महाभारत काल में बारूद आदि का प्रमाण

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       कतिपय ऐतिहासिकों का मन्तव्य है कि भारतवर्ष में बारूद और बन्दुक आदि का प्रयोग मुसल्मानों के इस देश में आने के बाद से ही प्रारम्भ हुआ है । वे लोग बारूद के आविष्कार का श्रेय अरब वासियों को ही देते हैं । उनका कहना है कि मुसलमानों के साथ युद्ध करते हुए ही भारत वासियों को बारूद का परिचय हुवा है । परन्तु वह सिद्धान्त सर्वथा अयुक्ति युक्त और प्रमाण विरुद्ध है ।इसके पूर्व भी हम महाभारत के प्रमाणों द्वारा उस समय अग्न्यास्त्रों और बारूद आदि की सत्ता सिद्ध कर चुके हैं । #शुक्रनीतिसार में तो बड़े स्पष्ट शब्दों में बारूद के फारमूले प्राप्त होते हैं ; इस ग्रन्थ में तोप , बन्दूक , गोले आदि का वर्णन कई स्थानों पर प्राप्त होता है । केवल शुक्रनीति ही नहीं अपितु अन्य कतिपय स्मृति ग्रन्थों , पुराणों तथा साहित्यिक ग्रन्थों द्वारा मुसल्मानों से बहुत पूर्व भारतवर्ष में बारूद तथा बन्दुक आदि की सत्ता सिद्ध होती है । उन ग्रन्थों के तथा कतिपय अन्य प्रमाण यहाँ दे देना अनुचित न होगा--


(१) सन् १७६८ में महाशय लैंग्ले ( M. Langle ) ने फ्रान्स की साहित्य परिषद् ( French Institute ) के सामने एक निबन्ध पढ़ा था जिसमें उन्होंने सिद्ध किया था कि अरब के लोगों ने भारतवासियों से बारूद बनाना सीखा और फिर उन से यूरोप के अन्य देशो ने । इसी बात को जे ० वैकमैन ने अपनी पुस्तक ' आविष्कारों का इतिहास ' ( History of Inventions and Descoveries ) में सिद्ध किया है ।


(२) #मनुस्मृति में एक श्लोक आता है [1] ;उस का अर्थ है-


          " लड़ाई में कोई व्यक्ति अपने शत्रु को छिपे हथियारों से , तेज़ या विष में बुझे हुए तीरों से अथवा आग फेंक कर न मारे । "


        इस श्लोक से स्पष्टतया किसी ऐसे हथियार की झलक मिलती है जिसके द्वारा कि आवश्यकता पड़ने पर अग्निवर्षा की जाती होगी ।


(३) #हरिवंश_पुराण में आए हुए एक #श्लोक[2] का अभिप्राय इस प्रकार है -


        " राजा सागर ने भार्गव ऋषि से अग्न्यास्त्र प्राप्त करके सप्ततालजंघों को मार कर सारी पृिथिवी को जीता।। "


(४) महाराज तथा महाकवि हर्प द्वारा विरचित नैषध काव्य में एक श्लोक[3] आता है जिस का अभिप्राय इस प्रकार है---


       " #दमयन्ती की दोनों भुवें, मदन और रति को भुवों के समान जान पड़ती हैं , उस के नाक के दोनों छेद कामदेव के बन्दूकों के समान हैं , जिन से कि वह सारे संसार को जीतता है ।"


   इन सब प्रमाणों से यह भली प्रकार सिद्ध होता है कि बन्दूक आदि आग्नेयास्त्रों का प्रयोग भारत वर्ष में बहुत प्राचीन काल से चला आता है ।


#शस्त्रास्त्रों_के_भेद -


 #शुक्रनीति के अनुसार उस समय के शस्त्रास्त्रों के सम्बन्ध में हमें यह ज्ञान प्राप्त होता है - -


      जो मन्त्र अर्थात् #password,मशीन या आग की सहायता से फेंका जाय उसे अस्त्र कहते हैं , इन से भिन्न हथियारों - तलवार वछीं आदि - को शस्त्र कहते हैं । 


         ✍️ जय मां भारती 🚩 🚩 🚩 🚩 🚩 


#संदर्भ--


📖 history of Bharatvarsha by pro. Ramdev. Vol(iii). 

 [1] न कुवैरायुधैर्हन्यात् युद्धचमानो रणे रिपुम् ।

न कर्णिभिर्नापि दिग्धैर्नाग्निज्वखित तेजनैः ॥ ९३॥ ( मनुस्मृति अ.१० )

 [२] आग्नेयमस्त्रं लब्ध्वा च भार्गवात् सगरो नृपः ।

जिगाय पृथिवीं हत्वा तालजंद्यान् सहैहयान् ॥

( हरिवंश पुराण अ.१४ . श्लो० १३ )

[3]  धनुपि पञ्च वाणयोरुदिते विश्वजयाय तद्भुयौ ।

नालिके न तदुच्च नातिके त्ययो नालिका विमुक्तिमान्नुपौ । ( नैषध , सर्ग २. श्लोक  २८ )


                    🙏🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🙏

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