पौंड स्टर्लिंग का वास्तविक इतिहास

पौंड स्टर्लिंग का वास्तविक इतिहास

इंग्लैण्ड में '#पौंड_स्टर्लिंग' नाम का एक सिक्का है । वह 'पौंड स्तर लिंग' ऐसा संस्कृत शब्द है ।


  #भगवद्गीता के 'पौण्ड्र दध्मौ महाशंखं भीमकर्मा वृकोदरः' वचन से प्रतीत होता है कि किसी भारी या महत्वपूर्ण ( वजनदार ) वस्तु को प्राचीन वैदिक परम्परा में 'पौण्ड' , यह विशेषण लगाया जाता था । उसी का बिगड़ा प्रचलित उच्चार पौण्ड हैं ।


उसके ऊपर शिवलिंग का छप्पा होने से वह पौण्ड ( यानि भारी ) स्तर का शिवालिंग कहलाया । अत : उस सिक्के को पौण्ड उर्फ  'पौण्ड स्तरलिंग' यह सार्थ नाम पड़ा ।


 उसी प्रकार आंग्ल भूमि में भारी वजन को भी 'पौण्ड' कहते हैं अर्थात् वह भी पौण्ड शब्द का ही प्रचलित आंग्ल प्राकृत रूप है । पौण्ड स्तरलिंग के २० भाग किए गए हैं । प्रत्येक भाग एक शिलिंग कहलाता है । ऐसे २० शिलिंग मिलाकर एक पौण्ड स्तरलिंग बन जाता है। इससे तो हमारा निष्कर्ष और भी पक्का साबित होता है । क्योंकि २० शिवलिंगों को ( यानि शिलिगों को मिलाकर ) एक बड़े स्तर का यानि पौण्ड उर्फ ' पौण्ड स्तरलिंग ' बनता है ।


  शिलिंग से कम मूल्य के सिक्के को ' पेन्स् ' या ' पेनि ' कहा जाता है जो ' पणस् ' ( यानि एक पैसा ) ऐसा संस्कृत शब्द है ।


डोरोथी चॅपलीन लिखती हैं कि , " प्राचीन भारत में सोने या चाँदी के सिक्के को ' नाणा ' कहते थे । क्योंकि उनके ऊपर पार्वती की या पार्वती और महादेव की प्रतिमा होती थी " |


  मराठी भाषा में अभी भी सिक्के को ' नाणे ' कहते हैं । ईरान आदि देशों में प्राचीनकाल में सिक्के को दीनार कहते थे । दीनों का आधार या दैनन्दिन जीवन का आधार इस अर्थ का वह शब्द है ।


इस प्रकार paund sterling संस्कृत शब्द प्रणाली का सिक्का है।


  कृस्तपूर्व काल तक सारे विश्व में संस्कृत भाषा और वैदिक शासन पद्धति ही प्रचलित थी इसका प्रमाण विविध देशों के सिक्कों में पाया जाता है । विविध देशों की द्रव्यमूल प्रणाली हमारी संस्कृत है । कई देशों में कृस्ती या इस्लामी शासक अधिकाररूढ़ होने पर भी वैदिक परम्परा के प्रभाव के कारण उन्हें निजी सिक्कों पर संस्कृत अक्षर और लक्ष्मी आदि की प्रतिमा खुदवानी पड़ती ।


उदाहरणार्थ #महमूद_गजनवी के शासन के ऐसे कई सिक्के पाए गए हैं । किन्तु वर्तमान इतिहासकारों ने अज्ञानतावश या जानबूझकर उसका गलत अर्थ लगाया ।


कोई समझने लगे कि महमूद गजनवी ने भले ही अत्याचार किए हों , मन्दिरों को तोड़ा हो , हिन्दुओं को कत्ल किया हो , उन्हें लूटा हो , बन्दियों को गुलामों के नाते बेचा हो , हिन्दु स्त्रियों पर इस्लामी सेना द्वारा सामूहिक बलात्कार करवाया हो , फिर भी वह संस्कृत का बड़ा भारी विद्वान था , या संस्कृत - भाषा के प्रति उसका गहरा लगाव था , या वह हिन्दु - मुस्लिम एकता का पुरस्कर्ता था , इत्यादि - इत्यादि ।


गांधी - नेहरू युग में कांग्रेस नेता , कांग्रेस सरकार , मुसलमान जनता आदि को तुष्ट कर धन , उपाधियाँ , अधिकार , पद आदि पाने के लालच में इतिहासज्ञों ने समय का लाभ उठाकर कुछ ऐतिहासिक तथ्यों का ऊपर कहे अनुसार अनाघून और ऊट - पटांग अर्थ लगाकर अपना उल्लू सीधा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी । देशों - प्रदेशों के द्रव्य , सिक्के आदि के नाम संस्कृत होना कोई आश्चर्य नहीं हैं!


✍️जय मां भारती 🚩 🚩 🚩 🚩 🚩 🚩

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