इस्लाम से पूर्व अरब प्रायद्वीप

इस्लाम से पूर्व अरब प्रायद्वीप

#️⃣ विश्व प्रसिद्ध नगर ऐराम तथा शिबम

फारस के प्रसिद्ध विद्वान डा ० सेफुद्दीन जिलानी ( मृत्यु 1972 ) ने एक प्रसिद्ध अरबी मूल ग्रन्थ की प्रति ओयून अखबर - अल - हिन्द - वास सिन्ध ( Oyen Akhbar AlHind Vas Sindh ) जिसका लेखक इब्न - बार ( Ibn - Bar ) है , उसका हवाला देते हुए बतलाया कि

 अरब प्राय : द्वीप साम्राज्य में ' ऐराम ' था । ' ऐराम ' का अरबी अर्थ है " राम का निवास " ( the abode of Ram ) इसकी शरदकालीन राजधानी शिबम थी । इसी भांति शिबम जो शिवोअहम् का अरबी रूपान्तर है । शिबम के कारण अरबिया रोम के इतिहासकारों ने ' भाग्यशाली अरब ' कहा है । वस्तुतः उपरोक्त दोनों महानगर हजारों वर्षों तक अज्ञात तथा रहस्यमय रहे । प्राचीन विवरणों , अरेबियन नाईट्स तथा बैदउइन कबीलों की लोक कहानियों तथा अनेकों उपन्यासों की कल्पना मात्र ही बने रहे । पवित्र कुरान में वर्णित अरब प्रायःद्वीप के दक्खिन भाग में रूब - अल - खाली ( Rub - al - Khali ) रेगिस्तान में उबर ( Ubar ) या वाबर ( Wabar ) क्षेत्र में एक हजार स्तम्भों या मूर्तियों वाले नगर का वर्णन मिलता है । इसे अरब साम्राज्य की राजधानी ऐराम या इराम या अमाद भी कहा गया है । यह नगर सम्भवत : 3000 वर्ष ई . पूर्व से पहली शताब्दी तक अस्तित्त्व में रहा । व्यापारिक केन्द्र के साथ प्रसिद्ध व्यापारिक मार्ग पर होने के कारण यह मध्यपूर्व तथा यूरोप में प्रसिद्ध था । कुछ विद्वानों ने इसे एक किले का स्वरूप भी दिया है जहां सौदागर आकर ठहरते थे । परन्तु बाद में यह नगर विनष्ट हो गया ।

हज़रत मौहम्मद साहब ने कुरान में ऐराम शब्द का उपयोग केवल एक या दो बार किया है । कुरान में एराम की भूरि - भूरि प्रशंसा की है । यहां पर असंख्य मंदिरों का वर्णन किया है जो अनेक स्तम्भों पर बने होते थे तथा ऐसे मंदिर जिनके समान पहले कभी नहीं बने थे । एराम के निवासी अदीसी ' थे जिसका संस्कृत में समानार्थक अर्थ है " वह जो न केवल प्रथम बल्कि पुनर्जन्म में प्रथम है " कहा जा सकता है ।

प्रसिद्ध विद्वान अब्दुल युसुफ अली ने कुरान के 89 वें अध्याय ( सूरा 89-6-8 ) का अंग्रेजी अनुवाद करते हुए इसका अर्थ निम्न दिया है " Seest thou not how thy Lord dealt with the Ad ( People ) of the city of Iram with lofty pillars ) , The like of which were not produced in ( all ) the land "

संदर्भ पुस्तक : "मुस्लिम शासक तथा भारतीय जन - समाज" ले. डाॅ. सतीश चंद्र मित्तल, प्रकाशन सुरूचि प्रकाशन। 2007 ई .

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