आदि शंकराचार्य का वास्तविक जन्म का समय
#जानिए_आदि_शंकराचार्य_का_वास्तविक_काल... (वामपंथी इतिहासकारों द्वारा फैलाये भ्रम का खँडन)
हिन्दू धर्म को पुन:व्यवस्थित करके आदिकाल से चली आ रही संत धारा को पुनर्जीवित करने का श्रेय आद्य या आदि शंकराचार्य को जाता है। कहते हैं कि उनका जन्म वैशाख शुक्ल पंचमी को हुआ था।
आदि शंकराचार्य का जन्म समय : आज के इतिहासकार कहते हैं कि आदि शंकराचार्य का जन्म 788 ईस्वी में हुआ और उनकी मृत्यु 820 ईस्वी में। मतलब वह 32 साल जीए। इतिहासकारों का यह मत तथ्यों से मैच नहीं होता है। अत: उनका मत असिद्ध हैं। दरअसल, 788 ईस्वी में एक अभिनव शंकर हुए जिनकी वेशभूषा और उनका जीवन भी लगभग शंकराचार्य की तरह ही था। वे भी मठ के ही आचार्य थे। उन्होंने चिदंबरमवासी श्रीविश्वजी के घर जन्म लिया था। उनको इतिहाकारों ने आदि शंकराचार्य समझ लिया। ये अभिनव शंकराचार्यजी कैलाश में एक गुफा में चले गए थे। ये शंकराचार्य 45 वर्ष तक जीए थे। लेकिन आदि शंकराचार्य का जन्म केरल के मालाबार क्षेत्र के कालड़ी नामक स्थान पर नम्बूद्री ब्राह्मण शिवगुरु एवं आर्याम्बा के यहां हुआ था और वे 32 वर्ष तक ही जीए थे।
दुसरे देशों की किंवदन्ती को भी इतिहास मान कर उन देशों की सभ्यता के काल को धीरे धीरे बढाया जा रहा है, वहीं हमारे वास्तविक प्रमाणों को नकार कर हमारे इतिहास, सभ्यता के काल को ईसा के आस पास ही समेटा जा रहा है। काल गणना इतनी गडबड की गई है, आधुनिक इतिहासकारों और वामपंथीयों द्वारा की अच्छों - अच्छों का सर चकरा जावे। सबसे बड़ी गडबड शंकराचार्य के काल निर्धारण में हुई है, इतिहासकारो ने शंकराचार्य का काल ईसा के बाद ७८८ ईसा बाद दिया है अर्थात् ईसामसीह से लगभग ७०० वर्ष बाद शंकराचार्य का जन्म हुआ। ये कपोल कल्पना मनगढंत और प्रमाणों के विरुद्ध है। अब यहां हम कुछ प्रमाण देंगे, जिनसे सिद्ध होगा कि शंकराचार्य जी ईसा से भी लगभग ५०० वर्ष पूर्व हुए थे।
(१) गोवर्धन मठ की शंकराचार्यो की परम्परा में अभी के शंकराचार्य निश्चलानन्द सरस्वती १४५ वे शंकराचार्य है यदि ओसतन एक शंकराचार्य का काल १५ वर्ष भी माने तो
१४५*१५ = २१७५ बैठता है जो की ईसा से पूर्व ही जाता है।
(२) शारदापीठ की वंशावली के अनुसार शंकराचार्य का जन्म २६३१ युद्धिष्ठिर् संवत लिखा है अर्थात विक्रम से लगभग ४५० वर्ष पूर्व और ईसा से लगभग ५०० वर्ष पूर्व।
(३) कांचीकामकोटि पीठ की वंशावली के अनुसार शंकराचार्य जी का जन्म २४९३ कलि संवत लिखा है अर्थात वही विक्रम से लगभग ४५० और ईसा से लगभग ५०० वर्ष पूर्व |
(३) चित्सुखाचार्य ने शंकराचार्य के प्रादुर्भाव में कुछ श्लोक लिखे है जो युद्धिष्ठिर् मीमांसक जी ने अपने शास्त्रावतार मीमांसा में दिए है -
