चक्रवर्ती राजा भोज का बनाया भोजस्वामिदेव मंदिर चित्तौड़

भोजस्वामी देव मंदिर अर्थात् समाधीश्वर मंदिर  :


यह धारेश्वर चक्रवर्ती सम्राट भोजदेव द्वारा निर्मित असाधारण कलाकृति होने के साथ ही अवन्तिनायक भोज के शिवभक्ती का और एक एतिहासिक साक्ष्य है। महाराज भोजदेव वाग्देवी उपासक होने के बाद बड़े शिवभक्त थें। उन्होंने विशेषकर अनेक शिव मंदिर बनवाये। चित्तौड़ में उन्होंने जो मंदिर बनाया उसे इतिहासकार भोजस्वामिदेव मंदिर कहते हैं जिसे समधिश्वर के नाम से भी जाना जाता है। "भोज स्वामी देव" अर्थात् जो भोज का स्वामी हो आराध्य देव हो। तथा समधिश्वर अर्थात् जहाँ शिव समाधि में लीन हो।

#मंदिर_के_शिलालेख_पर_अंकित_है :

"शिव को समर्पित इस मन्दिर का निर्माण परमार शासक भोज द्वारा ग्यारहवीं सदी के मध्य में किया था । विक्रम संवत 1485 ( 1428 ई . ) में मोकल ने इस मन्दिर का पुर्ननिर्माण करवाया । क्षैतिज योजना में मन्दिर गर्भगृह . अन्तराल , मण्डप के साथ उत्तर , दक्षिण व पश्चिम में मुखमण्डप से युक्त है । मण्डप की छत पिरामिड आकार है । गर्भगृह में विशाल शिव की त्रिमुर्ति स्थापित है । मंदिर के भीतरी एवं बाहय दीवारें देवी - देवताओं की आकृतियों से सुसज्जित है । साथ ही प्रांगण मे अनेक छोटे - छोटे प्राचीन मन्दिर स्थित है । मंदिर के दक्षिण से पवित्र गोमुख जलाशय में उतरने हेतु सोपान बने हुए।"

यह अनुपम बारिक नक्काशीदार कलाकृति है। 

यहां इस मंदिर परिसर में ही एक स्तंभ भी है जो विजय स्तंभ के सरिख है। 

मंदिर के पत्थर और पार्श्व शिलाओं के सुक्ष्म नक्काशीयाँ स्वर्ण आभा सी दृष्टिगत होती है। 


यह उंचाई पर स्थित किले से परिदृश्य को दिखलाने वाला मंदिर का हिस्सा गढ़ के मजबूत दिवारों तथा जलाशय का सौंदर्य प्रकट करने वाला उत्तम स्थल है। 










जय शिवभक्त राजा भोज 🚩
हर हर महादेव 🙏🙏🙏🙏🙏

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