पुनर्जन्म वैज्ञानिक सत्य है...

सोम जीनिन्स ( 𝙎𝙤𝙖𝙢𝙚 𝙅𝙚𝙣𝙮𝙣𝙨 ) ने

पुनर्जन्म पर पुस्तक लिखी है । इसमें निम्न

वाक्य ध्यान योग्य है :

❝ 𝕿𝖍𝖆𝖙 𝖒𝖆𝖓𝖐𝖎𝖓𝖉 𝖑𝖍𝖆𝖘 𝖊𝖝𝖎𝖘𝖙𝖊𝖉 𝖎𝖓 𝖘𝖔𝖒𝖊

    𝖘𝖙𝖆𝖙𝖊 𝖕𝖗𝖊𝖛𝖎𝖔𝖚𝖘 𝖙𝖔 𝖙𝖍𝖊 𝖕𝖗𝖊𝖘𝖊𝖓𝖙 𝖜𝖆𝖘 𝖙𝖍𝖊

    𝖔𝖕𝖎𝖓𝖎𝖔𝖓 𝖔𝖋 𝖙𝖍𝖊 𝖜𝖎𝖘𝖊𝖘𝖙 𝖘𝖆𝖌𝖊𝖘 𝖔𝖋 𝖙𝖍𝖊

    𝖒𝖔𝖘𝖙 𝖗𝖊𝖒𝖔𝖙𝖊 𝖆𝖓𝖙𝖎𝖖𝖚𝖎𝖙𝖞 . 𝕴𝖙 𝖜𝖆𝖘 𝖍𝖊𝖑𝖉

    𝖇𝖞 𝖙𝖍𝖊 𝕲𝖞𝖒𝖓𝖔𝖘𝖔𝖕𝖍𝖎𝖘𝖙𝖘 𝖔𝖋 𝕰𝖌𝖞𝖕𝖙 , 𝖙𝖍𝖊

    𝕭𝖗𝖆𝖍𝖒𝖆𝖓𝖘 𝖔𝖋 𝕴𝖓𝖉𝖎𝖆 , 𝖙𝖍𝖊 𝕸𝖆𝖌𝖎 𝖔𝖋

    𝕻𝖊𝖗𝖘𝖎𝖓 , 𝖆𝖓𝖉 𝖙𝖍𝖊 𝖌𝖗𝖊𝖆𝖙𝖊𝖘𝖙 𝖕𝖍𝖎𝖑𝖔𝖘𝖔𝖕𝖍𝖊𝖗𝖘

    𝖔𝖋 𝕲𝖗𝖊𝖊𝖈𝖊 𝖆𝖓𝖉 𝕽𝖔𝖒𝖊 ; 𝖎𝖙 𝖜𝖆𝖘 𝖑𝖎𝖐𝖜𝖎𝖘𝖊

    𝖆𝖉𝖔𝖕𝖙𝖊𝖉 𝖇𝖞 𝖙𝖍𝖊 𝖋𝖆𝖙𝖍𝖊𝖗𝖘 𝖔𝖋 𝖙𝖍𝖊 𝕮𝖍𝖗𝖎𝖘𝖙𝖎𝖆𝖓

    𝕮𝖍𝖚𝖗𝖈𝖍 , 𝖆𝖓𝖉 𝖋𝖗𝖊𝖖𝖚𝖊𝖓𝖙𝖑𝖞 𝖊𝖓𝖋𝖔𝖗𝖊 𝖊𝖉 𝖇𝖞

    𝖍𝖊𝖗 𝖕𝖗𝖎𝖒𝖎𝖙𝖎𝖛𝖊 𝖜𝖗𝖎𝖙𝖊𝖗𝖘 . 𝖂𝖍𝖞 𝖎𝖙 𝖍𝖆𝖘

    𝖇𝖊𝖊𝖓 𝖘𝖔 𝖑𝖎𝖙𝖙𝖑𝖊 𝖓𝖔𝖙𝖎𝖈𝖊𝖉 , 𝖘𝖔 𝖔𝖛𝖊𝖗𝖑𝖔𝖔𝖐𝖊𝖉

    𝖗𝖆𝖙𝖍𝖊𝖗 𝖙𝖍𝖆𝖓 𝖗𝖊𝖏𝖊𝖈𝖙𝖊𝖉 , 𝖇𝖞 𝖙𝖍𝖊 𝖉𝖎𝖛𝖎𝖓𝖊𝖘 𝖆𝖓𝖉

    𝖒𝖊𝖙𝖆𝖕𝖍𝖞𝖘𝖎𝖈𝖎𝖆𝖓𝖘 𝖔𝖋 𝖑𝖆𝖙𝖊𝖗 𝖆𝖌𝖊𝖘 , 𝕴 𝖆𝖒 𝖆𝖙

    𝖆 𝖑𝖔𝖘𝖘 𝖙𝖔 𝖆𝖈𝖈𝖔𝖚𝖓𝖙 𝖋𝖔𝖗 , 𝖆𝖘 𝖎𝖙 𝖎𝖘

