सिगरेट और शराब पीने वालों पर कुख्यात व्यभिचारी ओशो के यह विचार जान लीजिए... ओशो कहता है - ❝ सभ्यता दो रोग पैदा करवाती है, एक तरफ अहंकार और एक तरफ अपराध। तुमने किसी बच्चे को कहा, सिगरेट नहीं पीना; महापाप है, नरक में सड़ोगे। तुमने डरवाया। अब अगर पीएगा, तो अपराध-भाव पैदा होगा कि मैंने कुछ पाप किया। मां-बाप से झूठ बोला, छिपाया। वह डरा-डरा घर आएगा। चैकन्ना रहेगा कि कहीं न कहीं से खबर मिलने ही वाली है। कोई न कोई देख ही लिया होगा। कपड़े में बास आ जाएगी मां को। मुंह को पास लाएगा, तो मुंह से पता चल जाएगा। वह पकड़ा ही जाने वाला है। वह अपराध से भरा हुआ है, डर रहा है, घबड़ा रहा है। ❞[1] अब इस कथन पर क्या कहे? कोनसी गाली दे? कोई शब्द ही नहीं बचा। निशब्द। ये कितना मुढ़बुद्धि रहा होगा इसका अनुमान आप लगा सकते हैं। पहला तो इसको समाज में जो असामाजिक तत्व है जो समाज मे अत्यंत निषिद्ध तथा लॉ तथा विज्ञान के विरूद्ध गलत काम करते हैं उनको अपनी ओर आकृष्ट करना था। और अपने आप को उनमे भगवान के रूप में प्रतिष्ठित करना था। इसने अपनी योजना या अभियान की ऐसी ही रूपरेखा गढी है जैसे कयी ढोंगी पाखंडी रचते है लेकिन ये कु...
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