महाराणा प्रताप के दरबारी पं. चक्रपाणि मिश्र: ज्ञान विज्ञान के एक विस्मृत एक अपरिचित एतिहासिक पात्र......
महाराणा प्रताप के दरबारी पं. चक्रपाणि मिश्र: ज्ञान विज्ञान के एक विस्मृत एक अपरिचित एतिहासिक पात्र...... महाराणा प्रताप के दरबार में चक्रपाणि मिश्र एक दरबारी-पंडित थे, साथ ही महाराणा प्रताप के बाल मित्र भी थें। वह उस समय के एक वास्तुकार और प्रसिद्ध वनस्पति विज्ञानी, कृषि विज्ञानी थे। उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में विश्ववल्लभ, मुहूर्तमाला, राज्याभिषेक पद्यति आदि शामिल हैं। उन्होंने जल संसाधनों के विकास पर जोर दिया। वे तत्कालीन युध्द कला में भी थोड़े अवगत थे किंतु उनका अधिकार क्षेत्र ज्ञान विज्ञान की विभिन्न शाखाएं थी जिसका वे एक जीवीत कोष थें। मेवाड़ के लिए ग्रंथ रचना करने का प्रेरित आदेश स्वयं महाराणा प्रताप ने ही उन्हें कार्यभार के रूप में सौंपा था ताकि उनके राज्य में अच्छी शिक्षा, ज्ञान, साहित्य तथा कला- सुत्र, का समतोल तंत्र विकसित हो सकें। 'चक्रपाणि मिश्र’ ने कई ग्रंथ रचे किंतु मुख्यतः चार ग्रंथों की रचना की थी। उनके ग्रंथों के नाम इस प्रकार हैं... (१) #विश्व_वल्लभ (२) #मुहूर्त_माला (३) #व्यवहार_दर्श (४) #राज्याभिषेक_पद्धति ‘चक्रपाणि मिश्र’ एक उच्च कोटि के विद्वान थे। उन्होंने...

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