अन्याय होनेपर क्या करें?
25.1.2023
"यह संसार है। यहां किसी को भी पूरा पूरा न्याय नहीं मिलता। सबके साथ कभी न कभी, कहीं न कहीं, थोड़ा या अधिक, अन्याय होता ही है।" यहां तक कि मूर्ख और दुष्ट लोग तो ईश्वर को भी नहीं छोड़ते। "सर्वथा निर्दोष ईश्वर पर भी बहुत से झूठे आरोप लगाते हैं।" जबकि वह ईश्वर सदा सबका भला चाहता है, और करता है। सदा सबके साथ न्याय ही करता है। "ईश्वर ने आज तक कभी भी, किसी के साथ भी, एक बार भी, अन्याय नहीं किया। और न ही कभी भविष्य में करेगा। फिर भी वह मूर्खों और दुष्टों के अन्याय से नहीं बच पाया।" "संसार में बहुत से लोग ऐसे सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान न्यायकारी दयालु आनन्दस्वरूप सर्वथा निर्दोष ईश्वर पर भी झूठे आरोप लगाते हैं। यह ईश्वर के साथ अन्याय ही तो है।"
"जब लोग सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान न्यायकारी दयालु आनन्दस्वरूप सर्वथा निर्दोष ईश्वर पर भी दोष लगाते हैं, तो आपको और हमें कौन छोड़ेगा?" आपकी हमारी तो क्या शक्ति है? क्या विद्या है? क्या ज्ञान है? क्या बल सामर्थ्य है? बिल्कुल न के बराबर। "तो ऐसी स्थिति में आप दुखी न हों। यह तो सदा मानकर ही चलें," कि "आप के साथ कुछ न कुछ अन्याय अवश्य होगा। कोई न कोई झूठा आरोप लगाएगा ही।" तब आप उस झूठे आरोप से विचलित न हों। इस प्रकार से पहले से उसकी मानसिक तैयारी करके रखें।
आप पर झूठा आरोप लगने पर, "किसी बुद्धिमान व्यक्ति को ढूंढें, जो आपके संपर्क में हो, जो निष्पक्ष हो, सच्चाई को सुनना चाहता हो, समझना चाहता हो, समझ सकता हो, ऐसे व्यक्ति को अपना स्पष्टीकरण सुना दें," कि "जो आरोप मुझ पर लगाया गया है, यह झूठा है। आप चाहें तो मेरी परीक्षा ले सकते हैं। इस परीक्षा में यदि मैं दोषी पाया गया, तो आप जो कहेंगे, मैं वही दंड लूंगा, सबके सामने लूंगा।" "और यदि मैं निर्दोष पाया गया, तो झूठा आरोप लगाने वाले उस व्यक्ति के साथ जो उचित व्यवहार करना हो, वह आप कीजिएगा, और समाज के दूसरे लोगों को भी समझा दीजिएगा, कि मैं निर्दोष हूं।"
आप द्वारा ऐसा कहने पर बुद्धिमान व्यक्ति समझ लेगा, कि आप वास्तव में निर्दोष हैं। और यदि वह परीक्षा लेना भी चाहेगा, तो परीक्षा भी ले लेगा। तब आप निर्दोष ही सिद्ध होंगे। ऐसी परीक्षा से डरना भी नहीं चाहिए। क्योंकि जब आपने कोई दोष किया ही नहीं, तो फिर डर कैसा?
"और हां! समाज में जो लोग पक्षपाती हैं, मूर्ख हैं, दुष्ट हैं, कम बुद्धि वाले हैं, उनको अपना स्पष्टीकरण न सुनाएं। उनको सुनाने से कोई लाभ नहीं होगा।" "वे लोग आपकी सच्ची बात को भी नहीं समझेंगे, बल्कि आपके स्पष्टीकरण से उल्टा ही अर्थ निकालेंगे, क्योंकि "भैंस के आगे बीन बजाने से कोई लाभ नहीं है।" ऐसा करने पर आपका कष्ट और अधिक बढ़ जाएगा।"
"अतः बुद्धिमत्ता का प्रयोग करें, दुख से बचें, और सुखी रहें।"
---- "स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात।"
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