ओशो एक व्यभिचारी

व्यभिचारी ओशो

किसी की लेखनी अच्छी होती है, किसी का वक्तव्य अच्छा होता है, किसी की प्रतिभा अच्छी होती है। हो सकता है वो अच्छा बोल पाता हो, या हो सकता है वो अच्छा लिख पाता हो, या वो व्यक्ति हर विषय पर रचनात्मक रूप से वाणी द्वारा जटिल विषय बहोत सरलता से अभिव्यक्त कर सकें व उनको समझे। जाहिर है कि वो एक बुद्धि युक्त व्यक्ति है। उसकी कई बाते आकर्षक लच्छेदार व स्वीकार्य हो सकती है। हो सकता है ऐसे ऐसो मे कोई इंजीनियर हो, कलाकार हो, डॉक्टर हो, निष्णात कोई जज हो। वाणी व लेखन में वो विद्वान हो।

लेकिन ऐसा प्रतिभाशाली व्यक्ति अपने कर्म में व्यवहार में भिन्न हो, उस ने यदि आपके या किसी के निर्दोष बहन बेटी बहु वा भार्या का बलात्कार किया , उसने कोई कोठा खोला, इसी प्रतिभा का जानकारी व बुद्धि का चूड़ान्त दुरुपयोग कर अध्यात्म ज्ञान तंत्र आदि के नामपर अपने दिमागी उपज से यहां वहां से जोड़तोड़ करके कोई कथित दर्शन गढकर के कोई कोठा खोल दिया, व वहा व्यभिचार का रति-संसर्ग का पंथ चला दिया , लोगो को गोनोरिया हो रहा है, यौन रोग हो रहे हैं, कयी व्यभिचारी उसके चेले चपाटे बन गये हैं, हर रोज उसके अड्डे मे ९० स्त्रियों का रति-संसर्ग (व्यभिचार जो कि कानूनन भी भारत में दंडनीय रहा) होता हो, व वेश्यावृति भी कानूनी रूप से जहां आज भी अवैध हो वहां संप्रदाय के नामपर ये वेश्यावृति स्थापित की गयी हो उसके द्वारा, धर्म तत्व तंत्र आदि के नामपर...

तो प्रश्न छोटा सा है कि किस आधार पर वो व्यक्ति दार्शनिक हो गया, माननीय हो गया, भगवान हो गया? धर्म गुरू वा अध्यात्मिक गुरू हो गया? ऐसे कितने ही पंथ निराधार अज्ञानी लम्पट लोगो ने चलाए व चल रहे हैं। जिनमे थोडी बहोत सम्मोहन की प्रतिभा थी, दस्यु तो चालाक भी होते हैं। हो सकता है रावण के भांति ही ले लिजिए।

हम जिसकी बात कर रहे हैं वो लगभग ऐसा ही हवा हवाई नशेड़ी व्यभिचारी निराधार बकवाद करने वाला, सैकड़ों दंतकथाओ किस्से कहानियों का प्रवचनकार शक्श है... इसका तो राम-रहिम आदि व मौलवी फादर पोप आदि से ये हजारों गुना अग्र, तत्कालीन नवीन एक देह व्यवसाय का पंथ बना, पापकर्म हुए, बलात्कार हुए, साक्ष्य मिटे मिटाए गये, और आप जो है उसको उसके पंथ को आज हिरो बनाए हुए हैं। जानते हो किस आधार पर?

आधार देखीए.. कोई कहता है बडा ज्ञानी व्यक्ति था वो, कोई कहता है कि वो उजागर करता था बडे बडों को, कोई कहता है फलाने बुराई का विरोध किया..आदि आदि.. अब वो क्या कहता था क्या नही, सत्य असत्य वो अलग रखिए, क्योंकि झूठ को परखने पकडने का काम हर कोई कर नही सकता। ये तो अध्ययन का कार्य है। लेकिन कम से कम आम से आम भी उसके दुराचरण को देखकर तो उसको समझ सकता है। क्या ऐसा व्यक्ति आप की बहन बेटी आबरू को बलात् दुषित करे तो आप उसे फिर भी भगवान मानेंगे? यहां तो यथार्थ साक्ष्यों के आधार पर हम बताते हैं कि उस व्यक्ति ने प्रतिदिन कितनो को नग्न किया करवाया, लुटा खसोटा, प्रोत्साहित किया उस हेतु पुस्तक व प्रवचन रचा , उसके दर्ज आंकडे है कानूनी दस्तावेजों मे..और जो दर्ज नही सो अलग...

