सनातनीयो को एक अनिवार्य संदेश...

सनातनीयो को एक अनिवार्य संदेश... 

भारतवर्ष के समिप बहोत कम समय शेष है। जो देख सकते हैं वही देख सकते हैं। जो उदासीन है वो धर्मनिरपेक्ष या सेक्युलर नामों से भी जाने जाते हैं। मजहब विशेष की बढती संख्या तबसे बढ रही है जब देश में वोटिंग ही नहीं होती थी, और जहां वो बढते है वो प्रदेश विखंडन होकर अलग देश बनकर इस्लामी राष्ट्र बन जाता है। उन्होंने अफगानिस्तान पाक बांग्ला ऐसे ही जनसंख्या बढाकर बना दिया। भारत में कितने ही राज्यों में हिन्दू अल्पसंख्यक है। 12-13 राज्य ऐसे ही समस्या से जूझ रहे हैं। उनकी सुविधा हटाने व नोकरी न रहने से वे रूकेंगे भ्रम है। ऐसा सोचने मे हानि हिन्दूओ की ही है।

इसके मूल समाधान पर कोई मिडिया कभी बात नही करती है। मजहबी कन्वर्शन व विराष्ट्रियकरण इस राष्ट्र को इस्लामिक देश बनाने ही वाला है। प्रचलित हिंदू राष्ट्र घोषित करना या बढती लोकसंख्या हेतु किसी को कुछ अधिकारो से वंचित कर लेना भी समाधान नही है। क्योंकि इसके बिना भी वो सब शरणार्थी विधर्मी, स्वावलंबी है। अतः रूकेंगे नही। पंचर बनाकर आगे बढ़ेंगे। पुरूषार्थ करो लक्ष्मी प्राप्ति होगी ये वेद की शिक्षा उन्होंने धर ली है। वोट देने का अधिकार छिनोगे लेकिन फिर भी वो जनसंख्या बढ़ाएंगे, जिहाद करेंगे। रूकेंगे नही। उन्पर इनसब पाबन्दीयो से कोई असर पड़ने वाला है नही। पाखंड अंधविश्वास भय का लाभ उठा कर कन्वर्शन का खेल होता है, अतः ये अशिक्षा या वैदिक वैज्ञानिक आध्यात्मिक शिक्षा का अभाव ही है। अविद्या अज्ञान अंधविश्वास के ही कारण तो बडे सरलता से मजहब मे कन्वर्शन हो रहा है। 

हिंदू राष्ट्र मात्र घोषित करना समाधान है? पहले आर्ष को समझना वेद उपनिषद वेदांग दर्शन आदि को स्थापित करना व तदनुसार शासन संविधान बनाना सार्थक व स्थायी समाधान होगा। हमारे धर्मग्रंथों को संविधान बनाकर तदनुसार आचरण व्यवहार व्यवस्था चलेगी जीवन चलेगा, इन वैदिक शिक्षा के विरूद्ध आचरण व्यवहार निषिद्ध होगा, इनके मान्यता के विरूद्ध चलना निषिद्ध होगा तो बढी हुई लोकसंख्या भी मानव बनेगी व धार्मिक बन जाएगी। 

इसका मूल समाधान इसलिए यह सब भी नही है। इसका समाधान वेद रूपी मूल है। वैदिक शिक्षा पद्धति है। वैदिक संविधान है। जो उन्हे भी तलाक, अनेक संतान जिहाद आदि सब से रोकने हेतु कठोर कानून स्वदेशी व्यवस्था बनाकर लायी जाए जो हिंदू पर भी लागू हो व मुस्लिम पर भी ईसाई पर भी। उनको मानव बनाने की शिक्षा व कानून लागू करने, मानव बनने की शिक्षा देने से वैज्ञानिक अध्यात्म पढाने से भला कौन रोकेगा? इस मानवीय आध्यात्मिक वैज्ञानिक शिक्षा मे कौनसी सांप्रदायिकता सिद्ध होती है? कौन इसे सांप्रदायिकता के नामपर मना कर सकता है? सुप्रीम कोर्ट का आदर्श वाक्य है यतो धर्मस्ततो जयः क्या ये सांप्रदायिक है? संविधान निर्माताओं ने कभी धर्म विहिन राष्ट्र की परिकल्पना नही की। एक "सेक्यूलर" शब्द संशोधन द्वारा इमर्जेंसी मे छल से इंदिरा ने डाल दिया। लेकिन ये परिवर्तन उस सेक्युलरिज्म के विरूद्ध भी नहीं होगा इतना विशुद्ध समाधान है। 

