आइंस्टीन ने यह क्यों कहा कि अगर चतुर्थ विश्व युद्ध होता है तो लोग लाठी और पत्थरों से लड़ेंगे?
कारण साफ है कि तृतीय विश्व युद्ध से मानव सभ्यता जो आज विकसित है नष्ट हो जाएगी... मानवीय विज्ञान और अस्त्र आदि सबकुछ नष्ट हो जाएगा। जब विनाश से विद्यायें नष्ट हो जाएंगी तो मनुष्य फिर से शुन्य अविष्कार पर उतर आएगा। जैसे महाभारत के युद्ध के बाद आज हमारे वैदिक सनातन धर्म और संस्कृति तथा विज्ञान की जो स्थिति हुई है... अतः चौथा विश्व युद्ध होगा तो निश्चित ही पत्थरों से लढा जाएगा यही अनुमान आइंस्टाइन का था...
इस प्रकार से हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि महाभारत विश्व युद्ध से हमारी सभ्यता का ज्ञान और विज्ञान सबकुछ नष्ट हो गया। इतिहास जला दिया गया और इसी प्रकार इस सृष्टि में सभ्यताअों का, विज्ञान का सृजन विकास और विनाश होता रहता है इसलिए ज्ञानियों ने इस संसार को स्वप्नवत कहा है। केवल परम तत्व का ज्ञान ही शाश्वत है।
कृतयुग में मानव जाति के निर्माण से महाभारतीय युद्ध ( अनुमानतः ईसवी सन् पूर्व ५५६१ वां वर्ष ) तक विश्व के हर प्रदेश में वैदिक सभ्यता ही थी । उस युद्ध में हुए भीषण संहार के कारण वैदिक विश्व - साम्राज्य छिन्न भिन्न हो गया । आगे चलकर उसके खण्डराज्य सुरीय ( Syria ) , असूरीय ( Assyria ) , मेसोपोटेमिया ( महिषीपट्टनीय ) , बॅबिलोनिया ( बाहुबलिनीय ) आदि कहलाने लगे । वैदिक चातुर्वर्णाश्रमी समाज - जीवन भंग होकर रह गया । ऋषि मुनियों के आश्रम नष्ट हो गए । संस्कृत शिक्षा प्रणाली टूट - फूटकर उसी के भ्रष्ट उच्चारों से विविध प्राकृत प्रादेशिक भाषाएँ बनती चली गई । वेद , उपनिषद् , रामायण , महाभारतवाली सुसूत्र सामाजिक जीवन प्रणाली भंग होकर आस्तिक से नास्तिक तक , तथा विविध देव - देवताओं को प्रधानता देनेवाले अनेक पंथ , उपपंथों में जनता बट गई ।
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