" तत: सा दशमे मासे सम्पूर्णशुभलक्षणे।
षटत्रिशे शतके श्रीमद युद्धिष्ठिरशकस्य वे।।
एकत्रिशे वर्षे तु हायने नन्देने शुभे।
मेघराशि गते सूर्ये वैशाखे मासि शोभने।।
शुक्लपक्षे च पंचम्या तिथ्या भास्करवासरे।
प्रासूत तनय साध्वी गिरिजेव षडाननम्।।
इस श्लोक के अनुसार शंकराचार्य का जन्म युधिष्ठिर संवत २६३१ अर्थात ईसा से लगभग ५०० वर्ष पूर्व के वैशाख के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि रविवार को बैठता है।
(४) जैन ग्रन्थ " जिन विजय " के अनुसार भी शंकराचार्य का काल ईसा से लगभग ५०० वर्ष पूर्व ही मिलता है, इसका उल्लेख युधिष्ठिर मीमांसक जी के अलावा पंडित लेखराम जी ने अपने " कुलियात आर्यमुसाफिर " के सृष्टि के इतिहास निबन्ध में भी किया है लेकिन वहां उन्होंने इसे शंकराचार्य के किसी शिष्य के नाम से लिखा है, सम्भवत: उनका अनुमान कुछ गलत हो।
जिन विजय में शंकराचार्य की मृत्यु की निम्न तारीक मिलती है -
" ऋषिर्बाणस्तथा भूमिर्मतर्याक्षो वाममेलनात।
एकत्वेन लभेतास्ताम्राक्षा तत्र वत्सर:।।
अर्थात् ऋषि ७ बाण ५ भूमि १ मर्त्याक्षो २ इन अंको को बाए से रखने पर संख्या होती है २१५७।
यह जैन युधिष्ठिर संवत है। यह संवत कलि या युधिष्ठिर के ४६८ में प्रारम्भ हुआ अर्थात ईसा से लगभग २६३४ वर्ष पूर्व इसके अनुसार २१५७+४६८ = २६२५ कलि संवत अर्थात ईसा से लगभग ४७० वर्ष पूर्व शंकराचार्य की म्रत्यु हुई शंकरदिग्विजय आदि के अनुसार शंकराचार्य का जीवन लगभग ३२ वर्ष था तो उनका जन्म इस अनुसार भी ईसा से लगभग ५०० वर्ष पूर्व ही बैठता है।
(५) #पूण्यश्लोक_मंजरी के अनुसार भी शंकराचार्य की म्रत्यु जिन विजय के बराबर ही आती है अर्थात उनका जन्म ईसा से लगभग ५०० वर्ष पूर्व ही आता है -
" महेशाशात्जातो मधुरमुपदिष्टाद्वनयो |
महामोहध्वान्तप्रशमनरवि: षण्मतगुरु:||
फले स्वस्मिन स्वायुष्यपि शरचराबदेsपि च कले |
विलिल्ये स्वताक्षिण्यधिवृषमितैकादशिपरे ||
इसमें शंकराचार्य का निधन २६२५ कलि संवत दिया है अर्थात ४७७ ईसा पूर्व |
(६) एबी सेंट अपनी पुस्तक "रिलिजन ऑफ़ बुद्धा " के पेज १४६ में लिखते है - " गौतम बुद्ध की म्रत्यु के लगभग ६० वर्ष पश्चात शंकराचार्य जी हुए ।
ध्यान देने वाली बात है कि पश्चमी इतिहासकार बुद्ध का काल भ्रम अनुसार ईसा से ५५० वर्ष पूर्व मानते है जिसके अनुसार शंकराचार्य का काल ईसा से लगभग ४८० -५०० वर्ष पूर्व ही बैठता है।
(७) हरिस्वामी जो कि राजा विक्रमादित्य के राज्य में भूपति के धर्माध्यक्ष पद पर थे, इन्होने अपने शतपथ ब्राह्मण के भाष्य में कुमारिल भट के शिष्य प्रभाकर के अनुयायायियो का उल्लेख किया है - “ अथवा सूत्रांणि यथाविध्यूद्देश इति प्राभाकरा: अप: प्रणयतीति “
