प्राचीन वैदिक डाक व्यवस्था
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आंग्लभाषा में एक कहावत है ' History repeats itself ' यानि मानवी इतिहास में एक जैसी घटनाएं बार - बार होती रहती है । वर्तमान युग में ' शासन द्वारा डाक - व्यवस्था चलाई जाती है । आम लोग यह समझ बैठे हैं कि इसे यूरोपीय लोगों ने ही सर्वप्रथम चलाया , किन्तु यह कल्पना सही नहीं है ।
प्राचीन वैदिक सभ्यता में भी डाक - व्यवस्था थी । एक मध्य युगीन यूरोपीय लेखक का कहना है कि डाक - व्यवस्था तो सर्वप्रथम भारतीयों द्वारा ही चलाई गई थी ।
A Voyage to East Indies नाम का एक ग्रन्थ है , इसके लेखक है Fra Paoline da Tan Bartolomco | वे रोमा उर्फ रोम नगर की Academy of Valetri के सदस्य थे और Propaganda यानि प्रचार संस्था में प्राच्य भाषाओं के प्राध्यापक थे । उन्होंने प्राच्य द्वीपों का जो प्रवास किया उसका उन्होंने वर्णन लिखा ।
उस ग्रन्थ के पृष्ठ १४७ पर टिप्पणी में फार्स्टर लिखते हैं :
" भारत में डाक - व्यवस्था चालू है । उस डाक - सेवा का नाम है ' अंजला ' । प्राचीनकाल में इराण ( पारसिक देश ) में भी एक प्रकार की डाक - व्यवस्था उपलब्ध थी । उसे ' अंगरस ' कहा करते थे । उसमें और अंजला ( Angela ) में कुछ समानता दीखती है । सम्भावना ऐसी लगती है कि ईराणी डाक - सेवा , भारतीय डाक - सेवा का अनुकरण रूप हो । "
इस प्रकार इससे यह समझ आता है कि वैदिक काल से ही आर्यावर्त में डाक सेवा थीं।
🙏विचार प्रसार⚔️🚩⚔️🚩⚔️🚩⚔️🚩
✍️ जय मां भारती 🚩 🚩 🚩 🚩 🚩 🚩 🚩 🚩
आंग्लभाषा में एक कहावत है ' History repeats itself ' यानि मानवी इतिहास में एक जैसी घटनाएं बार - बार होती रहती है । वर्तमान युग में ' शासन द्वारा डाक - व्यवस्था चलाई जाती है । आम लोग यह समझ बैठे हैं कि इसे यूरोपीय लोगों ने ही सर्वप्रथम चलाया , किन्तु यह कल्पना सही नहीं है ।
प्राचीन वैदिक सभ्यता में भी डाक - व्यवस्था थी । एक मध्य युगीन यूरोपीय लेखक का कहना है कि डाक - व्यवस्था तो सर्वप्रथम भारतीयों द्वारा ही चलाई गई थी ।
A Voyage to East Indies नाम का एक ग्रन्थ है , इसके लेखक है Fra Paoline da Tan Bartolomco | वे रोमा उर्फ रोम नगर की Academy of Valetri के सदस्य थे और Propaganda यानि प्रचार संस्था में प्राच्य भाषाओं के प्राध्यापक थे । उन्होंने प्राच्य द्वीपों का जो प्रवास किया उसका उन्होंने वर्णन लिखा ।
उस ग्रन्थ के पृष्ठ १४७ पर टिप्पणी में फार्स्टर लिखते हैं :
" भारत में डाक - व्यवस्था चालू है । उस डाक - सेवा का नाम है ' अंजला ' । प्राचीनकाल में इराण ( पारसिक देश ) में भी एक प्रकार की डाक - व्यवस्था उपलब्ध थी । उसे ' अंगरस ' कहा करते थे । उसमें और अंजला ( Angela ) में कुछ समानता दीखती है । सम्भावना ऐसी लगती है कि ईराणी डाक - सेवा , भारतीय डाक - सेवा का अनुकरण रूप हो । "
इस प्रकार इससे यह समझ आता है कि वैदिक काल से ही आर्यावर्त में डाक सेवा थीं।
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