अम्लता या अॅसीडीटी पर लार चिकित्सा

#अम्लता_या_अॅसीडीटी_पर_लार_चिकित्सा :


अत्यधिक मसालेदार भोजन , गरिष्ठ भोजन , सिगरेट , तम्बाकू , शराब , ज्यादा खाना , बिल्कुल न खाना आदि कारणों से सामान्यतया एसिडिटी हो जाती है । एसिडिटी के और भी कई कारण हैं । साथ ही उसके कई इलाज भी हैं । जैसे धूमपान न करें , शराबन पिएं , समय पर संतुलित भोजन करें इत्यादि । भोजन के पाचन से बनने वाले अम्ल सीने और गले में प्रवेश करने पर जलन उत्पन्न करते हैं - यही एसिडिटी है । पेट व सीने में जलन व खट्टी डकारें इसके लक्षणों में प्रमुख हैं । हिचकी आना , मिचली व उबकाई आना आदि भी इसके कारण होते हैं ।

▪️इसके लिए कुछ घरेलू नुस्खे प्रयोग किए जा सकते हैं  :-

 ( 1 ) खाली पेट रहने से एसिडिटी हुई है केला लेने से इसमें मौजूद पोटेशियम अम्ल उत्पादनको रोकता है ।

 ( 2 ) तुलसी की पत्तियां चबाने से अम्ल प्रभाव कम होता है ।

( 3 ) ठंडा दूध लेने से अधिक केल्शियम कारण अम्ल ठीक होता है ।

( 4 ) जीरा चबाकर खाने से यह पाचन में मदद करता है व जलन कम करता है ।

( 5 ) इलायची भी तुलसी व जीरे के समान कार्य करती है ।
( 6 ) पुदीना की पत्तियां चबाने पर शीतलता उत्पन्न हो एसिडिटीखत्म होती है ।

( 7 ) अजवायन के कुछ दाने मुंह में रखकर चूसने से भी लाभ होता है ।

▪️यदि उपरोक्त सभी घरेलू वस्तुएं उपलब्ध हो तो यह विचारणीय है । इन सभी वस्तुओं सेवन के समय एक चीज इन सबके साथ हमारे पेट में जाती है वह है हमारे मुंह में उपस्थित लार बस यदि ये वस्तुएं न मिले तो आप लार चिकित्सा करें । लार ग्रंथियों से #पोटेशियम एवं #बाइकार्बोनेट_आयन भी स्वावित होते हैं । भोजन की सुगंध से इसकी मात्रा में बदलाव होता है ।

▪️इसमें पानी , श्लेष्मा , प्रोटीन , खनिज तथा एमायलेज आदि एन्जाइम्स पाये जाते हैं ।

▪️ लार में उपस्थित पानी अम्लता में कमी लाता है ।

▪️ श्लेष्मा भीतरी कोशिकाओं की अम्लसे रक्षा करता है । पोटेशियम अम्ल को उदासीन करता है ।

▪️ एमायलेजएन्जाइम्स भोजनको पचाने मदद करते हैं । ये अनेक क्रियाओं को आरंभ करने और नियंत्रित करने का कार्य भी करते हैं ।

🔸 उपचार विधि :-

 #लार_चिकित्सा की उपचार विधि बड़ी आसान है । इसमें लक्षण पता चलते ही अर्थात जलन शुरू होते ही मुंह में लार एकत्रित करके निगलना शुरू कर देना चाहिए । इसमें दूसरी तीसरी बार निगलते आराम मिलना शुरू हो जाता है और बार - बार यही क्रिया दोहराने से पूर्ण लाभ होता है । अगर लक्षण पुन : प्रकट हों तो फिर से यही क्रियादोहराना चाहिए । यह प्रयोग कई मित्रों पर आजमाया गया और उन्हें लाभ भी हुआ । खासकर तब जब अन्य कोई औषधि न हो तो डूबते के लिए तिनके का सहारा जैसा सिद्ध हुआ है ।

इस प्रकार हमारे आयुर्वेद के आचार्यों ने बिना औषधि के लार का वैज्ञानिक महत्व समजकर पहले ही इससे अम्लता की चिकित्सा हेतु उपयोग बताया हुआ है, यह कोई कम महत्वपूर्ण नहीं है।

#विचार_प्रसार 🚩🚩🚩🚩🚩
✍️जय मां भारती 🇮🇳🇮🇳🙏🙏

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