सुख से जीना..
21.7.2023
"प्रत्येक व्यक्ति सुख से जीना चाहता है। दुखी होना कोई भी नहीं चाहता।" यह एक नियम है। इस नियम के अनुसार किस प्रकार से आप अपने जीवन को सुखी बना सकते हैं? उसके उपाय इस प्रकार से हैं।
"आपके जीवन में भूतकाल में आप के साथ जो अन्याय हुए हैं, जो दुखदायक घटनाएं हो चुकी हैं, उन घटनाओं को बार-बार याद न करें। क्योंकि ऐसा करने से आपका दुख बढ़ेगा।" बार-बार उन्हें याद न करने का उपाय है, कि "आप खाली न बैठें। किसी न किसी काम में व्यस्त रहें। इस से आप पुरानी दुखदायक घटनाओं को याद नहीं करेंगे।"
"और फिर भी कभी आप फुर्सत में हों, जब आपके पास कोई विशेष कार्य न हो, तब आपके जीवन में जो भूतकाल में अच्छी घटनाएं हो चुकी हैं, जैसे कि आपको कभी धन मिला, कभी सम्मान मिला, कभी कोई मेडल मिला, कोई यात्रा करने का अच्छा अवसर मिला इत्यादि, तो उन घटनाओं को आप याद करें। इससे आपका मन प्रसन्न रहेगा।"
वर्तमान में जो कुछ परिस्थितियां चल रही हैं, उनको हृदय से स्वीकार करें। अर्थात "वर्तमान में जो लोग आपको सहयोग नहीं देते, आपके साथ छल कपट आदि दुर्व्यवहार करते हैं, तो इस सत्य को स्वीकार करें, कि ये लोग दुष्ट हैं। इनके पूर्व संस्कार अच्छे नहीं हैं। ऐसे लोगों से सावधान रहें।"
लोग शिकायतें बहुत करते हैं, कि "देखिए साहब ! मेरे साथ ऐसा हो रहा है, वैसा हो रहा है।" "आप के साथ जो भी ऊंचा नीचा हो रहा है, उसकी शिकायतें अधिक न करें, बल्कि उसका समाधान सोचें और अपनी सुरक्षा करने का प्रयत्न करें।" "क्योंकि शिकायतें करने से कोई समाधान नहीं निकलता। बल्कि बुद्धिपूर्वक पुरुषार्थ करने से समाधान निकलता है।"
"तथा वर्तमान में आपको जो अनुकूलताएं मिल रही हैं, उन पर अधिक ध्यान दें। जो लोग आपको अच्छा सहयोग दे रहे हैं, उनके साथ उठना बैठना खाना पीना समय व्यतीत करना इत्यादि व्यवहार करें। उन सज्जन लोगों से लाभ उठाएं। इससे आपका मन प्रसन्न रहेगा।"
"इसी प्रकार से भविष्य की भी योजनाएं बनावें। दुष्ट लोगों से सदा सावधान रहें। जिससे कि वे आपको भविष्य में दुख न दे पाएं।"
"तथा आपकी वास्तविक क्षमता कितनी है, आप भविष्य में क्या-क्या कर सकते हैं, आपके सहयोगी लोग कितने हैं, वे आपको कितना सहयोग देने के इच्छुक हैं। इन बातों का गहराई से निरीक्षण परीक्षण करें। इस आधार पर आप भविष्य की अच्छी योजनाएं बनावें। यह विधि है अपने जीवन को सुखमय बनाने की।"
"यदि आप इस विधि से अपना जीवन चलाएंगे, तो निश्चित रूप से आप दुखों से बहुत सीमा तक बच जाएंगे, और शांति आनंद से अपना जीवन जी सकेंगे।"
---- "स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़ गुजरात।"
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