हिंदवी स्वराज्य अर्थात् धर्म राष्ट्र स्थापना की प्रेरणा लेकर धर्म रक्षा की शपथ ग्रहण........!

हिंदवी स्वराज्य अर्थात् धर्म राष्ट्र स्थापना की प्रेरणा लेकर धर्म रक्षा की शपथ ग्रहण........ 


🚩धर्म का अर्थ धर्म होता है संप्रदाय नहीं.... छत्रपति शिवाजी महाराज ने धर्म राष्ट्र की स्थापना की जिसकी प्रेरणा प्रथम गुरू "माता" से और सबसे समर्थ "समर्थ रामदास" से ली.....तत्कालीन #धर्म और उसकी हानी को को समझने के लिए दासबोध अवश्य पढें.. 

🚩सन् 1646 से 1659 वान् पहला सम्मान भी #रोहिडेश्वर_किले को ही देना सुनिश्चित हुआ । किले में रसद बहुत कम थी , अपने साथ दो सौ मावलों को लेकर शिवाजी रोहिडेश्वर किले पर पहुँचे । बरसात की तैयारी के चलते किले पर लकड़ियाँ इकट्ठा करने का कार्य चल रहा था , मावलों ने मजदूरों के भेस में लकड़ियों के गट्ठरों में तलवारें छिपाकर किले के अंदर पहुँचाईं , और बिगुल से संकेत मिलते ही सभी ने एक साथ अपने शस्त्र निकाले , किलेदारों को कुछ समझ आए , उसके पहले ही किला फतह कर लिया । शिव छत्रपति ने किले की निगरानी कर उसको दुरुस्त करने का आदेश दिया।

🚩दूसरे क्रमांक पर था #तोरणा किला । यहाँ भी किलेदार गाफिल था , सो धावा बोलकर इसे भी कब्जे में लिया और तट बंदी का कार्य शुरू किया ।

🚩इन सभी गतिविधियों के लिए धन की आवश्यकता महसूस होने लगी । तब जीजामाता ने अपने गहने देकर कहा कि उन्हें बेचकर कार्य आगे बढ़ाइए स्वराज्य स्थापना 45 बाल सैनिकों की इन गतिविधियों एवं वीरतापूर्ण विजय को देख दादोजी कोंडदेव सोचने लगे कि भविष्य की मुहिमों के लिए धन की व्यवस्था कैसे होगी । पर कहते है न की ' जहाँ चाह , वहाँ राह ' और अच्छे कार्य में भगवान् हमेशा साथ देते हैं और ईश्वर की अपार कृपा से तट बंदी के काम के दौरान सोने की मोहरों का एक बड़ा संग्रह मिला ।

🚩धन की चिंता समाप्त हुई और स्वराज्य के कार्य में गति आई । तत्पश्चात् रोहिड़ा किला नियंत्रण में लिया । इसी प्रकार कोंडाना के किलेदार सिद्धि अंबर को भी समझाइश देकर अपनी तरफ मोड़ लिया । कोंडाना भी स्वराज्य में शामिल हुआ ।

🚩पुरंदर का किला स्वराज्य की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण और मजबूत किला था , यहाँ के पूर्व किलेदार निलकंठराव सरनाईक के शहाजी राजा से अच्छे संबंध थे । उनकी मृत्यु के पश्चात् उनके तीन पुत्र पिलाजीराव , निलाजीराव और संकाजीराव उत्तराधिकार के लिए लड़ पड़े और उत्तराधिकार के लिए जब निजाम के पास जाने कि बातें सुनाई दी , तब शिवाजी ने किला अपने कब्जे ले लिया ।

🚩चाकण किले के वरिष्ठ किलेदार फिरंगोजी नरसाला एक निपुण योद्धा थे , शिवाजी ने उनसे भेंट की और स्वराज्य में शामिल होने की समझाइश दी । ऐसे चाकण भी स्वराज्य में शामिल हुआ ।

🚩"तेरह वर्षों की कालावधि में छत्रपति शिवाजी ने मावल क्षेत्र में पूर्ण राज्य स्थापित किया ।" 

✍️ #जय_भवानी 🙏🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
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