    𝖚𝖓𝖉𝖔𝖚𝖇𝖙𝖊𝖉𝖑𝖞 𝖈𝖔𝖓𝖋𝖎𝖗𝖚𝖓𝖊𝖉 𝖇𝖞 𝖗𝖊𝖆𝖘𝖔𝖓 ,

    𝖇𝖞 𝖆𝖑𝖑 𝖙𝖍𝖊 𝖆𝖕𝖕𝖊𝖆𝖗𝖆𝖓𝖈𝖊 𝖔𝖋 𝖓𝖆𝖙𝖚𝖗𝖊 ,

    𝖆𝖓𝖉 𝖙𝖍𝖊 𝖉𝖔𝖈𝖙𝖗𝖎𝖓𝖊𝖘 𝖔𝖋 𝖗𝖊𝖛𝖊𝖑𝖆𝖙𝖎𝖔𝖓 . ❞

अर्थात्

❝ प्राचीन कालके बड़े - बड़े विद्वान् मानते थे

    कि मनुष्य इस जन्म से पहले भी किसी हालत

    में विद्यमान था । मिस्र के दिगम्बर तपस्वी ,

    भारतवर्ष के ब्राह्मण , फ़ारस के मैजाई और

    यूनान और रोम के बड़े-से-बड़े दार्शनिक

    इस सिद्धान्तको मानते थे । इसके अतिरिक्त

    ईसाई गुरु और ईसाई लेखक भी इसमें

    विश्वास रखते थे । अर्थाचीन काल में

    धार्मिक और दार्शनिक व्यक्तियों ने

    इसकी ओर इतना कम ध्यान क्यों दिया ,

    यह मेरी समझ में नहीं जाता ,

    क्योंकि युक्ति से , प्राकृतिक घटनाओं से

    और ईश्वरीय ज्ञान से निःसन्देह

    इस सिद्धान्तकी पुष्टि होती है । ❞

फ्रांस के प्रसिद्ध वैज्ञानिक और दर्शनवेत्ता

