आयुर्वेद की बात...

आज आधुनिक चिकित्सा पद्धति के समिप बहोत कुछ... अकेले सुश्रुत संहिता की देन है। आमतौर पर मैकालेइज्म व विराष्ट्रियकरण की व्यवस्था के प्रचार-प्रसारवश जिसे एलोपैथी की देन समझता है, वहां अनेकानेक विस्तृत व्यापक धरातल, आयुर्वेदशास्त्र की देन हैं। प्लास्टिक सर्जरी, सिजेरियन शल्य प्रसव परिच्छेद, शल्यक्रियाएं, बाल रोग, प्रसुता चिकित्सा, रजस्वला परिचर्या, केवल पूर्ण प्रामाणिकता व वैज्ञानिकता के साथ आयुर्वेद ने दिए। जो शाश्वत सत्य है। इसलिए आज भी यथावत एलोपैथी वाले उपयोग करते हैं। प्रातः काल उठना चाहिए ये आयुर्वेद ने बताया। कोई अमान्य कर सकते हैं? उदाहरण छोटा सा है, सरल है ताकि सबको सरलता से बडी पुरी बात समझे। ऐसे ही सैकड़ों बडे बडे जटिलतम उदाहरण दिए जा सकते हैं। ऐसी ही अनेकानेक बाते हैं जो आयुर्वेद ने दी, व आधुनिक चिकित्सा पद्धति मे समाविष्ट है। पुनः, उदाहरण के लिए, anesthesia का जनक आयुर्वेद है। शल्यक्रिया के पूर्व रोगी को बेहोश कैसे करते हैं 17 वी शताब्दी तक एलोपैथी को ज्ञात न था। आधुनिक औषधियों को Pharmacology को hint कहा से मिली? भारतीय रसासन शास्त्र व आयुर्वेद से ही मिली। उसी पर शोध करते करते Microbiology से औषधि बनाई गई। कैसे?


उदाहरण के लिए आयुर्वेद में anesthesia के लिए एक वनस्पति या mineral को निरापद बताया गया है। Pharmacologist ने उसपर रिसर्च किया और उसे निरापद से नुकसानदायक बनाकर strong chemical तयार कर लिया। और synthetically internal content के अनुपात निर्मित कर एक anesthesia का drug बना दिया। तो इसमे प्रेरणा, जानकारी, hint का पुरा श्रेय किसे दोंगे? इसी प्रकार ये Pharmacology आदि का विकास हुआ है। आयुर्वेद व रसायनविद्या के बताए सुत्र, संकेत इन्होने खुब उपयोग किए है। आयुर्वेदकाल मे समय मणुष्य की आयु ३०० वर्ष तक थी। वही पश्चिमी जगत में आयु को ७० वर्ष कर देनेपर एलोपैथी गर्व करती है। ये स्थिति थी एलोपैथी की। सभी physics, engineering, आदि के आधुनिक diagnostic क्रियाओं को एलोपैथी मे जोड़ा जाता है, ये भी रोचक षड्यंत्र ही कहना पडेगा। छल ये है कि आप anesthesia का पिता सर्च करिए, आप biology का पिता सर्च करिए सब पश्चिमी देशों के नाम होंगे। जिनको वनस्पति मे जीव है ये नही पता था, वे जीवविज्ञान के पिता? हास्यास्पद जोक नही तो और क्या है? विज्ञान का जन्म पश्चिमी जगत में हुआ, ये उससे भी अरबो गुणा बडी हास्यास्पद बात है। मानसिक रूप से ब्रेनवाशवश आपको इसपर हंसी नही आती होगी लेकिन सत्य जानने वाले जानकारो के लिए वो हास्यास्पद ही है।


✍️ अनिकेत गौतम 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ओ३म् 🕉️

महाराणा प्रताप के दरबारी पं. चक्रपाणि मिश्र: ज्ञान विज्ञान के एक विस्मृत एक अपरिचित एतिहासिक पात्र......

नशेड़ी ओशो के अनुसार बच्चे खुलकर नशा करें...