भूकंप का कारण क्या है?

वैज्ञानिक खोज - भूकम्प क्यों आते है ?

इस प्रश्न के उत्तर के लिये वैज्ञानिको ने 

सन 1856 से अभ्यास किया।

चार्ल्स फ्रान्सीस रिक्टर ने भूकम्प की तीव्रता मापन के लिये एक पयमाना-स्केल विकसित किया, तब से आजपर्यंत भूकम्पोकी तीव्रता बताने कहते है कि रिक्टर स्केल से यह जानकारी मिली। गत कुछ वर्षोंमें 1991 में उत्तर काशीमें भूकम्प आया, 1993 में लातूर (महाराष्ट्र) में भूकम्प आया, 1997 में जबलपूरमें, 2001 में भुज कच्छ मे भूकम्प आया और हजारो प्राणीयोंके जीवन कुछ ही क्षणोमें समाप्त हुये ।

   तो कम्पित धरती से बचाने और सुख समृद्धी करने का एक सिद्धान्त है जिसे Bislogy-Bis Theory कहते है । 1995 में दिल्ली विश्वविद्यालय के तीन अध्येताओने सूजडल (रूस) मे हुये भूकम्प का अभ्यास किया । चट्टाने किस प्रकार Interaction of abetoyer generated Nonlenor Elastic Pain Waves in Rocks कम्प के चपेटमें आयी इस पर संशोधन किया। Oct 1995 में एक पुस्तक छपी है जिसका नाम है Enteology of Earthquakes. कुछ निष्कर्ष यह निकला कि प्रतिदिन की हत्यायें, हिंसाचार, क्रूरता का नंगा नाच, कत्तलखाने, वधशालायें युद्ध इत्यादि जनित भू रेखीय प्रत्यक्ष पीडा तरंगो के पारस्पारिक प्रभाव है।

यह जानकर भी, दुर्भाग्य है की, भारतमें प्रतिवर्ष 15 करोड पशु मांसाहार निमित्त मारे जाते है यह संख्या तो इससे कई अधिक होगी चूंकि नये नये बूचड खाने खोले जा रहे है।



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