इनके गुरु स्कन्द स्वामी थे जो निरुक्त के टीकाकार थे, उनके इसी टीका के सहयोगी महेश्वर ने निरुक्त ८/२ की टीका में कुमारिल के श्लोक वार्तिक अर्थोत्पति परिच्छेद का ५१ वा श्लोक उद्दृत किया है। कुमारिल भट शंकराचार्य के समकालीन थे, इससे शंकराचार्य का काल विक्रम से पूर्व और ईसा से भी लगभग ५०० वर्ष पूर्व ही जाता है।
(८) अमेरिकन मिशन की पत्रिका “ नूर अफंशा के पृष्ठ ६ दिनाक मई १८८८ ई के संस्करण में सुरत में हुए दो शंकराचार्यो के शास्त्रार्थ का उलेख है जिसमे द्वारिका मन्दिर का एक ताम्रपत्र दिखाया जिसमे २६६३ युद्धिष्ठिर् संवत अंकित है।
इन प्रमाणों से सिद्ध है कि विकिपीडिया और आधुनिक इतिहासकारो द्वारा दी हुई शंकराचार्य का प्रादुभाव काल निश्चित ही गलत और कपोलकल्पित है।
9) इस विषय में प्रसिद्ध दर्शनभाष्य कार “उदयवीर शास्त्री जी “ ने अपनी पुस्तक “ वेदान्त दर्शन का इतिहास “ में सविस्तार और सप्रमाण लिखा है, इसमें उन्होंने अनेको पश्चिमी विद्वानों के मतो का निराकरण भी किया है।
(१०) मठों में आदि शंकराचार्य से अब तक के जितने भी गुरु और उनके शिष्य हुए हैं उनकी गुरु-शिष्य परंपरा का इतिहास संवरक्षित है। जो भी गुरु या गुरु का शिष्य समाधि लेता था उनकी तिथि वहां के इतिहास में दर्ज होती थी। फिर जो गुरु शंकराचार्य की पदवी ग्रहण करता और समाधि लेता था उसकी भी तिथि आदि दर्ज होती रही है। उक्त तिथियों को श्लोकों में लिखे जाने की परंपरा रही है। जिसे गुरु-शिष्य की परंपरा के अनुसार कंठस्थ किए जाने का प्रचलन रहा है। शंकराचार्य ने पश्चिम दिशा में 2648 में जो शारदामठ बनाया गया था उसके इतिहास की किताबों में एक श्लोक लिखा है जिसकी हमने चर्चा की है :
"युधिष्ठिरशके २६३१ वैशाखशुक्लापंचमी श्री मच्छशंकरावतार:। तदुन २६६३ कार्तिकशुक्लपूर्णिमायां….श्रीमच्छंशंकराभगवत्। पूज्यपाद….निजदेहेनैव……निजधाम प्रविशन्निति।"
शंकराचार्य जन्में २६३१ युधिष्ठिर संवत् को और आज ९१५६ युधिष्ठिर संवत् चल रहा है, तदनुसार ९१५६-२६३१=२५२५ वर्ष।
ई. के लिए २५२५-२०१७ = ५०८ ईसा पूर्व
अर्थात 2631 युधिष्ठिर संवत में आदि शंकराचार्य का जन्म हुआ था। मतलब आज 5158 युधिष्ठिर संवत चल रहा है। अब यदि 2631 में से 5158 घटाकर उनकी जन्म तिथि निकालते हैं तो 2527 वर्ष पूर्व उनका जन्म हुआ था। इसको यदि हम अंग्रेजी या ईसाई संवत से निकालते हैं तो 2527 में से हम 2019 घटा दे तो आदि शंकराचार्य का जन्म 508 ईसा पूर्व हुआ था। इसी तरह मृत्यु का सन् निकालें तो 474 ईसा पूर्व उनकी मृत्यु हुई थी।