फ़्लैमेरियनने आत्मा और उसके मृत्युके पश्चात्

जन्म के सम्बन्ध में आधी सदी से अधिक

वैज्ञानिक अनुसन्धान किया है ।

उसके कुछ शब्द निम्नलिखित हैं - - -

 ❛ 𝑬𝒕𝒆𝒓𝒏𝒂𝒍 𝒍𝒊𝒇𝒆 𝒄𝒂𝒏 𝒃𝒆 𝒖𝒏𝒅𝒆𝒓𝒔𝒕𝒐𝒐𝒅 𝒐𝒏𝒍𝒚 𝒂𝒄𝒄𝒐𝒓𝒅𝒊𝒏𝒈 𝒕𝒐 𝒕𝒉𝒆 𝒑𝒓𝒊𝒏𝒄𝒊𝒑𝒍𝒆 𝒐𝒇 𝒓𝒆𝒏𝒊𝒆𝒊𝒓𝒏𝒂𝒕𝒊𝒐𝒏 𝒍𝒂𝒊𝒅 𝒅𝒐𝒘𝒏 𝒃𝒚 𝑷𝒚𝒕𝒉𝒂 𝒈𝒐𝒓𝒂𝒔 , 𝑶𝒓𝒊𝒈𝒆𝒏 . 𝑮𝒆𝒂𝒏 𝑹𝒆𝒚𝒏𝒂𝒏𝒅 , 𝒂𝒏𝒅 𝒔𝒐 𝒎𝒂𝒏𝒚 𝒐𝒕𝒉𝒆𝒓 𝒑𝒉𝒊𝒍𝒐𝒔𝒐𝒑𝒉𝒆𝒓𝒔 ... 𝑻𝒉𝒆 𝒅𝒐𝒄𝒕𝒓𝒊𝒏𝒆 𝒐𝒇 𝒓𝒆𝒊𝒏𝒄𝒂𝒓𝒏𝒂𝒕𝒊𝒐𝒏 𝒊𝒔 𝒕𝒉𝒆 𝒐𝒏𝒍𝒚 𝒐𝒏𝒆 𝒘𝒉𝒊𝒄𝒉 𝒓𝒆𝒎𝒂𝒊𝒏𝒔 𝒂𝒅𝒎𝒊𝒔𝒔𝒊𝒃𝒍𝒆 𝒂𝒇𝒕𝒆𝒓 𝒘𝒆 𝒉𝒂𝒗𝒆 𝒑𝒐𝒏𝒅𝒆𝒓𝒆𝒅 𝒂𝒍𝒍 𝒎𝒆𝒕𝒂𝒑𝒉𝒚𝒔𝒊𝒄𝒂𝒍 𝒄𝒐𝒏𝒔𝒊𝒅𝒆𝒓𝒂𝒕𝒊𝒐𝒏𝒔 , 𝒂𝒏𝒅 𝒊𝒕 𝒊𝒔 𝒕𝒉𝒆 𝒐𝒍𝒅𝒆𝒔𝒕 𝒐𝒇 𝒅𝒆𝒇𝒊𝒏𝒊𝒕𝒆 𝒓𝒆𝒍𝒊𝒈𝒊𝒐𝒖𝒔 𝒃𝒆𝒍𝒊𝒆𝒇𝒔 . 𝑻𝒉𝒆𝒓𝒆 𝒎𝒖𝒔𝒕 𝒃𝒆 𝒃𝒐𝒕𝒉 𝒂 𝒑𝒓𝒆𝒗𝒊𝒐𝒖𝒔 𝒆𝒙𝒊𝒔𝒕𝒆𝒏𝒄𝒆 𝒂𝒏𝒅 𝒂𝒏 𝒂𝒇𝒕𝒆𝒓 𝒍𝒊𝒇𝒆 ..........

𝑶𝒖𝒓 𝒍𝒊𝒇𝒆 𝒂𝒇𝒕𝒆𝒓 𝒅𝒆𝒂𝒕𝒉 𝒘𝒊𝒍𝒍 𝒗𝒂𝒓𝒚 𝒂𝒄𝒄𝒐𝒓𝒅𝒊𝒏𝒈 𝒕𝒐 𝒐𝒖𝒓 𝒑𝒓𝒆𝒑𝒂𝒓𝒂𝒕𝒊𝒐𝒏𝒔 𝒇𝒐𝒓 𝒊𝒕 . 𝑾𝒆 𝒂𝒓𝒆 𝒘𝒉𝒂𝒕 𝒘𝒆 𝒎𝒂𝒌𝒆 𝒐𝒖𝒓𝒔𝒆𝒍 𝒗𝒆𝒔 . 𝑻𝒉𝒆 𝑻𝒉𝒆𝒐𝒔𝒐𝒑𝒉𝒊𝒔𝒕'𝒔 𝑲𝒂𝒓𝒎𝒂 𝒊𝒔 𝒓𝒆𝒂𝒍 ❜( 𝑭𝒍𝒂𝒎𝒏𝒂𝒓𝒊𝒐𝒏'𝒔 𝑫𝒆𝒂𝒕𝒉 𝒂𝒏𝒅 𝒊𝒕𝒔 𝑴𝒚𝒔𝒕𝒆𝒓𝒚 ( 𝒊𝒊𝒊 ) 𝑽𝒐𝒍 . 𝑷𝒂𝒈𝒆 338. ) 


