गर्लफ्रेंड अर्थात् रखैल या रांड...
धर्मपत्नी = ब्रह्मचर्याश्रम पश्चात विवाह संस्कार द्वारा गृहस्थाश्रम मे स्वयंवर, ब्राह्म आदि प्रकार से कुलाङ्गना के रूप में प्रतिष्ठित होती हुई गृहलक्ष्मी कहलाती है। वह अर्धांगिनी है सती व्रति व तदनुसार आदरनीय मनोरमा है। वह श्रीमती वा देवी कहलाती है।
(रखैल = gf) : यह वाराङणा व्यभिचारोत्पन्न अवधारणा है। कामपिपासा-परिणाममयी राक्षसी स्वरूप है। हिंदी में इसे रखैल व व्यवहारिक अंग्रेजी शब्द मे gf (Girlfriend) कहते हैं। यहां प्रेम नही वासना काम करती है। मराठी प्रमाण भाषा में रांड शब्द से प्रयुक्त होती हुई वेश्या बहुभोग्या आदि इसकी समानार्थी संद्याए है। यह पाश्चात्य असभ्यता की अवधारणा है जिसमे ये बारम्बार बदलती रहती है, जैसे वस्त्र बदले जाते हैं।
प्रेयसी / प्रेमिका : यह विवाह के लिए पसंद की जाती है, लेकिन विवाह पूर्व इससे संसर्ग नही हो व गंधर्व विवाह इससंदर्भ मे अधिक संबंद्ध हो तो आश्चर्य नहीं, अपितु प्रेमिका संद्या ही गंधर्व विवाह का पर्यायवाची कह सकते हैं, यह विवाह ही इसका प्रादुर्भाव है, लेकिन ये शिघ्र भार्या बनती हुई कुलाङ्गना होती है। ऐसा न होवे तो उपरोक्त रखैल ही समझे। रखैल व इसमे यही अंतर है। आदर्श प्रेयसी वही है जिसका प्रेम पवित्र हो। जो एकबार एक को चाहे व विवाह भी उसी से हो, विवाह पश्चात् ही रति विद्या प्रयुक्त हो, तो प्रेमिका मे कोई दोष नहीं। वो सम्माननीय है।
सत्य प्रेमिकाएं वा गंधर्व विवाहिताएं भी सती व साध्वी हो यह स्वाभाविक बात है, संभाव्य है।
रखैल को प्रेमिका नही कहाँ जा सकता। आजकल रखैले ही रखैले है। अस्तु
सार यही की सबसे उत्तम "ब्रह्मचर्येण कन्या युवानं विन्दते पतिम्" ही चरितार्थ करना आदर्श है।

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