तो आदि शंकराचार्य जी का जन्म ५०८ ईसा पूर्व में हुआ था। और आज इतिहासकार कहते हैं कि ६८८ ईसा पश्चात जन्म हुआ था। इससे बड़ा छलावा और क्या हो सकता है जबकि सभी तिथिक्रम एक समान आ रहे हैं। यह इतिहासकारों ने हमारे लगभग १२९६ बरस खा लिए...! यह चोर लुटेरों मक्कारों ने हमारे इतिहास के साथ बड़ी जालसाजी की है। और मृत्यु तिथि भी दिया गई है तद्नुसार शंकराचार्य जी की आयु लगभग 32 वर्ष होती है। इस वक्त 2020 ईसाई वर्ष चल रहा है। विक्रम संवत इससे 57 वर्ष पूर्व प्रारंभ हुआ था। वर्तमान में विक्रम संवत 2077 चल रहा है। इस वक्त कलि संवत 5121 चल रहा है। युधिष्ठिर संवत कलि संवत से 38 वर्ष पूर्व प्रारंभ हुआ था। मतलब इस वक्त युधिष्ठिर संवत 5159 चल रहा है।
अब हम यदि सविस्तार कामकोटि पीठ के शंकराचार्यों की 1908 तक की क्रमानुसार वंशावली देखते हैं, तो उससे भी शंकराचार्य की प्राचीनता स्पष्ट होती है।
इसके पश्चात् द्वारिका पीठ की भी वंशावली का ब्यौरा देते हैं तो भी यही सिध्द हो जाता है।
(११) जैन राजा सुधनवा के समकालिन थें शंकराचार्य :
आदि शंकराचार्य ने जैन आचार्यों को शास्त्रार्थ के लिए आमंत्रित किया। राजा सुधनवा ने बाद में वैदिक धर्म अपना लिया था। राजा सुधनवा का ताम्रपत्र उपलब्ध है। यह ताम्रपत्र आदि शंकराचार्य की मृत्यु के एक महीने पहले लिख गया था।
आदि शंकराचार्य के समय जैन राजा सुधनवा थे। उनके शासन काल में उन्होंने वैदिक धर्म का प्रचार किया। उन्होंने उस काल में जैन आचार्यों को शास्त्रार्थ के लिए आमंत्रित किया। राजा सुधनवा ने बाद में वैदिक धर्म अपना लिया था। राजा सुधनवा का ताम्रपत्र आज उपलब्ध है। यह ताम्रपत्र आदि शंकराचार्य की मृत्यु के एक महीने पहले लिख गया था। शंकराचार्य के सहपाठी चित्तसुखाचार्या थे। उन्होंने एक पुस्तक लिखी थी जिसका नाम है बृहतशंकर विजय। हालांकि वह पुस्तक आज उसके मूल रूप में उपलब्ध नहीं हैं लेकिन उसके दो श्लोक है। उस श्लोक में आदि शंकराचार्य के जन्म का उल्लेख मिलता है जिसमें उन्होंने 2631 युधिष्ठिर संवत में आदि शंकराचार्य के जन्म की बात कही है। गुरुरत्न मालिका में उनके देह त्याग का उल्लेख मिलता है।
(१२) महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश में लिखा है कि आदि शंकराचार्यजी का काल लगभग 2200 वर्ष पूर्व का है। उन्होंने इसका आधार मठों की परंपरा को बताया। आदि शंकराचार्य ने चार मठों की स्थापना की थी। उत्तर दिशा में उन्होंने बद्रिकाश्रम में ज्योर्तिमठ की स्थापना की थी। यह स्थापना उन्होंने 2641 से 2645 युधिष्ठिर संवत के बीच की थी। इसके बाद पश्चिम दिशा में द्वारिका में शारदामठ की स्थापना की थी। इसकी स्थापना 2648 युधिष्ठिर संवत में की थी। इसके बाद उन्होंने दक्षिण में श्रंगेरी मठ की स्थापना भी 2648 युधिष्ठिर संवत में की थी। इसके बाद उन्होंने पूर्व दिशा में जगन्नाथ पुरी में 2655 युधिष्ठिर संवत में गोवर्धन मठ की स्थापना की थी। आप इन मठों में जाएंगे तो वहां इनकी स्थापना के बारे में लिखा जान लेंगे।