💥 संक्षेप से इस उद्धरण का अभिप्राय यह है कि :-


   ❛ नित्य जीवन समझमें नहीं सकता जब तक

      कि पुनर्जन्म को न माना जाए । सब दार्शनिक

      बातों पर विचार किया जाए तो केवल पुनर्जन्म

      का सिद्धान्त ही मानने योग्य रह जाता है । ❜


💥 इस प्रसिद्ध वैज्ञानिक की कुछ युक्तियां

      नमूने के लिखते हैं जो इसने पुनर्जन्म के पक्ष में दी है :


  “ पुनर्जन्म के पक्ष में बड़ी युक्ति यह है कि लोग जन्म से ही

     एक जैसे नहीं होते । बचपन से ही बुद्धि विद्याओं और

     कला प्रवृत्ति तथा रुचि की विभिन्नता होती है । इसका

     कारण न तो मां बाप और न परिस्थितियां ही हो सकती हैं

     । एक और युक्ति यह है कि कई लोगों को इस जन्म में

     पहली बार होने वाले अनुभवों दृश्यों और शब्दों आदि

     के विषय में ऐसा मालूम होता है कि इनको पहले भी

     देखा या सुना हुआ है । इसका कारण पुनर्जन्म के

     अतिरिक्त कुछ नहीं हो सकता । प्रत्येक मनुष्य की

     जन्म से ही कुछ विशेषताएं होती हैं , इनका कारण मां

     बाप नहीं हो सकते । मैं एक खान्दान को जानता हूँ

     जिसमें एक ही मां बापके पाँच लड़के हैं जो आपस में

     इतने भिन्न हैं मानो वे अलग - अलग जातियों के हों ।

     इस प्रकारके हजारों दृष्टान्त दिये जा सकते हैं । मेरे

     एक मित्र की पत्नी है जो हमेशा खुश रहनेवाली है ,

     लेकिन उसके स्वप्न इतने दुःखभरे होते हैं कि प्रायः वह

     रो पड़ती है । हमारे शौक़ व मज़ाक़ पर , प्रेम और घृणा

     पर , स्वप्न व अंतर्दृष्टि ( Intuition ) पर, पूर्वजन्म की

     स्मृति का असर होता है , जो हमारी उपचेतना

     ( Subconscious self ) अथवा स्मृतिकी गहराइयों

     में विद्यमान होती है । हमारे अन्दर स्मृतिकी दो धाराएं

     होती हैं जो प्राय : मिली हुई होती हैं , लेकिन

     कभी - कभी अलग भी हो जाती हैं । यदि प्रश्न किया

     जाए कि हमें पूर्वजन्म की स्मृति क्यों नहीं होती तो

     इसका उत्तर यह है कि इस जन्म में भी हमें सब

     घटनाओं के हज़ार वें हिस्से की स्मृति भी शेष

     नहीं रहती । इसके अतिरिक्त उपचेतना में पूर्वजन्मों

     की स्मृति होती भी है | असाधारण योग्यता के व्यक्ति

     पुनर्जन्म का एक और प्रमाण हैं । "

उपर्युक्त उद्धरणों से स्पष्ट है कि आधुनिक युग के

असभ्य पाश्चात्य जगत् में भी पुनर्जन्म , दर्शन के

सर्वश्रेष्ठ सिद्धान्तों में से एक माना जाता है ,

उच्चतम बुद्धि के विद्वानों में से कई इसमें विश्वास

रखते हैं और बहुत से जो इसे स्वीकार नहीं करते ,

इसे एक मान्य सिद्धान्त अवश्य समझते हैं और

उनमें से कई तो कहते हैं कि यदि आत्मा और

नित्य जीवन आदि के सम्बन्ध में कोई सिद्धान्त

मानना हो तो पुनर्जन्म ही एक सिद्धान्त है

जो माना जा सकता है ।

     ((#पुनर्जन्म #rebirth #विज्ञान #दर्शन #धर्म))

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