क्या नशेड़ी ओशो सबसे बड़ा दार्शनिक था?

एक ओछो भक्त ने कहा कि ओछो का खंडन करने तो ओछो से बडा दार्शनिक होना पडेगा... 🤔 यानी तदनुसार ओशो सबसे बड़ा दार्शनिक था।

ऋषि कपिल, पतंजलि, गौतम, कणाद, जैमिनि और बादरायण व मुनी अष्टावक्र, महावीर, बुद्ध, शंकराचार्य, ऋषि दयानंद इतने दार्शनिकों वाले आर्यावर्त भारतवर्ष में किसी ने शराब ड्रग्स पीकर रेड लाइट एरिया नही खोला क्योंकि ये क्या जाने दर्शन क्या होता है। इन्हे क्या पता था दर्शन का मर्म कि कहां समाधि होती है। सारी सृष्टि व्यर्थ इधर-उधर समाधि ईश्वर आदि खोज रही थी। तब ईश्वरकृपा से धरती पर युगो युगो मे पहली बार ओशो नामक भगवान चला आया। बोला नही.. ये कहा खोज रहे हो तुम। इसने बताया कि एक लडकी को पुरे गांव से वर चयन करने स्वयं को प्रत्येक से जो है चखवाना चाहिए, फिर जो है जिसमे आनंद आए उससे विवाह करना चाहिए, इसने बताया कि परिवार जैसी व्यवस्था विवाह संस्था समाप्त करनी चाहिए, फिर चौका दिया ये बताकर कि समाधि तो संभोग से मिलती है.. कैसे? बोले बड़ा वेश्यालय खोलना पडेगा। उसमे वो सब होगा। नशा ड्रग्स सेक्स। क्यों? तो उसने बताया कि अति सेक्स से जो है उसके प्रति अनिच्छा आएगी और फिर जो है व्यक्ति समाधि तक पहुंचेगा... और ऐसे जो है प्रगट प्रगत हुआ सबसे बड़ा दार्शनिक ओशो...

हाथी के दांत खाने के और दिखाने और..

इसने इसी अष्टावक्र गीता पर प्रवचन झाड़े है गीतोपनिषद पर प्रवचन दिए हैं लेकिन न ऐसी बीयर व वेश्यालय पुरे अष्टावक्र गीता मे कोई खोज सका न श्रीमद्भागवतगीता मे... वो तो अखिल विश्व में ओशो को ही दिखाई दिया...

इसके दर्शन के अनुसार हर दारू के अड्डे मे हर शराबी समाधि का आनंद ले रहा है और न जाने कितने कुत्ते कुत्तीया वेश्यालय मे ओशोवादी दिव्यात्माएं कथित समाधि में आजपर्यंत डुबकी ली होंगी। कयी बार तो सुवर कुत्तो के झूंड मे भी गलती से कितनों को समाधि लगी होंगी.. और उनको मोक्ष की प्राप्ति हुई हो... संभवतः ये खोज तो सबसे बडे दार्शनिक ओछो की है.. 

सेक्स गुरु, संभोग करने से समाधि लगानेवाला, STDs का संवाहक, ड्रग्स का व्यापारी पैग लगाने वाला व अपने चेलो को भी पिलाकर बिमार करवाने वाला, हर सन्यासी प्रति माह 90 स्त्रीयों से सुरतक्रिडा करवाने वाला, व्यभिचार का पंथ खोलने वाला... कथित भगवान कथित विद्वान...

सारे जीवन जो कभी मुलाधार से उर्ध्व न हो पाया, जो ड्रग्स के लत ही में स्वेच्छा से इंजेक्शन लगवाकर आत्महत्या करके मर गया ऐसे कथित दार्शनिक का खंडन कोई उससे बडा दार्शनिक ही कर सकते हैं। चलो ठिक है ओछोभक्तों की ही मान लेते हैं और यही पर हम विराम देते हैं इसपर...

न पश्यति च जन्मान्धः कामान्धो नैव पश्यति ।

मदोन्मत्ता न पश्यन्ति ह्यर्थी दोषं न पश्यति ॥ २ ॥

जन्म के अन्धों को , कामातुर को , मदिरा करके उन्मत्त को , और धन के अर्थी को कुछ भी नहीं दीखता है , इसलिये हे जनक ! धनादि की इच्छा का भी त्याग ही करना विवेकी के लिये उत्तम है । क्योंकि संसार रूपी वन में भ्रमण करते हुए पुरुष का मन धर्म , अर्थ और काम करके व्याकुल होता हुआ कभी भी शान्त नहीं होता है ॥ ७ ॥ 

           ---------- अष्टावक्र गीता

उसकी सेक्रेटरी व प्रेमिका आनंदशिला के अनुसार :

 शीला की किताब में भी लिखा गया है कि "आश्रम में रह रहे सभी संन्यासियों का शोषण होता था । ओशो अपने बेबाक और स्पष्ट विचारों से विवादों में भी रहे । उनका कहना था कि वे जो बात करते हैं , उसे अमीर और बुद्धिमान व्यक्ति ही समझ सकता है ।" आनंद शीला के मुताबिक ओशो ड्रग्स की लत का शिकार था। 1990 मे चल बसा। 

( Source : Hindi Translation : Don't Kill Him By Anand Sheela )

ओशो के बीयर पीते हुए चित्र गुगल पर उपलब्ध हैं ही। 


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