समाधान केवल शिक्षा व्यवस्था का स्वदेशीकरण और वैदिक संविधान को लागू करना है। यही मूल समाधान है। इसी से जनसंख्या नियंत्रण भी हो जाएगी। पापाचारसे मुक्ति मिलेगी। कानून सुधरेंगे, वेद ही मूल है, इसलिए वेदवेदांतविज्ञान की ओर लौटना आध्यात्मिक वैज्ञानिकवाद का पाठ्यक्रम अनिवार्य करवाने का दबाव सरकार पर बनना सभी सनातनीयो का कर्तव्य है।

कलतक जो भांड लोग, टिकटोकर, जोकर के भांति नाचते गाते थे वो आपके कथित हिंदू बनकर जो ज्ञान दे रहे हैं शोशल मिडिया इन्फ्लुएंसर बने बैठे हैं, वो भी सॉफ्ट कन्वर्शन ही को परिणत कर रहे हैं। टिवी से लेकर मिडिया तक ऐसे सॉफ्ट कन्वर्शन वाले लोग विद्यमान है। जो घातक है क्योंकि ये वस्त्र

विन्यास से कुछ और एवं विचार व कार्य से कुछ और है। वाणी से कुछ और है एवं कार्य से कुछ और ही है। इनके बलपर हमे समाधान कभी नहीं मिल सकता। 


विश्व वैदिक सभ्यता क्या है? विश्व वैदिक सभ्यता की प्राचीनता उसके द्वारा मनुर्भवः अर्थात् मनुष्य बनो, राष्ट्रं धारयतां ध्रुवम् अर्थात् राष्ट्र को धारण करो , कृण्वन्तो विश्वमार्यम्, जिसका अर्थ है - विश्व को आर्य अर्थात् श्रेष्ठ बनाते चलो, इन वेद की शिक्षाओं को ग्रहण करके, सच्चे इतिवृत्त को पढकर आर्य राष्ट्र का वैदिक स्वराज का निर्माण किया जा सकता है। इसमे सांप्रदायिकता दिखाई दे रही है? गुरूकुलो मे द्वेष नही सिखाई जाती, न ईसाई के प्रति न मुस्लिम के प्रति ये सच्चाई है। लेकिन इसके मदरसाछाप शिक्षा मे तालिबान पनपता है ये प्रत्यक्ष है। इसलिए ये वैदिक शिक्षा मानवधर्मशास्त्र की स्थापना है, मानवता का निर्माण करने वाला, आत्मरक्षार्थ शस्त्र धारण करने जो हमारा वर्तमान संविधान व अनेक देशों के संविधान की अनेक बाते हैं वे सब वैदिक स्मृति से ही प्रेरित है। अनेको वैज्ञानिकों ने व न्यायशास्त्रीयो ने श्रृति-स्मृति की मुक्त कंठ से सराहना की है व इनह सत्य बातो को उजागर किया है। भारत में इनकी पुनर्स्थापना सांप्रदायिक तो कदापि नहीं है। 

आधुनिक युग में " भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक " भारतीय परमाणु भौतिक विज्ञानी (Bhartiya nuclear physicist) होमी जहांगीर भाभा ने कहा है - " श्रीकृष्ण इसलिए मुझे प्रेरित करते हैं , क्योंकि वे महान अध्यात्मवेत्ता दार्शनिक होने के अतिरिक्त महाशस्त्र- प्रज्वलित चक्र थामे हैं और सतत कर्मशील हैं । मेरे विचार से तो वे जीवन विज्ञान के महान वैज्ञानिक हैं । मैं तो कहता हूँ कि भगवद्गीता को राष्ट्रीय पुस्तक एवं वैज्ञानिक अध्यात्म को राष्ट्रीय धर्म के रूप में अपनाया जाना चाहिए..! "

ध्यातव्य : निष्कर्ष यह है कि सरकार पर दबाव बनाया जाय कि शिक्षा मे परिवर्तन लाए, आध्यात्मिक वैज्ञानिकवाद वैदिक विज्ञान युक्त वैदिक शिक्षा को मान्यता प्रदान करे और नवीनतम संवैधानिक व्यवस्था के निर्माण का सुत्रपात करे। भारत का स्वदेशीकरण करे। 


#भारतीय_संस्कृति #सामयिकी #वैदिकविज्ञान

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ओ३म् 🕉️

महाराणा प्रताप के दरबारी पं. चक्रपाणि मिश्र: ज्ञान विज्ञान के एक विस्मृत एक अपरिचित एतिहासिक पात्र......

नशेड़ी ओशो के अनुसार बच्चे खुलकर नशा करें...