यज्ञ द्वारा मर रहे पेड़ पौधे पुनः हरे-भरे क्यो हो जाते हैं...?
यज्ञ द्वारा मर रहे पेड़ पौधे पुनः हरे-भरे क्यो हो जाते हैं...?
मैने देखा कि कयी लोगो को यज्ञ द्वारा पेड-पौधो का वापिस हराभरा होना अविश्वसनीय लगा। (वो एक वर्तमान में हुई जर्मन रिसर्च है ।) स्पष्ट है कि वे विज्ञान के छात्र नही होंगे व सामान्य ज्ञान भी कम होगा। ऐसे लोगों को भी ये अवश्य जानना चाहिए कि ऐसा होने के पीछे क्या वैज्ञानिक कारण है। यज्ञ हमे प्रदुषण से कैसे बचाता है? ऐसे लोग जी तो 21 वी सदी में रहे लेकिन उन्हे 70- 80 के दशक के वैज्ञानिक शोध भी नहीं पता। ये कोई नयी बात तो नही..
वायु को प्रदुषित करता "फ्लुओराइड" ऐसा विषैला तत्व है जो वृक्षों को नष्ट करता है । फ्राँस में आल्पस पर्वत में पाये जाने वाले सदाबहार वृक्ष दिनों दिन मरते और नष्ट होते जा रहे हैं । विशेषज्ञ चिन्तित हुए और खोज की तो पाया कि यह उस क्षेत्र में पाये जाने वाले कारखानों द्वारा वमित फ्लुओराइड तत्वों का दुष्प्रभाव है । इस बात की आशंका की जा रही है कि स्थिति ऐसी ही रही तो उस क्षेत्र में एक भी वृक्ष जिन्दा न बचेगा ।
धुएं के रूप में वायु को गन्दा करने वाला सबसे पहला विषैला तत्व 1 कार्बन मानो ऑक्साइड है। इससे ऑक्सीजन दूषित हो जाती है । खून के प्रवाह में मिल जाने के कारण यह सिर दर्द , थकावट आदि पैदा करता है । यह विशेष रूप से हृदय रोग , अस्थमा , एनीमिया रोग वालों को प्रभावित कर उनका रोग तथा संकट और बढ़ाने में मदद करता है ।
वायु - प्रदूषण में भाग लेने वाली दूसरी महत्वपूर्ण गैस , सल्फर ऑक्साइड सल्फर युक्त कोयले और तेल के जलाने से उत्पन्न होती है इसके विष से आँखें , नाक , गला , फेफड़े आदि प्रभावित होते हैं । पेड़ पौधों को नष्ट करने में भी इसी का हाथ रहता है । अमेरिका के कई नगरों के सभी इस्पात कारखाने और पेट्रोल उद्योग सल्फर युक्त ईंधन प्रयुक्त करते हैं इससे उत्पन्न सल्फर डाई ऑक्साइड वर्षा के पानी में धुल कर के गन्धक के तेजाब के रूप में बरसता है । इससे वहाँ प्रत्येक बरसात के बाद अनेक पक्षियों के पंख जल जाते हैं और सारी वनस्पति झुलस जाती है । इसी से धातुओं में जंग लगती है और वायु मंडल में अंधेरापन छा जाता है जिससे सूर्य की रोशनी की मात्रा बहुत कम आ पाती है ।
अग्नि अपने में जलाई गई वस्तु को करोड़ों गुना अधिक सूक्ष्म और शक्तिशाली बनाकर फैला देती है । इस तथ्य को फ्राँस के डॉक्टर हैफकिन और मद्रास के सेनेटरी कमिश्नर डॉ . कर्नल किंग आई . एम . एस . ने भी माना है । उनका कहना है कि आग में घी जलाने से कोसों दूर तक के कीटाणु मर जाते हैं । घी , चावल , केसर आदि से धुएँ के विष का नाश हो जाता है और वायु में घुले जहर वर्षा के साथ जमीन में चले जाते हैं और खाद बनकर उपयोगी बनते हैं ।
(📖 𝑺𝒆𝒑𝒕. 1970. 𝑨𝒌𝒉𝒂𝒏𝒅 𝑱𝒚𝒐𝒕𝒊. 𝒑. 54)
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