निषिद्ध का सामान्यीकरण ही तो विराष्ट्रियकरण का सुत्र है...


OMG 2 exposed.....

1. पहले से ही अत्यंत आपत्तिजनक अर्थात् सहशिक्षा मे लज्जा से मर जावे ऐसी सेक्स एजूकेशन कक्षा दसवीं से बारहवीं मे दी जाती है। 

2. फिर भी OMG 2 जैसी एजेंडाबाज फिल्म आचार्य वात्स्यायन के कामसूत्र के हवाले से किस सेक्स एजूकेशन को प्रस्थापित करने की बात करते हैं? 

3. आचार्य वात्स्यायन तो विद्या का अध्ययन ब्रह्मचर्य के साथ जब तक पुरा न हो जाए, यानी पुरा प्रमुख एजूकेशन (वर्तमान के अनुसार स्नातक या PG तक PhD तक) पुर्ण न हो, (अर्थात् ब्रह्मचर्याश्रम) तब तक ब्रह्मचर्य का पालन करने ही कहते हैं।

4. उनके नामपर छोटे बच्चों को अनावश्यक अब्रह्मचर्य युक्त चित्रण व शिक्षा कराने व अमर्यादा युक्त विराष्ट्रियकरण की सोच वात्स्यायन के भी विरूद्ध है। अतः ये दिखाना की हम मैकालेइज्म के विरोधी है और काम मैकाले से भी हानिकारक करना उससे भी गिरा हुआ करना बडी हानिकारक धूर्तता है। 

5. अतः इनसे सावधान रहें। ये भ्रामक व हास्यास्पद नेरेटिव है। मात्र धनार्जन व विराष्ट्रियकरण ही इनका उद्देश्य है।

#ध्यातव्य : OMG 2 पर ध्यान दिया जावे तो एक बात आगे आती है कि इस फिल्म का उद्देश्य विराष्ट्रियकरण है। भ्रम फैलाकर, स्वयं को मैकालेइज्म का विरोधी बताकर, वात्स्यायन का नाम आगे करके, जहा पहले से ही रति शिक्षा हो, वहा इसका निर्माण तर्कसंगत तो है ही नहीं। ऐसे में ये फिल्म का यथार्थ उद्देश्य क्या है? उसका उत्तर हमे मिलेगा निरिक्षण से। इन दिनों जैसी श्रृंखलाओं का निर्माण 2021 पश्चात से हुआ, उसी अंदाज में हिन्दू परिवार दिखाकर उसमे नर्क को परोसा है। अमर्यादा पारिवारिक कदाचार के भांति ये फिल्म है, एक अच्छा टॉपीक हमने लिया है ये बताकर इस शैली से यहां सब चित्रण किया गया है। निषिद्ध का सामान्यीकरण ही तो विराष्ट्रियकरण का सुत्र है।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

महाराणा प्रताप के दरबारी पं. चक्रपाणि मिश्र: ज्ञान विज्ञान के एक विस्मृत एक अपरिचित एतिहासिक पात्र......

नशेड़ी ओशो के अनुसार बच्चे खुलकर नशा करें...

दृष्ट व्यक्ति की परिभाषा...