चक्रवर्ती मालवगणमुख्य विक्रम संवत् प्रवर्तक प्रमार कुलावतंस विक्रमादित्य महान् !



सनातन धर्म संरक्षक आर्योत्तम् विक्रमी संवत प्रवर्तक ! महाराजाधिराज परमेश्वर ! राजराजेश्वर ! 
पृथ्वीपती सिंहासनाधिश्वर मालवगणमुख्य महाचक्रवर्तीय प्रमार क्षत्रियकुलावतंस  आर्यसम्राट अवंतिपती शकारि श्री श्री श्री साहसाङक महाराजा वीर विक्रमादित्य महान् की जय हो !

वीर गंधर्वसेन पुत्र मालवगणमुख्य विक्रमादित्य ने महावीर स्वामी के निर्वाण काल के 470 वर्षों के पश्चात भारत को शक मुक्त कराया और विक्रम संवत् या युग चलाया जो आज भी चल रहा है। 

महाकवि कालिदास चक्रवर्ती विक्रमादित्य प्रमार के दरबार में नवरत्न थे, और उनका और चक्रवर्ती विक्रमादित्य प्रमार का समय ईसा पूर्व 56 (प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व) था। [1] [2]

नंदसा अभिलेख मालव जाती को इक्वाक्षुवंशीय राजर्षिवंश कहता है। नंदसा अभिलेख यह संकेत करता है कि मालव सुर्यवंशी क्षत्रिय थे। मालवों का प्रारंभिक इतिहास महाभारत में प्राप्त होता है। उसके अनुसार मालव तत्कालीन प्रमुख क्षत्रिय राजवंशों से संबंधित थें। 

(१) विराट के श्यालक कीचक की माता मालव राजकुमारी थी। (महाभारत. 5) 
(२) मद्रराज अश्वपति की रानी सावित्री की माता मालव राजकुमारी थी।  (वही) [3]

संदर्भ :
[1] select specimens of the Theatre of the Hindus, Volume 1.(By Horace hyman wilson, MA, FRS. ) LONDON 1885. P. 186.
[2] "A Concise History of classical sanskrit Literature" by Gaurinath bhattacharya shastri, Gaurinath sastri. P. 77.
[3] Vikramaditya. By Dr. rajbali Pandey. 
 





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