अशोक के इतिहास का फर्जीवाड़ा...
अशोक के इतिहास का फर्जीवाड़ा...
काश्मीर के गोनन्द राजवंश का शासक अशोक और मौर्य वंश का अशोक माने कालाशोक दोनो एक ही व्यक्ति केवल इस आधार पर नही हो सकते कि दोनो का शासनकाल बुद्ध के निर्वाण के लगभग 100 वर्ष पश्चात होता है।
गोनन्द राजवंश व मौर्य क्या दोनो एक है? गोनन्द और मौर्य दोनो एक है? इतिहासकार वेदवीर आर्य भी दोनो को काल के अनुमानित आधार पर एक मानते हैं, लेकिन दोनो का राजवंश भिन्न, माता पिता भिन्न, राजधानीयां भिन्न-भिन्न, साम्राज्य भिन्न-भिन्न, तो दोनो अशोक एक कैसे हो सकते हैं?
इस संदर्भ इतिहासकार प्रो. आचार्य रामदेव का मत ही सत्य है। जो इनको भिन्न मानते हैं।
आचार्य रामदेव का कहना है कि बौद्ध लेखकों ने अशोकादित्य (समुद्रगुप्त) और गोनन्दी अशोक (कश्मीर) दोनों कोमिलाकर एक चक्रवर्ती अशोक की कल्पना कर ली है। (भारतवर्ष का इतिहास, तृतीय खण्ड, प्रथम भाग, पृ.41)
➡️ इतिहासकार सत्यकेतु विद्यालंकार कृत
मौर्यवंश का इतिहास पृ. 77 पढि़ए :-
एक अशोक मौर्य वंश का था ,
जिसका उल्लेख पुराणों में विद्यमान है ।
दूसरा अशोक गुप्त वंश में हुआ था ,
जो वंश के संस्थापक 'चन्द्रगुप्त गुप्त' का
पुत्र था । यह समुद्रगुप्त भी कहाता था , और
कलियुगराजवृत्तान्त में इसे ' अशोकादित्य '
भी कहा गया है ।
तीसरे अशोक का वर्णन कल्हण द्वारा
विरचित राजतरङ्गिणी में मिलता है ।
यह अशोक गोनन्द वंश का था , और
इसके पितामह का नाम शकुनि था ।
इसने बौद्ध धर्म को स्वीकार कर लिया था ,
और बहुत से स्तूपों , चैत्यों , विहारों और
संघारामों का निर्माण कराया था ।
काश्मीर की राजधानी श्रीनगर की स्थापना
भी इसी अशोक द्वारा की गई थी ।
इसके शासन काल में एवं उससे पूर्व
विदेशी म्लेच्छ जातियों के आक्रमण भी
भारत के क्षेत्र में प्रारम्भ हो गये थे ,
और इनसे अपने राज्य की रक्षा करने के
प्रयोजन से इस अशोक ने ' भूतेश ' की
आराधना कर जलोक नामक पुत्र को
प्राप्त किया था । अशोक नाम के जिस
राजा के उत्कीर्ण लेख इस समय प्रायः
सम्पूर्ण भारत में पाये जाते है , सम्भवतः
वह यही अशोक था ।
वर्तमान इतिहासकार वेदवीर आर्य इन्होने जो काश्मीर के गोनन्द व मौर्यवंश के अशोक के एक होने की बात रखी है। अनुवाद प्रस्तुत है।
➡️ वे प्रमाण निम्नलिखित है :-
१. दिव्यावदान (पंशुप्रदानवदान)
यह ग्रंथ अशोक की वंशावली देता है: बिम्बिसार अजातशत्रु उदयी या उदयभद्र - मुंडा - काकावर्णी - सहाली - तुलाकुची - महामंडल - प्रसेनजीत - नंदा - बिंदुसार। बिन्दुसार पाटलिपुत्र में शासन कर रहा था। उसका पुत्र सुसीम था। संयोगवश, चंपा नगर का एक ब्राह्मण अपनी पुत्री सुभद्रांगी के साथ पाटलिपुत्र गया। इस ब्राह्मण को आभास हुआ कि यह सुभद्रांगी का पुत्र है एक महान राजा होगा. ब्राह्मण के अनुरोध पर, सुभद्रांगी को बिंदुसार के "अंत:पुर" में भेज दिया गया है, लेकिन उसे हेयर-ड्रेसर की नौकरी दी गई है। एक दिन, वह राजा बिन्दुसार से मिली और उनकी पत्नी बन गयी। सुभद्रांगी से अशोक और वितासोका का जन्म हुआ। अशोक अच्छा दिखने वाला लड़का नहीं था और इसलिए उसके पिता उसे पसंद नहीं करते थे। संभवतः, अशोक को उसकी शारीरिक बनावट के कारण "कालासोक" कहा जाता था।
बिंदुसार ने उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में विद्रोह का मुकाबला करने के लिए अशोक को तक्षशिला का राज्यपाल नियुक्त किया। बिन्दुसार अपने पुत्र सुसीम का राज्याभिषेक करना चाहते थे लेकिन अशोक ने विद्रोह कर दिया। बिंदुसार के मंत्री खल्लाटक और राधागुप्त भी अशोक को राजा बनाना चाहते थे। जब बिन्दुसार की मृत्यु हो गई, तो अशोक ने पाटलिपुत्र पर अधिकार कर लिया और सुसीम को मार डाला। इस प्रकार, बुद्ध के निर्वाण के 100 वर्ष बाद अशोक पाटलिपुत्र का राजा बना और उसने 84000 स्तंभ स्थापित किये।
(वर्षा - सता - परिनिर्वृतस्य मम पाटलिपुत्रे नगरे असोको नाम राजा भविष्यति चतुर्भगा - चक्रवर्ती धर्मराजः ... चतुरशीति - धर्म - राजिका सहस्रं प्रतिष्ठापयिष्यति... ) .
2. तिब्बती स्रोत : ये दिव्यावदान में दी गई अशोक की वंशावली का भी अनुसरण करते हैं। अधिकांश तिब्बती और चीनी स्रोतों में उल्लेख है कि अशोक ने बुद्ध के निर्वाण के 100 या 110 साल बाद शासन किया।
3. राजतरंगिणी : इस में दर्ज है कि हुष्क, जुशका और कनिष्क ने बुद्ध निर्वाण के 150 साल बाद शासन किया था जो स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि कश्मीर के राजा अशोक ने बुद्ध निर्वाण के 100 साल बाद शासन किया होगा।
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"किया होगा"... इन्होने ये नही लिखा कि किया। इसलिए यह एतिहासिक बल पर कहा नही जा सकता है कि काश्मीर का राजा अशोक व मौर्य वंश का अशोक एक ही थे।
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Ref :
(1)https://www.academia.edu/28275872/Who_was_King_Asoka_the_Great_Kalasoka_or_Asoka_of_the_Maurya_dynasty
(2) भारतवर्ष का इतिहास : 3
(3) मौर्य साम्राज्य का इतिहास
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