लेकिन पाखंड देखिए कि उस व्यक्ति ने हर विषय पर हर दर्शन पर ज्ञान पेला है। ब्रह्मचर्य पर, गीता पर, उपनिषद पर सबपर... जिसके कथित आश्रम (वेश्यालय) मे जाने के पूर्व HIV test अनिवार्य होता है[1], कयी अच्छे अच्छे पढे लिखे मुर्ख भी उसे दार्शनिक कहते हैं - - नाम है ओशो रजनीश।

उसे विदेशों में कई जेलों में क्राइम के साक्ष्यों के आधार पर सजा हुई व जंजीरों में बांधकर घुमाया गया, डब्ल्यूआरएसपी की एक रिपोर्ट के अनुसार , भारत सरकार ने ओशो के संबंध में आपराधिक व्यवहार के कई आरोपों की जांच शुरू की थी। इनमें ओशो द्वारा स्वीकृत वेश्यावृत्ति, अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थों की तस्करी, सोने की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग, किडनैपिंग और कर चोरी से संबंधित आरोप शामिल थे। भारत में इसके चेले चपाटे कौन थे? कयी बालीवुडीएं जो कि गटर का ही द्वितीय नाम है। ओशो का सबसे विवादित विचार है परिवार की परंपरा को समाप्त कर कम्यूनिस्ट अवधारणा को स्थापित करना। ओशो की नजर में जब परिवार की जरूरत नहीं तो विवाह गौण हो जाता है। दूसरी ओर संन्यासाश्रम भी वो अनुचित बताता है। अर्थात् पशुता, लम्पटता कुत्ते कुत्तीया कल्चर.. अब सोचिए ऐसे पाखंडी ने जो पुस्तकें रची है उनमे से कुछ निम्नलिखित है जो देखकर आप दंग रह जाएंगे.. कितना बडा जोक है - -

★भक्ति सूत्र (नारद)

★मीराबाई पर केन्द्रित- १.पद घुँघरू बाँध

                                   २. झुक आयी बदरिया सावन की

★अष्टावक्र पर केन्द्रित-अष्टावक्र-महागीता (६भागों में)

★शिव-सूत्र (शिव) भजगोविन्दम् मूढ़मते

★गीता-दर्शन (आठ भागों में अठारह अध्याय)

★उपनिषद पर केन्द्रित-

     सर्वसार उपनिषद

     कैवल्य उपनिषद

     अध्यात्म उपनिषद

     कठोपनिषद

     ईशावास्य उपनिषद

     निर्वाण उपनिषद

     आत्म-पूजा उपनिषद. 

     केनोपनिषद

     मेरा स्वर्णिम भारत (विविध उपनिषद-सूत्र )  

★बुद्ध व महावीर पर भी है.. 

और उपरोक्त इनमे से किसी ने भी सेक्स का कथित कोठा नही खोला लेकिन इनपर लिखने वाले ने खोल दिया...

बलात्कारी व व्यभिचारी दोनो का अस्तित्व काम की प्रवृत्ति पर आधारित है, एक बलात् उसे पुरी करता है वह दूसरा उसकी पूर्ति हेतू कोई ऐसा निषिद्ध काम करता है कि कामी से कामी मिले व सहमति बनें । और इसप्रकार का लगभग मार्ग बनाने वाला बलात्कारी के ही बराबर स्तर वाला है। जो कि ओशो था। सारा कथित साहित्य वा प्रवचन वही मार्ग था।

"निश्चित ही , रावण ब्रह्मज्ञानी था और रावण के साथ बहुत अनाचार हुआ है और दक्षिण में जो आज रावण के प्रति फिर से समादर का भाव पैदा हो रहा है , वह अगर ठीक रास्ता ले ले तो अतीत में हमने जो भूल की है , उसका सुधार हो सकता है ।" 

-ओशो ( गीता दर्शन : भाग -8 , प्रवचन- 211/06 )

जीवन में अनेक पुस्तकें अनेक प्रवचन पब्लिश करने से कोई दार्शनिक बने, बहोत प्रकांड पंडित होकर रावण के भांति हो, वा बलात्कारी हो फिर भी मात्र चरित्र उसके दार्शनिक होने मे बाधित न रहे तो ऐसे में राम रहिम आसाराम आदि भी महानतम दार्शनिक हुए, और रावण भी बहोत बडा दार्शनिक हुआ जो कहता था - गमनं वा परस्त्रीणां हरणं संप्रमथ्य वा ॥ अर्थात् दूसरों की स्त्रियों का हरण व परस्त्रियों से भोग करना राक्षसों का धर्म है - इसमें संदेह नहीं ॥¶ 

इस प्रकार इन्हे भी भगवान मान लो। अनेक आतंकवादी बलात्कारी भी परिश्रमी प्रतिभावान होते होंगे, वे भी दार्शनिक हैं। उत्कृष्ट विवेक है कयी महानुभावों का। ईश्वर उन्हे सद्बुद्धि प्रदान करें।

-ओशो ( गीता दर्शन : भाग -8 , प्रवचन- 211/06 )

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¶( सुंदरकांड सर्ग २०/५ )

[1]https://www.google.com/amp/s/www.bhaskar.com/amp/MH-PUN-HMU-know-what-really-happens-inside-osho-ashram-at-pune-5190307-PHO.html/

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