मानसिक रूप से स्वतंत्र भारत...


श्रीमंत पेशवा बाजीराव बल्लाल के हस्ताक्षर...

मन में मेरे देखकर यह लिखने के लिए प्रेरणा हुई और यह पंक्तिया मैने रच दिया... 

है भारत यह स्वतंत्र-मानस,
उस स्वर्णिम वैदिक काल का
मातृ लिपि हस्ताक्षर में होती,
था दिखता शौर्य तब भाल का ।।


     ✍️ जय मां भारती 🚩 🚩
🚩 🚩 🚩 

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