महान बलिदानी राणी कलावती और आर्य क्षत्राणीयांँ

"जब इस्लामी आक्रांता अल्लाउद्दिन खिलजी बादशाह बना तत्पश्चात् ' जयसलमेर ' दुर्ग पर जेहाद तथा स्त्रियों के लिए चढाई की ... तब १६,००० हजार हिन्दू नारीयों ने अपने आर्य गौरव तथा शील की रक्षार्थ जौहर का बलिदान किया ।¶" 

#अलाउद्दीन_खिलजी के सेनापति ने दक्षिण भारत पर विजय प्राप्त करने से पूर्व रास्ते में एक छोटे - से राज्य के राजा कर्णसिंह को अधीनता स्वीकार करने का प्रस्ताव भेजा । बिना युद्ध किये राजपूत पराजय स्वीकार कर ले , यह सम्भव नहीं , अतः कर्णसिंह यवनो से संघर्ष करने को तैयार हुआ । अन्तःपुर में अपनी रानी से जब वह विदा लेने गया तो उसकी रानी कलावती ने युद्ध में साथ चलने का निवेदन करते हुए कहा-



 " स्वामी ! मैं आपकी जीवनसगिनी हूं , मुझे सदा संग रहने का अवसर प्रदान कीजिए । सिंहनी के आघात अपने वनराज से दुर्बल भले हों पर शृगालों के संहार हेतु तो पर्याप्त हैं । "

कर्णसिंह ने अपनी वीर पत्नी की भावनामों को समझते हुए उसे साथ चलने की अनुमति दे दी । छोटी - सी सेना के साथ विशाल सेना का मुकाबला था ।

रानी कलावती स्वयं शस्त्र - संचालन में प्रवीण थी । अपने पति की पार्श्व रक्षा करती हुई शत्रु - संहार कर रही थी । इधर स्वाधीनता की रक्षा करने वाले वीर राजपूत मृत्यु का वरण करने को उत्सुक थे और उधर उनके सामने ये वेतन भोगी यवन सैनिक । घमासान युद्ध हो रहा था , इतने में एक आघात कर्णसिंह पर लगा जिससे वह बेहोश हो गया । कलावती ने दोनों हाथों से शस्त्र संचालन कर पति के आसपास स्थित सारे शत्रुनों का सफाया कर दिया । युद्ध उत्साही राजपूतों के सामने शत्रु - सेना परास्त हुई । विजय हासिल कर कलावती अपने घायल पति को लेकर वापिस लौटी ।

राज वैद्य ने परीक्षण कर बताया कि विषले शस्त्र से आहत होने के कारण राजा कर्णसिंह बेहोश हुआ है , उसके विष को चूसने के सिवाय और कोई उपाय नही है ।

विष चूसने वाले के जीवित बचने की संभावना कम थी क्योकि शत्रु द्वारा प्रयुक्त जहर बहुत विषैला था । इससे पहले कि विष चूसने वाले की खोज की जाय , उसे ढूंढ़ने का प्रयास किया जाय , रानी ने स्वयं उस मारक विष को चूस डाला ।

विष चूसने की विधि में कलावती निपुण नहीं थी फिर भी पति के प्राणों की रक्षार्थ उसने अविलम्ब यह कार्य किया । राजा कर्णसिंह की बेहोशी टूटी और उसने अपने नेत्र खोले तो उसे समीप ही पड़ी प्रेमप्रतिमा की मृत देह नजर पायी । अपने प्राणोत्सर्ग कर पति की रक्षा करने वाली कलावती का त्याग अविस्मरणीय है ।

धन्य हो आर्य वीरांगणाएँ

धन्य वीर भोग्या वसुंधरा 

जय सनातन धर्म 🚩 🚩 🚩 🚩

✍️ जय मां भारती 🙏🙏🙏🙏🙏🙏


¶Ref : - ' Islam ka khuni itihaas ' . Ganapati ray agrawal . Aary sahitya mandal Limited . Ajmer . 1941 CE . ( chap . 47.P. 100-101 ) .

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