ओशो का खंडन... प्रश्न उत्तर...
ओशोवादी : तुम्हारी अपनी काबिलियत क्या है की तुम ओशो पर अपने विचार व्यक्त करो? ओशो की आलोचना करने के लिए तुमको ओशो से बड़ा दार्शनिक होना पड़ेगा तभी तुम कुछ कह पाओगे वरना तुम जैसे और तुम से भी बड़ी हैसियत वाले बहुत कुछ बोल चुके हैं मगर ओशो की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। उसको एक बार पढ़ो। ओशो ने सेक्स के बारे में जितना कहा है उससे कहीं अधिक मानव मनोविज्ञान पर कहा है।ओशो का सारा जोर ध्यान पर है। ध्यान करो।
सनातनी : ओशो की काबिलियत से ज्यादा काबिलियत रखते हैं... ओशो एक नशेड़ी व्यभिचारी बलात्कारी था ।
ओशोवादी : फिर ऐसा क्या हुआ कि आपकी कबलियत दुनिया नही समझ सकी और ओशो को इसी दुनिया ने सिर आंखों पर बिठाया? संभोग से समाधि की किताब पर ध्यान क्यों गया? आपका ध्यान भारत एक स्वर्णिम यात्रा या गहरे पानी पैठ पर क्यों नहीं गया? ओशो ने तो सब विषयों पर बोला, सभी संतो,तीर्थंकरों पर बोला, आप संभोग के विषय पर ही क्यों रुक गए?
सनातनी (विचार प्रसार) :
(१) दुनिया ने उस ओछे को कब सिराखो पे बिठा दिया? और कोई दुराचारी बलात्कारी प्रसिद्ध हो भी तो? किसी भी बात को ग्रहण करने का आधार क्या है? क्या तुमसे रामरहिम अधिक प्रसिद्ध है, धनवान् है इस आधार पर तुम उसकी बात ग्रहण करोगे कि तर्क व सत्य के कसौटी पर कसोगे? या ऐसे ही चेले बन चलोगे? इसप्रकार तो हर उस दुराचारी का जिसने शक्ति अर्जित की वैसे रावणादि के पथ का भी अनुसरण कर लो।
(२) "संभोग से समाधि" इस किताब का उल्लेख राहुल आर्य जी ने इस वीडियो में किया है। क्यों? उसका उत्तर :
क्योंकि हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और।
#वाणी : ओशो ने क्या क्या बताया या बोला वो एक बात है। (उसने उक्त किताब को छोड दिया जाय फिर भी अनेक आपत्तिजनक बाते की है जो जिससे वो उजागर हो जाता है। तथ्य इतने है कि बगैर उस किताब का नाम लिये भी ओशो को आसानी से नंगा (उजागर) किया जा सकता है, मै चुनौती के साथ कहता हूं।)
"#कर्म" : ओशो ने क्या क्या किया वो दुजी बात है।
उसने अष्टावक्र पर बोला लेकिन वो अष्टावक्र नही बना, उसने बुद्ध महावीर गीतोपनिषद उपनिषद वेद पर बोला लेकिन वो बुद्ध व महावीर वेद वेदांत के बताए मार्ग पर भी नही चला, बिल्कुल उनके विपरीत उनके विरूद्ध चला अधर्म अनाचार दुराचरण व्यभिचार बलात्कार का पंथ खडा किया। child abuse किया, नशा किया, नशे की लत से ग्रस्त हुआ, अंततः आत्महत्या कर ली।
"ओशो के कर्म केवल उसके उस किताब के विचारों से मेल खाते हैं। वही किताब उसका अपना गढ़ा हुआ मनगढ़ंत कथित दर्शन है। जिसपर चलकर उसने रेड लाइट एरिया या वेश्यालय खोला व फलतः जहां गया उस देश से खदेड़ा गया। "
इसलिए भी ऐसा है लेकिन बगैर उस किताब के केवल महाराष्ट्र पोलिस के दस्तावेज व चंद फोटो ही ओशो व उसके व्यभिचार-पंथ के लिए पर्याप्त है।
(३) ओशो ने बोला सबपर लेकिन जिनपर बोला उनमे से एक ने भी ओशो के भांति वेश्यालय नही खोला।
शारांश यही है कि व्यक्ति की पहचान उसके कर्म से होती है न कि वाणी से।





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