रामायण काल का सबूत है चार दातों वाले हाथी
रामायण का LIVE सबूत है ये हाथी | Scientific Proof Of Ramayan---
रामायण और महाभारत हमारे देश का वास्तविक इतिहास है , लेकिन अनेको देशविरोधी लोग इन इतिहास ग्रंथो को काल्पनिक बताकर हमारे देश के इतिहास को नष्ट करना चाहते हैं |
आज मैं आपको ऐसा वैज्ञानिक प्रमाण बताने जा रहा हूँ, जो रामायण के वास्तविक होने का प्रमाण है |
उस प्रूफ का लिंक मैं आपको नीचे दे दूँगा |
वैसे तो राम सेतु अपने आप में रामायण का अकाट्य प्रमाण है , लेकिन रामायण विरोधी लोग इसे भी नही मानना चाहते हैं |वे लोग भी ऐसे ही हैं , जो सूर्य के अस्तित्व को नकारने के लिए आँख बंद कर लेते हैं |
हमारे देश का इतिहास पूरी तरह गलत पढाया जाता है , और रामायण महाभारत जैसा इतिहास तो पढाना दूर की बात है ...
उसे कल्पना कहा जाता है |
लेकिन हम इस लेख में रामायण का एक प्रमाण देखेंगे , जिससे आप रामायण पढ़ना चाहेंगे | इस लेख को पढकर देशविरोधी मानसिकता वाले लोग विधवा विलाप जरुर करेंगे |
दुनिया में जीवो के अनेक प्रजातिया हैं , और कई प्रजातियां समय के साथ , लुप्त होती चली गयी |इसी तरह हाथियों की तरह अनेको प्रजातियां थी , इसी तरह एक प्रजाति थी , जिसका नाम है (Gomphotherus) | इस प्रकार के हाथी के 4 दांत होते थे,2 दांत ऊपर की तरफ , 2 दांत नीचे की तरफ |
University of Arizona के वैज्ञानिको ने इस प्रकार के हाथी के कुछ अवशेष ढूंढे हैं | इन वैज्ञानिको के अनुसार इस हाथी के अवशेष 13,400 वर्ष पुराने हैं | और यह इस प्रजाति का अंतिम हाथी रहा होगा | वैज्ञानिक इस प्रकार के हाथियों को लगभग 20 लाख वर्ष पुराना मानते हैं |
अब हम आपको बताते हैं , इस प्रकार के हाथी का वर्णन एक मात्र इतिहास ग्रन्थ "रामायण" में मिलता है , और यह रामायण का एक अकाट्य प्रमाण है |
जब हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं , तब लंका के महल का वर्णन बताया गया है की 'भवन के द्वार पर चार दाँतों वाले बड़े डील-डोल वाले हाथी थे , और भी अनेको प्रकार के मृग और पक्षी थे |
इसके अलावा यह भी वर्णन है की 'रावन के गढ़ में चार , तीन और दो दाँतों वाले हाथी थे '| जिनकी हथियार हाथ लिए राक्षस सदैव रक्षा किया करते थे |
यहाँ सपष्ट है की चार दातों वाले हठी का वर्णन रामायण में मिलता है |
रामायण में 'त्रिजटा' नाम के राक्षसी के स्वप्न का भी वर्णन है , जिसमें वह राक्षसी बताती है की , वह स्वप्न मे श्री राम और माता सीता को चार दाँतों वाले हाथी पर बैठ कर आते हुए देखा |
उसने वर्णन में कहा की उसने विभीषण को भी मेघ की तरह गरजने वाले चार दाँतों वाले दिव्या हाथी को देखा | रामायण के काल में इस प्रकार के हाथी थे | और इस प्रकार के हाथी का वर्णन वही कर सकता है जिसने इन्हें देखा हो , कोई काल्पनिक कहानी में इस प्रकार का वर्णन कभी भी संभव नही हो सकता |
इस प्रमाण से यह प्रमाणित हो जाता है की रामायण एक वास्तविक इतिहास ग्रन्थ है | कई लोग रामायण के रचना का काल इसा से पूर्व चौथी और पांचवी सताब्दी में सिद्ध करने का असफल प्रयास करते हैं , लेकिन हमारे द्वारा दिया हुवा यह प्रमाण रामायण को लाखो वर्ष पुराना सिद्ध करता है |
जिस देश के इतिहास को नष्ट कर दिया जाता है ,वह देश अधिक समय तक जीवित नही रह पाता | इसलिए जरुरी है की देश के अहर व्यक्ति को अपना इतिहास जरुर जानना चाहिए | हमारे देश के इतिहास को नष्ट किया गया , और उसमें मिलावट की गयी |
अगर आपको इतिहास जानना है तो आपको रामायण , महाभारत जैसे इतिहास ग्रंथो को पढ़ना चाहिए |
हालाँकि इनमें भी , काफी मिलावट की गयी है , इसमें जो गलत बातें वो बाद में लोगो द्वारा मिलायी गयी हैं , इसलिए अपनी बुद्धि से इन ग्रंथो को पढ़ कर वास्तविकता को जानना चाहिए |
इसलिए रामायण पढ़िए और इतिहास को जानिए | T.V , serial में रामायण देखने से आप गलत इतिहास को जानेंगे , असल इतिहास को जानने के लिए आपको खुद रामायण पढ़ का देखनी चाहिए |
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और यह रहा Gomphoptheres का प्रमाण -
https://phys.org/news/2014-07-gomphothere-archaeologists-bones-elephant-ancestor.html
✍️जय मां भारती 🚩 🚩 🚩 🚩 🚩
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