कालगत रोगो का कारण दैव...
कालगत रोगो का कारण दैव...
तथा कर्मफल भोग अनिवार्य।( च.शा. 1/116.117 )
आयुर्वेद के अनुसार, पूर्वजन्म के देह से किया गया कर्म अर्थात 'दैव' भी रोग का एक कारण होता है।
कर्मफल भोग अनिवार्य है।
लघु कर्मफल तो प्रायश्चित आदि द्वारा शान्त हो जाते हैं
परंतु बड़े कर्मों का फल इतना प्रभावी होता है कि वह चिकित्सा द्वारा भी शान्त नहीं होता वरन भोगना ही पड़ता है।
"अमेरिका के जौन हापकिन्स कैंसर सैन्टर के
वैज्ञानिकों द्वारा दुनिया के 69 देशों के लगभग
4.8 बिलियन मानवों अर्थात दुनिया की आधी
से भी ज्यादा आबादी पर रिसर्च के
परिणामस्वरूप यह तथ्य सामने आया
कि कैंसर भाग्य का परिणाम है।"
(साइंस जरनल में 24 मार्च
2017 को छपा लेख)
कर्मफल विधान व पूर्वजन्म अकाट्य वैज्ञानिक सत्य है। जो सनातन व्यवस्था हमे वैदिक ऋषि मुनियों ने बतायी वो शाश्वत सत्य है सदैव सनातन अर्थात् नवीन है। परम सत्य है।
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