(१२) शंकरविजय में आदि शंकराचार्य के सहपाठी मित्र आचार्य सुखदेव जी ने एक श्लोक लिखा है एक श्लोक आधा मिलता है तद्नुसार 2631 वर्ष युधिष्ठिर संवत् के पुर्ण होने के बाद आचार्य शंकर का जन्म हुआ था यह उनके सहपाठी लिख रहे हैं। अतः यदि वह श्लोक देखने है scan तो कमेन्ट बाॅक्स में देखें।
यह है एक पुर्ण श्लोक :
"षड्विंशके शतके श्रीमद् युधिष्ठिरशकस्य वै ॥
एकत्रिशेऽथ वर्षेतु हायने नन्दने शुभे ।"
यह है आधा श्लोक
"- प्रासूत तन्वंसाध्वी गिरिजेव षडाननम् ॥"
इसी सहाध्यायी ने उनकी सर्वप्रथम आदि शंकराचार्य जी की जीवनी भी लिखी थी। इसका अर्थ भी है कि 508 ईसा पूर्व में जन्म हुआ।
(१३) गुरू रत्न मालिका ग्रंथ में एक श्लोक है तद्नुसार शंकराचार्य जी का जन्म कलिसंवत 2593 हैं। फोटो कमेंट बॉक्स में देखे। इस श्लोक के अनुसार भी 508 ईसा पूर्व ही तथ्य सामने आता है।
(१४) सुधा जैन नामक जैन ग्रंथों और पट्टावलीयों की गहन अध्ययेता ने अद्वैत मिमांसा नामक अपने प्रामाणिक शोधकार्य में सन 1986 में प्रतिभा प्रकाशन के इस संस्करण में भी २६३१ युधिष्ठिर संवत् ही आदि शंकराचार्य जी की जन्म तिथि बताई है तदनुसार भी ईसा पूर्व 508 ही आता है तो क्या यह इतिहासकार भी पागल है?
(१५) फिर है पुस्तक धर्मदुत में उल्लेखित "journal of Ganganath Jha Kendriya sanskrit vidyapeeth" के प्रमाण स्वरूप साफ साफ लिखा है कि लगभग 501 ईसा पूर्व में ही शंकराचार्य का जन्म हुआ। भले ही 508 न हो फिर भी वह किसी न किसी प्रमाण के आधार पर ही ठहराया गया है। वामपंथी इतिहासकारों के अधिपति प्रथम शिक्षा मंत्री को याद करीए इसका सारा रहस्य वही है।
(१६) बदौडा राज्य पुस्तकालय में संरक्षित कुछ कागदों में भी आद्य शंकराचार्य का जन्म काल युधिष्ठिर संवत् २६६१ ही जन्म काल कहा गया है क्या यह भी झुठ कागज है? या क्या यह भी इत्तेफाक ही है? और यह बात लिखी है श्री बद्रीनाथ धाम दर्पण पुस्तक १९९४ में ले.शिवराजसिंह राजवाना रावत द्वारा। उन्होंने ही केदार, हीमालय और पंचकेदार नामक अपने पुस्तक में आदि शंकराचार्य जी का 500-476 ईसा पूर्व ऐसा जन्म मृत्यु काल बताया हुआ है।
(१७) शिवदास पांडे कृत जगद्गुरू शंकराचार्य में भी ईसा पूर्व 508 ही शंकराचार्य जी का जन्म सप्रमाण बताया गया है। उसमें लिखा है :
