त्रिया चरित्रं

नृपस्य चित्तं ,कृपणस्य वित्तम; 
त्रिया चरित्रं ,पुरुषस्य भाग्यम ;
देवो न जानाति कुतो मनुष्यः ॥ 

~ सम्राट भर्तुहरी का कथन

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