प्रमार वंशीय वंशावली राजा पल्ल के पश्चात
प्रमार वंशीय राजाओं की वंशावली राजा पल्ल के पश्चात....
परमार वंश में #राजा_पल्ल हुए, उनके बाद की वंशावली
(2) राजा वेणु
(३) राजा प्रथु
(4) राजा प्रिय व्रत
(5) राजा सुरपति
(6) राजा मन्मथराय
(7) राजा धौम्यपद
(8) राजा लघु सुरपति
(9) राजा विनयपददेव
(10) राजा देव पालग
(11) राजा दुनीपाल
(12) राजा नरपाल
(13) राजा नरसिंहपाल
(14) नन्दपाल राजा
(15) राजा पंचायन
(16) पुरूखा राजा
(17) राजा गंगपाल
(18) राजा रत्नकेतु
(19) राजा कामजीत
(20) राजा तेजराय
(21) राजा तुंगपाल
(22) राजा गयपाल
(23) राजा राजपाल
(24) राजा रामपाल
(25) राजा धर्माङ्गद
(26) राजा असैराज
(27) राजा सदमतराय
(28) राजा सोमपाल
(29) राजा दुनीपाल
(30) राजा नरसिंह
(31) राजा महीपाल
(32) राजा विनयराज
(33) राजा देवराज
(34) राजा लघु धर्माङ्गद
(35) राजा धरणीवाराह
इस राजा #धरणीवाराह के नव भाई और हुये उन्हो के नव कोट प्रसन्न होके दीये थे जिनकी यादगीरी
गढ मडोर सावतसिंह को दीया, अजमेर अजैसिंह को दीया, गढ पूगल गजमलजी को दीया, गढ लुद्रवो भाग को दीया जोगराज को धाट दीया...हासू को पारकर दीया, अलसी को पलू दीया, पालणसी को अर्बुद दीया, भोज को जालोर दीया, राजसी को किराडू दीया,
(36) राजा धरणी वाराह अवंती का इसके पुत्र तीन
⭕ राजा धार गिर अवती ३७
⭕इससे छोटा सोढा उसका शासा
⭕सोढा कहाया तृतीय पुन शाखला
(37) इसकी सन्तान शाखला कहाते है
(38) राजा धाहड धार गिरि का
(39) राजा धीरसेन
(40) राजा पोपसेन
(41) राजा लखनसेन
(४२) राजा वुधसेन
(४३) राजा कालसेन
(४४) राजा कलिङ्गदेव
(४५) राजा इन्द्रसेन
(४६) राजा चिनागद
(४७) राजा गन्धवसेन
(४८) राजा विमादित्य
(४८) भाई भरथरी
(४९) वेताल
(५०) वाई मैणावती
⭕संदर्भ : पँवार वंश दर्पण by दशरथ शर्मा ।
📛भविष्य पुराण के अनुसार आगे....
1) परमार 392-386 ईस्वी पूर्व
2) महामारा 386-383 ईस्वी पूर्व
3). देवापी 383-380 ईस्वी पूर्व
4). देवदत्ता 380-377 ईस्वी पूर्व
5). DEFEATED BY SAKAS. LEFT UJJAIN AND HAD GONE TO SRISAILAM. INEFFICIENT AND NAMELESS KINGS. THEIR NAMES ARE NOT MENTIONED IN THE PURANAS 195 377-182 ईस्वी पूर्व
6). गंधर्वसेन (1ST TIME) ने शको को पराजित कर अम्बावती (उज्जैन) को मुक्त करवाया एवं ५० वर्ष तक शासन किया; 182-132 ईस्वी पूर्व
7). सम्राट गंधर्वसेन अपने ज्येष्ठ पुत्र शंखराज को राजपाठ सौंप कर सन्यास लेकर तप करने चले गये थे शंखराज ने ३० (30) वर्ष तक शासन किया १३२-१०२ (132-102 B.C) ईस्वी पूर्व तक शंखराज की अकाल मृत्यु होने के पश्चात महाराज गंधर्वसेन को राज्य की सुरक्षा के लिए तप छोड़कर फिरसे राजपाठ संभालना पड़ा १०२-८२ (102-82 B.C) ईस्वी पूर्व तक शासन किये गंधर्वसेन परमार ने अपने पुत्र विक्रमादित्य को ८२ (82 B.C) ईस्वीपूर्व में राजपाठ सौंपकर सन्यास ले लिए एवं तपस्या करने चले गये ।
8). सम्राट विक्रमादित्य ने १०० (100) वर्ष तक शासन किये थे सम्पूर्ण विश्व पर; ८२ (82) ईस्वी पूर्व से लेकर १९ (19) ईस्वी तक
9). देवभक्त १९-२९ ईस्वी मात्र १० वर्ष तक शासन किये थे
10) NAMELESS KING OR KINGS (NAME NOTGIVEN IN THE PURANAS) 49 29-78
11). सालिवाहन 60 वर्ष तक शासन किये थे ७८-१३८ (78-138 B.C) ईस्वी तक ।
12-20). सलीहोत्र, सालिवर्धन, सुहोत्र, हावीहोत्र, इन्द्रपाल, मलायावन, सम्भुदत्ता, भौमाराज,वत्सराज इन सभी राजाओ ने कुल मिलाकर ५० (50) वर्ष १३८-६३८ ईस्वी (138-638 A.D) तक शासन किये थे ।
21). भोजराज ५६ (56) वर्ष तक शासन किये थे ६३८-६९३-९४ (638-693-94) ईस्वी ।
22-28). सम्भुदत्ता, बिन्दुपल, राजापाल माहिनारा, सोमवर्मा, कामवर्मा, भूमिपाल अथवा (वीरसिंह) ३००(300) वर्ष तक शासन किये थे ६९३-९९३-९४ (693-993-94) तक ।
29-30).रंगापाल,कल्पसिंह २०० (200) वर्ष तक शासन किये थे ९९३-११९३-९४ (993-1193-94) ईस्वी तक ।
31) गंगासिंह (King Ganga Simha reigned from 1113 to 1193 A.D. In the battle of Kurukshetra, the 90 year-aged Ganga Simha died on the field along with Prithviraja etc. (see Agni Kings Bhavishya Puranam) परमार राजवंश का अंतिम राजा थे गंगा सिंह परमार थे
⭕संदर्भ : इतिहासकार मनिषासिंह कृत पुस्तक विश्व विजयेता शालिवाहन परमार
#निष्कर्ष : सूर्य वंशीय प्रमारो या पँवारो के chronology में बुध्द और चंद्रगुप्त मौर्य का आना एक भ्रामक प्रचार है। यह दोनों इतिहासकार राष्ट्रवादी है। अपितु जो एक chronology चलाई जा रही है वह वामपंथ की दिमाग की उपज है। उससे सावधान ⚠
कमेंट बाक्स में वंशावली के पृष्ठ 📄 देखें।

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