इन चार मंदिरों की टक्कर में संसार भर में कही मंदिर नहीं थे ।

#वह_चार_मंदिर जिनकी
टक्कर संसार भर में कही नहीं थीं......

◼️ विक्रमादित्य द्वारा श्रीराम जन्म वह_चार_मंदिर भूमि पर निर्मित मंदिर के बारे में पं. रामगोपाल पांडेय ने
#श्रीराम_जन्मभूमि_का_रोमांचकारी_इतिहास ( पृ. ३) में लिखा है  - 

"कहते हैं कि उस वक्त भारतवर्ष में केवल चार मंदिर सर्वोकृष्ट माने जाते थे। इन चार मंदिरों की टक्कर में संसार भर में कही नहीं थे। इन चार मंदिरों में एक जन्मभूमि का श्रीराम मंदिर, दुसरा कणक भवन और तिसरा काश्मीर का सुर्य मंदिर तथा चौथा प्रभासपट्टम का श्री सोमनाथ मंदिर था। "

◼️फिर इसी पुर्व पृ. 2 पर श्रीराम जन्मभूमि पर लिखा है :

" जन्म - भूमि आज से नौ लाख वर्ष पूर्व इस पावन भूमि पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामचन्द्रजीने अवतार धारण किया था । इसी पवित्रस्थली की पुनीत रज में लोट पोट कर परस्पर पुराण और पुरुषोत्तम  श्री रामचन्द्रजी भरत लक्ष्मण और शत्रघ्नजी के साथ अपने देवदुर्लभ बाल चरित्र किये थे । ईसा को शताब्दियों पूर्व भारत के राज सिंहासन को सुशोभित करने वाले सम्राटों ने समय समय कुर इसको रक्षा की । इसका जीर्णोद्धार करते रहे । किन्तु किरात सक और हुणों के आक्रमण के समय क्रमशः हिन्दू राजाओं ने उधर से अपना ध्यान हटा लिया परिणाम स्वरूप प्राचीन मन्दिर भग्न हो गया और वस्तु श्रीराम जन्मभूमि का रोमाञ्चकारी इतिहास शेष नहीं बची अन्ततः ईशा से लगभग एक शताब्दी पूर्व हिन्दू कुल के देदीप्यमान भानु सम्राट बिकमादित्य ने बड़े परिश्रम से खोजकर इस पावन भूमि पर बड़ा विशाल मन्दिर बनवा दिया ।"




इस प्रकार ईसा पूर्व में मूल विक्रमादित्य प्रमर द्वारा इसका निर्माण हुआ। यहां कोई यदि कहे कि विक्रमादित्य दृतिय अर्थात् चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने किया था तो यह संभव नहीं है क्योंकि वह ईसा के शताब्दियों बाद हुए अतः ऐसा मतभेद भी नहीं है । फिर उसका समय समय पर अनेक सम्राट व राजाओं द्वारा जिर्णोद्दार अवश्य हुआ होगा इसमें कोई शंसय नहीं है।

📖श्रीराम जन्मभूमि का रोमांचकारी इतिहास। पं. रामगोपाल पांडेय।

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