वेदों पर विद्वानों के कथन

वेदों पर विद्वानों के कथन

वेद संस्कृत - साहित्य के मुकुटमणि हैं , वैदिक संस्कृति और सभ्यता का मूलाधार हैं , इसीजिए वैदिक विचारकों ने दर्शन और स्मृतिकारों ने , इतिहास और पुराणकारों ने वेद की महिमा के गीत गाये हैं ऐसा नहीं समझना चाहिए।

वेद के वेदत्व और उसकी सर्वागंपूर्णता पर न केवल भारतीय विद्वान अपितु पाश्चात्य जगत् भी मोहित एवं मुग्ध है । जिन्होंने विमल वैदिक ज्ञान के अन्वेषण में अपना समय , श्रम और शक्ति व्यय की है , उन सभी व्यक्तियों ने वेद के अलौकिक ज्ञान की प्रशंसा की है ।
यहाँ कुछ सम्तियाँ दी जाती हैं :-

(1) #प्रो0_हीरेन ( Prof . Heeren ) महोदय लिखते हैं :

" The Vedas stand alone in their solitary splendor servingas beacon of Divine Light for the onword march of humanity ."

---------- (Historical Researches)

#अर्थात् जिस प्रकार वेद देदीप्यमान हैं , इस प्रकार अन्य कोई ग्रन्थ नहीं चमकता । वे मनुष्यमात्र की उन्नति और प्रगति के लिए दिव्य प्रकाश स्तम्भ का काम देते हैं ।

(2)  #लार्ड_मोर्ले ने घोषणा की :

What is found in the Vedas exists nowhere else.
----- (The Nineteenth Century and after)

  अर्थात् जो कुछ वेदों में मिलता है , वह अन्यत्र कहीं नहीं है । १४ जुलाई १८८४ को पेरिस में आयोजित अन्तर्राष्ट्रिय साहित्य संघ ( International Literary Association ) के समक्ष निबन्ध पढ़ते हुए फ्रांस देशीय विद्वान् लेओ देल्बो ( Mons . Leon Delbos ) ने कहा था :

"The Rigveda is the most sublime conception of the great highway of humanity ."


- (हरिबिलास शारदा लिखित Hindu Superiority . . . . .)

(3) उबिनगन विश्वविद्यालय के प्रो0 पाल थीमा ने २६ वीं अन्तर्राष्ट्रीय प्राच्य सभा ( 26th International Congress of Orientalists ) में अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा :-

 The Vedas are noble documents - not only of value and pride to India but to the entire humanity because in them we see man attempting to lift himself above the earthly existence ."

#अर्थात् वेद वे पवित्र ग्रन्थ हैं जो न केवल भारतवर्ष के लिए अपितु समस्त संसार के लिए मूल्यवान हैं , क्योंकि हम उनमें मनुष्य को संसारिकता से ऊपर उठने ( मोक्ष प्राप्त करने ) का यत्न करते हुए पाते हैं ।

(4) अमेरिकी वैज्ञानिकका #हिलर_विलौक्स ने - #Sublimity_of_the_Vedas में लिखा है कि

" हमने प्राचीन भारत के धर्म के विषय में पढ़ा और सुना है । यह उन महान वेदों की भूमि है जो अद्भुत ग्रन्थ हैं । इनमें न केवल जीवनोपयोगी धार्मिक तत्त्वों का ही वर्णन है , अपितु उन तथ्यों का भी प्रतिपादन है , जिन्हें विज्ञान ने सत्य सिद्ध किया है । विद्युत , रेडियम , एलक्ट्रोन्स तथा विमान आदि सभी वस्तुएँ वेदों के द्रष्टा ऋषियों को ज्ञात प्रतीत होती हैं ।"

(5)  अपने ' #त्रयी - चतुष्टय' में प्रसिद्ध भारतीय विद्वान पं० सत्यव्रत सामश्रमी ने भी लिखा है -

 ' वेदों में सारे विज्ञान सूक्ष्मरूप से विद्यमान हैं । ' ।

(6) बड़ौदा में ' #यन्त्रसर्वस्व ' नामक एक हस्तलिखित ग्रन्थ मिला है जिसके लेखक महर्षि भरद्वाज हैं । इन ग्रन्थ के " वैमानिक - प्रकरण ' में लिखा कि ' वेदों के आधार पर ही इस ग्रन्थ को बनाया गया है ।

(7) प्रसिद्ध पारसी विद्वान् #फर्दून दादा चानजी वेदों की महिमा का वर्णन करते हुए लिखते हैं :

" The Veda is a book of knowledge and wisdom comprising the Book of Nature , the Books of Religion , the Book of Prayers , the Book of Morals and so on . The word ' ' Veda ' means wit , wisdom , knowledge and truly the Veda is condensed wit , wisdom and knowledge ."

 - (Philosophy of Zoroastrianism)

#अर्थात् वेद ज्ञान की पुस्तक है । इसमें प्रकृति , धर्म , प्रार्थना , सदाचार आदि विषयों की पुस्तकें सम्मिलित हैं । वेद का अर्थ है ज्ञान और वस्तुतः वेद ज्ञान - विज्ञान से ओत - प्रोत फ्रॉस के प्रसिद्ध विद्वान् वाल्टेयर का मत है ' केवल इसी देन ( यजुर्वेद ) के लिए पश्चिम पूर्व का ऋणी रहेगा । '

(8)  ईसाई पादरी मौरिस फ़िलिप ( Rev . Moris Philip ) ने भी वेद को ईश्वरीय ज्ञान स्वीकार किया है । वे लिखते हैं :

" The conclusion , therefore , is inevitable viz , that the development of religious thought in India has been uniformly downward , and not upward , deterioration and not evolution . We are justified , therefore , in concluding that the higher and pure conceptions of the Vedic Aryans were the results of a primitive Divine Revelation ."

 - (The Teachings of the Vedas)

अर्थात् अतः हमारे लिए इस परिणाम पर पहुँचना अनिवार्य है कि भारत में धार्मिक विचारों का विकास नहीं हुआ , अपितु हास ही हुआ है , उत्थान नहीं अपितु पतन ही हआ । इसलिए हम यह परिणाम निकालने में न्यायशील हैं कि वैदिक आर्यों के उच्चतर और पवित्रतर विचार एक प्रारम्भिक ईश्वरीय - ज्ञान का परिणाम थे ।

(9)  अन्त में #जे0_मास्करों ( J . Mascaro M . A ) की सम्मति उद्धृत कर हम आगे बढ़ेंगे । वेद की तुलना आत्मा के हिमालय से करते हुए वे लिखते हैं If a Bible of India were compiled . . . . . . . . . . . . the Veda the Upanishads and the Bhagvad Gita would rise above the rest like Himalayas of the spirit of man .

 - (The Himalyas of the Soul)

अर्थात यदि भारत की कोई बाइबल संकलित की जाए तो उसमें वेद , उपनिषदें और भगवदगीता मानवीय आत्मा के हिमालय के समान सबसे ऊपर उठे हए ग्रन्थ होंगे ।

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🙏विचार प्रसार🚩
✍️जय मां भारती 

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