गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर

#गुजरात_स्थित_सोमनाथ_मंदिर

उदयपुर प्रशस्ति के अनुसार इसका भव्य जिर्णोद्दार तथा महत्वपूर्ण पुनर्निर्माण पँवार चक्रवर्ती नरेश धारेश्वर भोज द्वारा ग्यारहवीं शताब्दी में किया गया था। वह भी तब, जब सोमनाथ को गजनवी ने भग्न किया था - "ठिक उस घटना के पश्चात"..........सन १०२६ के बाद....

#अलबेरूनी लिखता है कि परम राजा अर्थात् "#परमभट्टारक_सम्राट_भोजदेव"  के आने के समाचार मिलते ही सोमनाथ को लूट के साथ ही गजनवी को सिंध से किसी तरह बचकर निकलना पड़ा। उस समय भोजदेव चक्रवर्ती  मालव सम्राट थें । एक लाख सेना के साथ वे महाकाल भक्त,, उस मलेच्छ गजनवी पर हमला बोल चुके थे लेकिन तुर्की लेखक गदरिजी के माने तो वें मार्ग में गजनवी की अपेक्षा ग्यारह दिन पिछे थे,, फिर भी उनकी शत सहस्त्र सेना प्रचंड वेग से आ रही थी। भोज सेना इतने करिब थी कि यदि गजनवी जरा भी देर करता तो जिवीत बच निकलना लगभग असंभव था। हालाँकि गजनवी फिर भी बचकर भागने में सफल रहा।
मालवा की राजधानी धार से गुजरात के सोमनाथ का अंतर ७१७.९ किलोमीटर है। उस समय के अनुरूप यह क्रम दिर्घ था, उपर से ग्यारह दिन पिछे... इसलिए ऐसा तो होना ही था।

बाद में इस भग्न मंदिर को कलाप्रेम के लिए विख्यात सम्राट भोज ने ऐसा निर्मित किया कि कोई भी इसकी भग्न होने की स्थिति का आकलन नहीं कर सकता। अपने आप में बिल्कुल नया और सुदृढ़ आज भी अपनी अतित के दर्प को शाश्वत रखे हुए हैं।

सोमनाथ मन्दिर भूमंडल में दक्षिण एशिया स्थित भारतवर्ष के पश्चिमी छोर पर गुजरात प्रदेश में स्थित है,अत्यन्त प्राचीन व ऐतिहासिक सूर्य मन्दिर का नाम है। यह भारतीय इतिहास तथा हिन्दुओं के चुनिन्दा और महत्वपूर्ण मन्दिरों में से एक है।

इसे आज भी भारत के १२ ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में माना व जाना जाता है। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह में स्थित इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था, यह मान्यता है।

#हर_हर_महादेव🙏









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