ओशो की सेक्रेटरी व प्रेमिका आनंदशिला के द्वारा ओशो का खुलासा

 ओशो, पेरियार, Hरामपाल, रामरहिम आदि जैसो पर लिखना शौक नही। इनमे क्रमशः दो नाम ओशो व पेरियार इतने अश्लील गाली की भांति है कि इनका नाम लेना भी सभ्य मानव समाज मे सही नहीं। ये ऐसी गंदगी है कि वेश्यावर्ग भी इनको पढ लज्जित हो जाए। ये वे लोग है जिनका मुख देखना भी पाप है । इसलिए इनपर लिखने की कोई इच्छा नही। परंतु विवशता कहे या कर्तव्य कि इनसे वर्तमान दानवों वाममार्गी दृष्ट दस्युओं द्वारा समाज में जो इनका प्रचार कर रहे हैं, वा इनको भगवान, दार्शनिक, विद्वान आदि संबोधन दे देकर इनके Thoughts बडे बडे पेज व शोशल मिडिया हैंडल पर यदाकदा मिल ही जाएंगे, विशेषकर ओशो के वीडियो.. तो इन्हे जाने बगैर इनको भ्रमित होकर जो इनका अनुगमन करेंगे वो तो मानवता के लिए शर्मशार करने वाला ही अनर्थ होगा। समाज में ऐसे दुराचारी होंगे तो व्यभिचार बलात्कार का बोलबाला मच जाएगा। अपसंस्कृति विराष्ट्रियकरण, राष्ट्र की आत्मा अर्थात् संस्कृति का ह्रास होगा। इसलिए इनका भंडाफोड़ करना, इन्हे उजागर करना भी अनिवार्य बन जाता है। इस विचार से इस गंदगी को हाथ लगाना पड रहा है। इन सब नामो मे ओशो पर भारतीय जन बहोत कम जानते हैं। ओशो भी गिरफ्तार किया गया जहा गया उस देश से भगाया गया, क्योंकि व्यभिचार व नशे का पंथ चलाया ये कम लोग जानते हैं। यह पहली पोस्ट तो नही लेकिन आनंदशिला के ओशो पर विचार की प्रथम पोस्टर है। अतः यथा जो लिखा है वो निम्नलिखित है - -

❚█══Part 1══█❚

ओशो की सेक्रेटरी व प्रेमिका आनंदशिला के द्वारा ओशो का खुलासा :

व्यभिचारी रजनीश या ओशो ' संभोग व ड्रग्स वेश्यालय का पंथ चलाने के लिए कुख्यात है । जो कि अनके अनेक देशो द्वारा खदेडा गया । एक जमाने में रजनीश ओशो की सबसे करीबी और प्रिय रहीं . आनंद शीला ने अपनी किताब में उनके बारे में कई बातें लिखी हैं । आनंद शीला ने किताब ' डोंट किल हिमा द स्टोरी ऑफ माई लाइफ विद भगवान रजनीश लिखी । 2013 में आई इस किताब में उन्होंने कई दावे किए । आनंद शीला ने अपनी किताब ' डोंट किल हिम में लिखा है कि :

( १ ) ओशो के आश्रम में अध्यात्म के नाम पर खुले आम सेक्स की बातें होती थीं और शारीरिक रिश्ते बनाने पर पाबंदी नहीं थी । शिविरों में सबसे ज्यादा सेक्स पर ही चर्चा होती थी । आश्रम का हर संन्यासी एक महीने में करीब 90 लोगों के साथ सेक्स करता था । ओशो अपने भक्तों को बताते थे कि सेक्स की इच्छा को दबाना कई कष्टों का कारण हो सकता है , इसलिए खुलकर सेक्स करना चाहिए । 

( २ ) शीला ने अपनी किताब में लिखा है कि ओशो अद्भुत बिजनेसमैन थे । उन्हें अपने प्रोड्क्ट , उसकी कीमत और मार्केट की अच्छी जानकारी थी । वे आश्रम को इस तरह चलाना चाहते थे जिससे तमाम खर्च रिकवर हो जाएं । इसी के चलते आश्रम में प्रवेश के लिए फीस भी वसूली जाती थी । उनके थैरेपिस्ट ग्रुप भी आश्रम में थेरेपी के लिए पैसे लिया करते थे । आश्रम में आने वाले लोगों को उनका मनपसंद भोजन मुहैया करवाया जाता था । इसके लिए भरपूर पैसा वसूला जाता था ।

( ३ ) ' संभोग से समाधि की ओर ' जैसी पुस्तकें लिखने वाले ओशो कई बार इसे लेकर भी विवादों में आए । मां शीला की किताब में लिखा गया है कि आश्रम में रह रहे सभी संन्यासियों का शोषण होता था । ओशो अपने बेबाक और स्पष्ट विचारों से विवादों में भी रहे । उनका कहना था कि वे जो बात करते हैं , उसे अमीर और बुद्धिमान व्यक्ति ही समझ सकता है । आनंद शीला के मुताबिक ओशो ड्रग्स की लत का शिकार हुए थे । उनकी मौत 1990 में हुई थी ।

क्रमशः

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