प्राचीन मेक्सिको की माया सभ्यता
#मैक्सिको
श्री चमनलाल कृत "हिन्दू अमरीका" पुस्तक में मय सभ्यता तथा भारतीय सभ्यता की पारस्परिक निकटस्थ समानताएं वर्णित हैं । स्वयं ' मय ' शब्द ही भारतीय हैं ।
मैक्सिको में श्री गणेश जी तथा सूर्यदेव की प्रतिमाएं प्राप्त हुई हैं । मैक्सिको वासियों के पारम्परिक गीतों में अपनी नव - विवाहिता कन्या को वर - पक्ष के घर भेजते समय मां द्वारा प्रकट किए गये उद्गार भारतीय विचारों के अत्यधिक समरूप हैं ।
मुखाकृति की दृष्टि से प्राचीन मैक्सिको के लोग उसी जाति के प्रतीत होते हैं जिस जाति के भारत के उत्तर - पूर्वी क्षेत्र के निवासी हैं ।
प्राचीन भारतीय शब्दावली में , अमरीकी महाद्वीपों वाला पश्चिमी गोलार्द्ध पाताल कहलाता था । यह हो सकता है कि कि वाली को पाताल क्षेत्र की ओर खदेड़ने का सन्दर्भ ऐतिहासिक रूप में उसकी पराजय तथा बाली द्वीप पर बने द्वीपस्थ दुर्ग से हटकर सुदूर मैक्सिको में जा बसने का द्योतक हो ।
भारत के पश्चिम में स्थित देशों का इस प्रकार सर्वेक्षण करने और उन पर भारतीय संस्कृति तथा राजनीतिक प्रभावों की छानबीन कर लेने के पश्चात् हम नये नये कालजयी सनातन रत्नों से परिचित होंगे....
कौन जाने और कल कोई नया साक्ष्य समक्ष आ जाए....
हमने इस लेख में रामायण काल की तथा मय सभ्यता और तत्कालीन संस्कृति का विस्तार से विवेचन नहीं किया है... फिर भी इस प्रकार यह सिध्द हो जाता है कि कैसे मय सभ्यता आर्यावर्त से वर्तमान मैक्सिको का अतित थीं....
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें