क्या हिंदू या आर्य सागर पार नहीं जातें थे ?

#क्या_हिन्दू_या_आर्य_सागर_पार_नहीं_जाते_थे ?

सारे विश्व में जब इस्लामी अातंक मना , लोग बलात मुसलमान बनाए जाने लगे , स्त्रियों पर बलात्कार होने लगा और बच्चों को गुलाम बनाकर बेचा जाने लगा , तब कुछ समय पर्यन्त हिन्दू लोगों को सागर पार नहीं जाना चाहिए ऐसी एक संरक्षणात्मक सूचना भारतभर में फैलना स्वाभाविक थी । जैसे बाहर अराजक , बलवा , दंगा - फसाद होने पर माता पिता अपने बच्चों को बाहर जाने से रोकते हैं । किन्तु उससे यह निष्कर्ष निकालना अयोग्य होगा कि भारतीय लोग कभी देश के पार जाते ही नहीं थे । भारतीय लोगों को सारे विश्व में दिग्विजय के लिए , शासन के लिए , पढ़ाने के लिए , समाज संगठन आदि विविध व्यावसायिक सेवायों के लिए जाना ही पड़ता था ।

(१) कर्नल जेम्स टॉड ने लिखा है ( पृष्ठ ११३ , खण्ड १ , Annals and / Antiquities of Rajasthan ) कि

" प्राद्यतम समय से भारतीय लोग सागर पार जाते रहे हैं । विविध प्रदेशों में भारतीयों के धार्मिक प्रणाली के चिह्न उसके साक्ष्य हैं ।"

(२) #एडवर्ड_पोकॉक लिखते हैं ( पृष्ठ ४४ , India in Greece , by Edward Pococke ) कि

" हिन्दुस्तान के लोग प्राचीन काल में सागर संचार में बड़े कुशल माने जाते थे " |

(३) #मनुस्मृति के उल्लेखानुसार भारतीय व्यापारी विविध देशों से माल लाकर भारतीय राजाओं को भेंट दिया करते थे ।

(४) #रामायण में भी सागरपर्यटन के स्पष्ट उल्लेख हैं ।

(५) #हीरेन ( Heeren ) के Indians नामक ग्रन्थ में पृष्ठ १२४ पर लिखा है कि भारतीयों की विदेश - यात्रा पर रोक लगाने वाला कोई आदेश नहीं था । उल्टा मनुस्मृति में अंकित उल्लेखों में विदेशों से किए जाने वाले व्यापार में यदि हानि हई तो उसकी भरपाई करने सम्बन्धी नियम दिए हुए हैं ।

(६) धनुर्वेद के परम मर्मज्ञ ऋषि परशुराम ने इक्कीस बार विश्व में संचार कर उत्पातशील क्षत्रियों का दमन किया था । उनमें से एक बार परशुराम ने ईरान पर चढ़ाई की ।

(७) #पोकॉक ने अपने ग्रन्थ के पृष्ठ ४५ पर लिखा है कि परशुधारी परशुराम ने ईरान को जीतने पर उस देश का परशु ( यानी कुल्हाड़ा ) से पारसिक उर्फ परशीय ऐसा नाम पड़ा ।

(८) पोकॉक का निष्कर्ष है कि चाल्डियन् ( chaldean ) या खाल्डियन् शब्द कुलदेव यानि देव या ब्राह्मणों का द्योतक है ।

(९) अपने ग्रन्थ India in Greece के पृष्ठ ४७ पर पोकॉक लिखते हैं कि ईरान , कॉलचिस और अर्मेनिया के प्राचीन नक्शे में उस प्रदेश में भारतीय बसे थे इसके स्पष्ट और पाश्चर्यकारी प्रमाण हैं । और रामायण तथा महाभारत के अनेक तथ्यों के वहाँ प्रमाण मिलते हैं । उस सारे नक्शे में बड़ी मात्रा में उन प्रदेशों में भारतीयों की बस्ती का विपुल ब्यौरा मिलता है । Oxus वहाँ की एक नदी का नाम है । उसे ग्रीक शब्द समझना भूल है । ऊक्षस् यानी बैल , संस्कृत शब्द है । उसी का संक्षिप्त रूप पांग्ल भाषा में ' प्रॉक्स ' ( ox ) ऐसा रूद है । उसका अर्थ बैल ही है ।

(१०) पोकॉक के ग्रन्थ के पृष्ठ ५३ पर उल्लेख है कि यूरोपीय क्षत्रिय , स्कैंडिनेविया के क्षत्रिय और भारतीय क्षत्रिय सारे एक ही वर्ग के लोग हैं । वैदिक प्रणाली में शिवपुत्र स्कंद देवों की सेनाओं का नेता ( यानी सेनापति ) है । उसी से उत्तरी यूरोप के डेन्मार्क , नार्वे , स्वीडन आदि देशों को स्कैंडिनेविया कहा जाता है - जो ' स्कंदनावीय ' ऐसा संस्कृत शब्द है । स्कंद के नेतृत्व में वही जो सागरदल या नौकादल गया था उससे वह नाम रूढ़ हुआ।

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