाट मचायी । किन्तु राजा भोज की विशाल सेना की खबर सुनते ही वह सिंध के रास्ते रेगिस्थान होते हए वापस अफगानिस्थान लौट गया । उसे वापसी में अपनी सेना एवम् पशुओं की भारी प्राणहानि झेलनी पड़ी । राजा भोज ने सोमनाथ मंदिर की मरम्मत करवाई । तथा लेले कृत " दी परमाराज ऑफ धार एन्ड मांडू " में जानकारी दृष्टिगत होती हैं कि राजा भोज ने मूहमद गजनवी के आक्रमणों का मुकाबला करने के उद्देश्य से हिंदू राजाओं का एक सशक्त संघ बनाया था जिस में कलचुरी नरेश लक्ष्मीकर्मा तथा चौहान आदि राजपूत वंशी नृपतिगन सम्मिलित थे । “ फरिश्ता " में इस संघ की संयुक्त सेना में अजमेर , कनौज , कालिंजर , लाहौर आदि राज्यों की सेनाओं के सम्मिलित होने की पूष्टि की है ताकि लाहौर नरेश जयपाल आक्रमणकारी गजनबी को लोहा दे सके । ए . इं . खंड ३ , पृष्ठ ४६ पर उल्लेख मिलता है कि जब महमूद गजनबी के पुत्र मलिक सलाल मसूद ने सन १०४३ ई . में लाहौर पर आक्रमण किया तब राजा भोज के नेतृत्व में हिंदू राजाओं की संयुक्त सेना ने बहराइच के मैदानपर एक माह तक घनघोर युद्ध किया और उसे वापस भगाया । तद्पश्चात संयुक्त सेना ने हांसी , थानेश्वर , नागरकोट आदि के किलों को मुसलमानों से आजाद किया । गजनबी के सेनापति तोग्गल से लाहौर का किला मुक्त कराने के लिये भोज ने लगातार सात माह तक युद्ध कर अंत में जीत हासिल की ।
#क्या_कारण_था_कि__भोज__परमार__के__बाद__धार__को__योजनाबद्ध_तरीके_से_निशाने_पर_लिया_गया?
गजनवी के पुत्र #सालार_मसूद को बहराइच के पास एक मास के युद्ध में मारकर मालवचक्रवर्ति भोज ने सोमनाथ का प्रतिशोध लिया और फिर 1026-1054 की अवधि के बीच भोपाल से 32 किमी पर स्थित भोजपुर शिव मंदिर का निर्माण करके मालवा में सोमनाथ की स्थापना कर दी। विख्यात पुराविद् अनंत वामन वाकणकर ने अपनी पुस्तक "'द ग्लोरी ऑफ द परमाराज आफ मालवा'" में 'कोदंड काव्य' के आधार पर तुरूष्को (तुर्को) पर भोजराज की विजय की पुष्टि की है। यही कारण था कि बाद के काल में मालवा पर भी मुस्लिम आक्रांताओं का लगातार आक्रमण होता रहा और खासकर धार एवं भोपाल को योजनाबद्ध निशाने पर लिया गया।
#विचार_प्रसार 🚩🚩🚩🚩🚩
✍️जय मां भारती 🇮🇳🇮🇳🙏🙏

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें