सज्जन कैसे करें दृष्ट से व्यवहार?
2.11.2022
संसार में कुछ लोग अच्छे होते हैं, ईमानदार होते हैं, सज्जन होते हैं। और कुछ लोग बेईमान धोखेबाज एवं दुष्ट होते हैं। दोनों में अंतर यह होता है, कि "अच्छे ईमानदार सज्जन लोग कभी किसी को परेशान नहीं करते, किसी पर अन्याय नहीं करते। दूसरे दुष्ट बेईमान लोग भले ही उन्हें परेशान कर दें, तब भी वे उनके साथ झगड़ा नहीं करते। हां, अपनी रक्षा के लिए इतना तो कर लेते हैं, कि दुष्ट बेईमान असभ्य धोखेबाज लोगों से वे दूर हो जाएं। परंतु बेईमान धोखेबाज लोगों से वे कोई बदला नहीं लेते। उन पर अन्याय कभी नहीं करते। उस सारी घटना को ईश्वर के न्यायालय में छोड़ देते हैं। यही उनकी विशेषता होती है।"
"ईश्वर तो न्यायकारी है ही। वह तो सदा सब को देखता ही है। सबके कर्मों का हिसाब रखता ही है। और ठीक समय आने पर सब को न्यायपूर्वक कर्मों का अच्छा बुरा फल देता ही है। यह वास्तविकता है।" वे अच्छे सज्जन लोग इस वास्तविकता को अच्छी प्रकार से समझते हैं। इसलिए वे ऐसा सोचते हैं, कि "जब इस दुष्ट अन्यायकारी का दुर्व्यवहार ईश्वर देख ही रहा है, मैंने इससे अपनी रक्षा करने का पूरा प्रयत्न किया, उसके बाद भी इसने मुझे धोखा दिया, चालाकी से बेईमानी से मुझे ठग लिया, और निर्दोष होते हुए भी मुझे समाज में व्यर्थ बदनाम किया, तो मैं अब भी इससे द्वेष नहीं करूंगा, मैं इस घटना को ईश्वर के न्याय पर छोड़ देता हूं। हे ईश्वर! अब आप ही इस घटना का न्याय करें।"
इस प्रकार से सोचकर "वे लोग उन धोखेबाज बेईमान लोगों से कोई राग द्वेष भी नहीं करते, कोई लड़ाई झगड़ा भी नहीं करते, बल्कि अपनी रक्षा करके उनसे दूर हो जाते हैं, तथा संसार में किन्हीं दूसरे अच्छे संस्कारी लोगों को ढूंढ लेते हैं। उनके साथ मिल कर अपना जीवन शांतिपूर्वक जी लेते हैं। ऐसे लोग ही 'सज्जन ईमानदार ईश्वरभक्त देशभक्त एवं उत्तम मनुष्य, अथवा महापुरुष' कहलाते हैं।"
ऐसे सज्जनों की खोज आप भी करें, और उनके साथ आप भी अपना जीवन बिताएं। "दुष्ट लोगों से दूर रहें। वे लोग न तो स्वयं ठीक से जीते हैं, और न ही दूसरों को जीने देते हैं। उनसे राग करना भी ठीक नहीं है, और द्वेष करना भी ठीक नहीं। उनसे दूर रहना ही उचित है। तभी व्यक्ति शांतिपूर्वक जी सकता है, अन्यथा नहीं।"
---- स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, रोजड़, गुजरात।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें