मणुष्य में लिंग निर्धारण का वैज्ञानिक विश्लेषण...
लिंग निर्धारण का वैज्ञानिक विश्लेषण...
शरिरशास्त्र , जीवशास्त्र ( BIO ) आदि के पाठ्यक्रम में XX & XY Chromosomes के crossing के माध्यम से बढाया जाता है sex determination हमेशा पुरूष ( male ) पर निर्भर है ... लेकिन ये बिल्कुल असत्य है । क्योंकि ऐसा नहीं होता ...
वैसे हर बोर्ड मे ऐसे नही पढाया जाता। कयी राज्यों के पाठ्यपुस्तक में sex determination of child depends upon male पढाया जाता है। उनमे महाराष्ट्र बोर्ड भी शामिल है व ncert आदि।
एक Digest का संदर्भ लेते हैं -
((Self-Help to ICSE Biology 10
FOR 2022 EXAMINATIONS
By Priya Minhas, Sister Maria)) पृ. 36 -
Q.3 . Does the sex of the child depend on the father or it is just a matter of chance . Discuss .
Ans . No , the sex of the child does not depend on parents it is just a matter of chance . Sex of the child depends upon the kind of sperm that fertilises the egg . The egg contains only one X chromosome , but half of the sperms released into the female are X - bearing and remaining half are Y - bearing . It is simply a matter of chance as to which category of sperm fuses with the ovum . If the egg ( X ) is fused by X - bearing sperm , the resulting combination is XX , i.e. female type and the child produced is female ( Daughter ) . If the egg ( X ) is fused by Y - bearing sperm , the resulting combination is XY , i.e. male constitution and the child produced will be a male ( Son ) .
महाराष्ट्र बोर्ड की 12 th std. सन 2018 की पाठ्यपुस्तक मे sex determination depends upon the male लिखा मिलता है।
अमेरिकी चिकित्सक Dawson, Ernest Rumley महाशय सन 1917 में अपनी लंदन से प्रकाशित पुस्तक ' कौज़ेशन ऑफ़ सेक्स ' THE Causation of Sex In Man (One physician's theory regarding what determines the sex of offspring.) में लिखते हैं कि लड़का या लड़की होने में पिता का नहीं परन्तु माता का असर पड़ता है । यदि माता के दाएँ बीज - कोश से रजःकण आया है तो लड़का होगा , यदि बाएँ से तो लड़की । प्रत्येक महीने एक कोश से एक रजःकण निकलता है ।
1980 के दशक के दौरान, शोधकर्ताओं ने यह समझने के लिए वाई गुणसूत्र के साथ टीडीएफ की खोज की कि इसकी उपस्थिति ने भ्रूण को पुरुषों के रूप में विकसित होने के लिए क्यों प्रेरित किया। 1990 तक यूनाइटेड किंगडम में आणविक जीव विज्ञान का अध्ययन करने वाले एंड्रयू सिंक्लेयर ने वाई गुणसूत्र पर टीडीएफ के स्थान की पहचान नहीं की थी। सिंक्लेयर ने एक टीम का नेतृत्व किया जिसने प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जिससे उन्हें कोशिका के डीएनए को पढ़ने और टीडीएफ की खोज करने की अनुमति मिली। उन्होंने टीडीएफ के स्थान का अनुमान लगाने के लिए उन पुरुषों के वाई क्रोमोसोम के बिट्स के साथ डीएनए के विस्तार को पढ़ा, जिनके पास एक्सएक्स क्रोमोसोम संयोजन था। उन्होंने Y गुणसूत्र के उस क्षेत्र को, जिसमें TDF होता है, लिंग-निर्धारण क्षेत्र Y या SRY जीन नाम दिया, क्योंकि Y गुणसूत्र के उस विशिष्ट क्षेत्र की उपस्थिति भ्रूण के जैविक लिंग को निर्धारित करती है। एसआरवाई जीन में एसआरवाई प्रोटीन बनाने के निर्देश होते हैं, जो भ्रूण को नर के रूप में विकसित करने का कारण बनता है। यदि एसआरवाई जीन मौजूद है, तो भ्रूण अपने विकास के सातवें सप्ताह के आसपास वृषण विकसित करना शुरू कर देगा। फिर, आठवें सप्ताह के दौरान, वृषण टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन शुरू कर देंगे, जो पुरुष बाहरी जननांग को विकसित करने की अनुमति देता है। हालाँकि, यदि कोई SRY जीन मौजूद नहीं है, तो अविभाजित भ्रूण वृषण विकसित नहीं करेगा और इसके बजाय महिला के रूप में विकसित होगा।
वर्तमान में हम मणुष्य के लिंग निर्धारण के विषय में जो पढते है वह इसप्रकार है कि XX व XY इनमे Y गुणसूत्र जो कि नर के समिप है, उसके संयोग के बिना नर बच्चे का जन्म संभव नहीं। इस दृष्टि से कहा जाता है कि बगैर इसके लिंग का निर्धारण नही हो सकता क्योंकि दोनो संभावनाओं के बीज केवल पुरूष मे है। नारी मे तो केवल एक ही संभावना संचालित होती है। अतः नारी के शरिरसंस्था पर निर्भर है कि वो किसे ग्रहण करेगी व परिणामस्वरूप किस लिंग का भ्रुण बनेगा।
लेकिन इसे इस प्रकार कहना कि लिंग का निर्धारण नर पर निर्भर करता है बिल्कुल गलत व अवैज्ञानिक बात है। इस प्रकार हम समझ सकते हैं कि इस वैज्ञानिक वाक् को व्यावहारिक बनाया जाए तो ये बात बिल्कुल सही नहीं है।
हालांकि आगे इसी पाठ्यक्रम मे ये भी तो पढाया गया है - If the egg receives another X chromosome from the sperm, the resulting individual is XX, forms ovaries, and is female; if the egg receives a Y chromosome from the sperm, the individual is XY, forms testes, and is male. The Y chromosome carries a gene that encodes a testis-determining factor.