"केरल की कलाड़ी में कभी गंगा की उपधारा बनकर बहती शंकराचार्य के गाँव की नदी का ' कारबन डेट ' इतिहास भी अपनी सच्ची कहानी कहने को आमादा है , उसे भी सुनना होगा । इस नदी के इतिहास का अध्ययन बताता है कि आदि शंकराचार्य का जन्मकाल ईसा से पूर्व 509 वर्षों से भी अधिक प्राचीन है और इसी इतिहास को सांस्कृतिक भारत के प्रतिनिधि स्वरूप कांचिकामकोटि मठ ने केंद्रीय सरकार को सभी दस्तावेजों के साथ सुपुर्द भी कर दिया है । मिथक तभी तक मिथ है , जब तक उसकी अग्निपरीक्षा विज्ञान नहीं ले लेता और वह उसमें खरा नहीं उतर आता । जाहिर है कि कलाड़ी के शंकराचार्य की कथा का कथानक गढ़नेवाले शिल्पी की कल्पना तथा बुद्धि दोनों को ईसा पूर्व 600 वर्ष एवं ईसवी के सात सौ अठासी वर्ष के बीच की दौड़ तो लगानी ही होगी.... "
(१८) The The True History and the religion of India : A concise Encyclopedia. में prakashanand saraswati ने भी ईसा पूर्व ५०८ ही आदि शंकराचार्य जी का जन्म समय लिखा है ।
(१९) #Hinduism: An Alphabetical Guide
By Roshen Dalal के पृ. ३७६ पर कांची मठ के लिए लिखा है उसका अनुवाद है :
"कांची मठ के अनुसार, उनका जन्म ५० ९, ईसा पूर्व के कालि २५ ९ ३ कालि में हुआ था, और काली २६२५ में उनकी मृत्यु ४ 26 B ईसा पूर्व में हुई थी।"
(२०) ४४-१२ ईसा पूर्व: टीकाकार आनंदगिरी का मानना था कि उनका जन्म ४४ ईसा पूर्व में चिदंबरम में हुआ था और उनकी मृत्यु १२ ईसा पूर्व में हुई थी। ¶
(२१) डाॅ. भीमदत्त शर्मा ने भी अपनी पुस्तक "महान शिक्षा दार्शनिक के रूप में आद्य जगद्गुरू शंकराचार्य" में आचार्य शंकर का जन्म समय ईसा पूर्व ५०७ वर्ष माना है। उन्होंने कहा है कि पाश्चात्य ८वीं-९ वीं सदी में मानते हैं जो कि अशुध्द है। क्योंकि ८ वीं -९ वीं शताब्दी में बौध्दों का इतना प्राबल्य नहीं था, उनका प्रभाव समाप्त हो गया था। इसलिए आचार्य पाद की आवश्यकता नहीं मालूम पडती की वे उस काल में जन्म लें🙏😊
इस प्रकार आचार्य शंकर पर झुठ प्रसार किया गया है जिसकी पोल खुल जाती है। यह सब देखकर अंतर्मन में पीडा सी महसूस होती है 😥 क्या हाल कर दिया सत्य इतिहास का इन अंग्रेजी पाश्चात्य और वामपंथियों ने... 🙁🤕
अतः शंकराचार्य को ईसा के 700 वर्ष बाद मानना भ्रमपूर्ण प्रचार है।
📖संदर्भित ग्रंथ एवं पुस्तकें एवं अन्य -
(1) वेदान्त दर्शन का इतिहास - आचार्य उदयवीर जी
(2) शास्त्रावतार मीमांसा - पं. युद्धिष्ठिर मींमासक जी
(3) कुलियात आर्यमुसाफिर - पं. लेखराम आर्य
(5) https://youtu.be/x5nyWlG7kGo
(6)http://mahanagarmedia.com/archives/2409
(7)https://en.m.wikipedia.org/wiki/Adi_Shankara#cite_note-Keshava-5
🙏विचार प्रसार🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
✍️जय मां भारती 🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥

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