रामराज्य पर लम्पट ओशो के कथन...
राम राज्य पर ओशो...
देखिए ओशो निराधार शस्त्र प्रमाण बकवाद कैसे करता था और पशुबुद्धि थी उसकी अधमता की पराकाष्ठा देखिए:
राम राज्य पर वो है -
(1) राम के राज्य में आदमी गुलाम की तरह बिकते थे।
(2) औरतें बिकती रहीं!
(3) राम के समय में, और राम के पहले भी-वधू का अर्थ हुआ था, स्त्री बनी! पति पत्नी के साथ व्यवहार करने का हक तो है, लेकिन उनके बच्चों को संपत्ति खरीदने का कोई अधिकार नहीं होगा! पत्नी और वधू में यही बात थी। सभी पत्नियां वधु नहीं थे, और सभी वधु पत्नियां नहीं थे। वधू नंबर दो की पत्नी थी। जैसे नंबर दो की भी होती है न, जिसमें चोरी-चपाती का सब कुछ होता है! ऐसे नंबर दो की पत्नी थी वधू।
(4) राम राज्य कभी नहीं आना चाहिए
—–ओशो
यदि इन घटिया निराधार बात में वाल्मिकी रामायण या उसके अतिरिक्त किसी अन्य रामायण या रामकथा में भी उल्लेख किया गया है तो भी मान लें कि ये ओछा कुछ पढकर बोलता है या निराधार नहीं बोलता है। ना जाने कौनसा नशा फंकर इस बुद्धिहीन ने अंड-बंद गपोड़ेबाजी की है। आपको लगता है, इस नरपशु ने कभी वाल्मिकी रामायण का एक पन्ना भी नहीं पढ़ा होगा।
🌼राम राज्य वाल्मिकी रामायण में :
प्रजानुलंबिवहुः स महावक्षाः प्रतापवान्।
लक्ष्मराननुचारो रामः शशास पृथिवीमिमाम् ॥
राघवश्चापि धर्मात्मा प्राप्य राज्यमनुत्तमम्।
इजे बहुविध यज्ञः ससुत्भ्रातृबन्धवः ॥
न प्रयदेवन्विध्वा न च ब्यालकृतं भयम्।
न व्याधिजं भयं चासिद्रमेस्तं प्रशस्तति ॥
निर्दस्युरभवल्लोको नानार्थ कश्चिदस्पृशत्।
नच स्म वृद्धा बालानां प्रेतकार्यारण कुर्वते ॥
ब्राह्मणाः क्षत्रिया वैश्याः शूद्र लोभविजिताः।
सर्व लक्षणसंपन्नः सर्वे धर्मपरार्गः ॥
जानु पर्यन्त लम्बी लम्बी भुजाएँ हैं, जिसका वक्षः स्थल है ऐसे प्रतापी महाराज राम जिनके साथ लक्षमगा जैसे भाई सेवक हैं, इस (आर्य) भूमि पर राज्य करते थे। धर्मात्मा श्री रामचन्द्र जी ने राजगद्दी पर अपने मित्रों तथा भरतवर्ग के साथ अनेक प्रकार के यज्ञ किये। जब तक महाराजा राम ने राज्य किया तब तक उनके राज्य काल में न कोई स्त्री विधवा हुई, न कोई रोगी हुआ, न किसी को रोग का भय हुआ, और न किसी को साँप ने ही दसा किया। उनके राज्य में चोर डाकू नहीं थे। दूसरे के धन
चोरी तो दूर, उसे कोई छूता तक नहीं था, न ही उसके राज्य में कभी किसी स्कूल ने किसी बच्चे का दाह कर दिया। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र सभी लोभ से वंचित थे अर्थात कोई भी लालची नहीं था। सब लोग अपना-अपना कर्तव्य निभाते हुए दोस्त और पसंदीदा थे।
🌼 रामराज्य पर प्रकृति देवी की कृपा
नित्यपुष्पा नित्यफलस्तैरवः स्कन्धविस्तृताः।
कामवर्षि च पर्ञ्च्यः सुखस्पशनिच मारुतः ||
' वृक्षों में सदा फल फूल लगे रहते थे, उनके तने और डालिया खूब फली रहते थे, ठीक समय पर वर्षा होती थी, और वायु भी सदा मुखाद ही बनी थी।
➡️ रामराज्य का मूल है भगवान :
ऐसा स्वर्ग समान रामराज्य फिर कैसे हो सकता है? यह उत्तर मुनिवर चाणक्य देते हैं।
राज्यस्य मूलमिन्द्रियजयः ॥4॥
जब पितृ भक्त सर्वोच्च राम जैसे विश्वनाथ राजा होते थे तो उनका राज्य स्वर्ग के समान था।
ओशो जैसे वैश्याचारी के साथ कथित आश्रम में संप्रदाय की मंडी थी, जहां जाने एचआईवी टेस्ट कराती थी, 90 दुलारों का व्यवहार होता था, ऐसा महा लम्पट कोठे का संस्थापक, अपराधी और व्यवहारी, भलामानस क्या जाने क्या होता है!? इस धुर्त को न विज्ञान पता था न इतिहास। लेकिन डिंगे हर विषय पर हाक रैक है।
अब जरा कोई मान्यता प्राप्त, फादर कामिल बुल्के (रामकथा के जाने-माने सचिवालय) जैसे विभिन्न विदेशी देशी उच्चकोटि के पुरस्कार विजेता, विद्वान और वैज्ञानिक यहां तक कि अब्दुल कलाम आदि ने कहा, महापुरुषों ने रामायण पर लिखी कहानियां, बड़ा साहित्य एतिहासिक एवं पुरातत्व में उकेरे निर्मितियो का अभिव्यक्त मानस रामकथा से परिचित कराता है। उसके इतिहास कितानो ने की, उसकी तिथि ग्रह नक्षत्रों की प्रमाणिकता, उसके ऐतिहासिक भूगोल का वर्णन भूविज्ञान वनस्पतियों का वर्णन, व रामसेतु आदि की मानव-निर्मितता.. संबंधित विज्ञानों ने मणि प्रमाणिकता के आलोक से कौन अनाभिज्ञ हैं? व लंका आदि पुस्तिकाएं रामख्याति तक, रामराज्य और रामकथा से कौन अभिज्ञ हैं? राम राज्य को आदर्श माना जाता है, लेकिन रामायण के विधर्मी समालोचक ने भी ऐसी बातें कही हैं। तो सिद्ध हुआ कि लम्पट ओशो को निराधार बकवाद का हवा में पैर मारने का शौक था। लेकिन ये कोई विद्यावान या विद्वान या भगवान के शिष्य अपने चेले चपाटो द्वारा हैं। हतबुद्धि मूर्ख हिंदू इसे बड़ा ज्ञानी तत्व मानते हैं।
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| रामराज्य |
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| भगवान राम |
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| दशरथ जी का राज्य |
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| बलात्कारी रावण जिसको ओशो पुजनीय मानता था। |




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