((https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK9967/))
Sex Determination depends upon Women
➡️ x या y गुणसूत्र का चुनाव, spermatozoa को ग्रहण
करना ये female का egg करता है इसलिए लिंग का
निर्धारण नारी पर निर्भर है न कि पुरूष पर।
➡️ वैज्ञानिक शोध /प्रमाण /संदर्भ आदि :
(१) Dr. Ananya Mandal, MD (Jun 11 2020)
कहती हैं -
"The egg decides which sperm fertilizes it"
There is ample evidence to show that as millions of human sperm cells swim towards a waiting ovum or egg, only one gets to fertilize it. Now, a new study shows that even though the fastest and most capable sperms reach the ovum first, it is the egg that has the final say on which sperm fertilizes it. The study titled, "Chemical signals from eggs facilitate cryptic female choice in humans," is published in the latest issue of the journal Proceedings of the Royal Society B.
~ Dr. Ananya Mandal, MD
((https://www.news-medical.net/news/20200611/The-egg-decides-which-sperm-fertilizes-it.aspx#:~:text=The%20egg%20decides%20which%20sperm%20fertilizes%20it))
अर्थात्
यह दिखाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि चूंकि लाखों मानव शुक्राणु कोशिकाएं प्रतीक्षा कर रहे डिंब या अंडे की ओर तैरती हैं, केवल एक ही इसे निषेचित कर पाता है। अब, एक नए अध्ययन से पता चलता है कि भले ही सबसे तेज़ और सबसे सक्षम शुक्राणु सबसे पहले डिंब तक पहुंचते हैं, लेकिन अंतिम फैसला अंडे का ही होता है कि कौन सा शुक्राणु इसे निषेचित करता है। अध्ययन का शीर्षक है, "अंडों से निकलने वाले रासायनिक संकेत मनुष्यों में गुप्त रूप से मादा चयन की सुविधा प्रदान करते हैं," जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ द रॉयल सोसाइटी बी के नवीनतम अंक में प्रकाशित हुआ है।
इस अध्ययन में मनुष्यों के बीच समान निष्कर्षों को देखा गया।
(२)"स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी और मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा हुई शोध :
Chemical signals from eggs facilitate
cryptic female choice in humans
शोधकर्ता : John L. Fitzpatrick, Charlotte Willis, Alessandro Devigili, Amy Young, Michael Carroll, Helen R. Hunter and Daniel R. Brison
स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी और मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट (एमएफटी) के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक नए अध्ययन से पता चलता है कि अपने साथी को चुनना सेक्स के बाद भी जारी रहता है - मानव अंडे शुक्राणु को "चुन" सकते हैं। "मानव अंडे केमोआट्रैक्टेंट्स नामक रसायन छोड़ते हैं जो शुक्राणु को अनिषेचित अंडों की ओर आकर्षित करते हैं।"
मानव अंडे (female egg), शुक्राणु (male sperm cells) को आकर्षित करने के लिए रासायनिक संकेतों का उपयोग करते हैं। स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी और मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट के नए शोध से पता चलता है कि अंडे शुक्राणु को "चुनने" के लिए इन रासायनिक संकेतों का उपयोग करते हैं।
"स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी और मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा अंडे से कौन से रासायनिक संकेत मनुष्यों में गुप्त महिला चयन की सुविधा प्रदान करते हैं?
इससे ये सिद्ध हो गया कि egg ही ये निर्णय लेता है कि कौन सा शुक्राणु उसे निषेचित करेगा। वैसे ही कौनसा गुणसूत्र वो ग्रहण करेगा वह भी egg हीका निर्णय है ये दूसरे शब्दो मे कहने की आवश्यकता नहीं।
➡️लेख का निष्कर्ष :
मणुष्य में बच्चे के लिंग का निर्धारण पुरूष पर निर्भर नही वरण् फिमेल पर यानी मानव अंड (female egg) पर निर्भर होता है।
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