Humun Female egg decide sex of child...
मणुष्य में लिंग निर्धारण का वैज्ञानिक विश्लेषण...
भारत के शरिरशास्त्र , जीवशास्त्र ( BIO ) आदि के पाठ्यक्रम में XX & XY Chromosomes के crossing के माध्यम से बढाया जाता है sex determination हमेशा पुरूष ( male ) पर निर्भर है ... ऐसा लिखने के पिछे का दृष्टिकोण ये हो सकता है कि पुरूष मे दोनो संभावनाएं हैं और स्त्री मे एक ही.. इसलिए तय तो पुरुष के गुणसूत्र से होगा लेकिन भलेही ऐसा हो फिर भी लिंग का निर्धारण तो स्त्री ही से होता है। यह भी ध्यान दिया जाए कि XX गुणसूत्र युक्त फिमेल का egg ही उन (sperm /chromosomes) का चुनाव करने का, उन्हे ग्रहण करने का निर्णय लेता है, ये वर्तमान वैज्ञानिक शोध में सिद्ध हो चुका है और सन 1917 मे ही डावसन ने इसकी पुष्टि कर दी थी। इसलिये ये कहना बिल्कुल निराधार अवैज्ञानिक व असत्य है । संक्षेप में जानिये...
वैसे हर बोर्ड मे ऐसे नही पढाया जाता। कयी राज्यों के पाठ्यपुस्तक में sex determination of child depends upon male पढाया जाता है । उनमे महाराष्ट्र बोर्ड भी शामिल है व संभवतः ncert आदि।
⦿ एक ̠D̠̠i̠̠g̠̠e̠̠s̠̠t̠ का संदर्भ लेते हैं -
((Self-Help to ICSE Biology 10
FOR 2022 EXAMINATIONS
By Priya Minhas, Sister Maria)) पृ. 36 -
Q.3 . Does the sex of the child depend on the father or it is just a matter of chance . Discuss .
Ans . No , the sex of the child does not depend on parents it is just a matter of chance . Sex of the child depends upon the kind of sperm that fertilises the egg . The egg contains only one X chromosome , but half of the sperms released into the female are X - bearing and remaining half are Y - bearing . It is simply a matter of chance as to which category of sperm fuses with the ovum . If the egg ( X ) is fused by X - bearing sperm , the resulting combination is XX , i.e. female type and the child produced is female ( Daughter ) . If the egg ( X ) is fused by Y - bearing sperm , the resulting combination is XY , i.e. male constitution and the child produced will be a male ( Son ) .
⦿ महाराष्ट्र बोर्ड की 12 th std. सन 2018 की पाठ्यपुस्तक मे sex determination depends upon the male लिखा मिलता है।
⦿ अमेरिकी चिकित्सक Dawson, Ernest Rumley महाशय सन 1917 में अपनी लंदन से प्रकाशित पुस्तक ' कौज़ेशन ऑफ़ सेक्स ' THE Causation of Sex In Man (One physician's theory regarding what determines the sex of offspring.) में लिखते हैं कि लड़का या लड़की होने में पिता का नहीं परन्तु माता का असर पड़ता है ।
⦿ 1980 के दशक के दौरान, शोधकर्ताओं ने यह समझने के लिए वाई गुणसूत्र के साथ टीडीएफ की खोज की कि इसकी उपस्थिति ने भ्रूण को पुरुषों के रूप में विकसित होने के लिए क्यों प्रेरित किया। 1990 तक यूनाइटेड किंगडम में आणविक जीव विज्ञान का अध्ययन करने वाले एंड्रयू सिंक्लेयर ने वाई गुणसूत्र पर टीडीएफ के स्थान की पहचान नहीं की थी।
⦿ हालांकि आगे इसी पाठ्यक्रम मे ये भी तो पढाया गया है -
█▓▒▒░░░If the egg receives another X chromosome from the sperm, the resulting individual is XX, forms ovaries, and is female; if the egg receives a Y chromosome from the sperm, the individual is XY, forms testes, and is male. The Y chromosome carries a gene that encodes a testis-determining factor.░░░▒▒▓█
((https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK9967/))
💥 ̲S̲̲e̲̲x̲ ̲D̲̲e̲̲t̲̲e̲̲r̲̲m̲̲i̲̲n̲a̲̲t̲̲i̲̲o̲̲n̲ ̲d̲̲e̲̲p̲̲e̲̲n̲̲d̲̲s̲ ̲u̲̲p̲̲o̲̲n̲ ̲f̲̲e̲̲m̲a̲̲l̲̲e̲
➡️ x या y गुणसूत्र का चुनाव, spermatozoa को ग्रहण
करना ये female का egg करता है इसलिए लिंग का
निर्धारण नारी पर निर्भर है न कि पुरूष पर।
➡️ वैज्ञानिक शोध /प्रमाण /संदर्भ आदि :
(१) 𝐃𝐫. 𝐀𝐧𝐚𝐧𝐲𝐚 𝐌𝐚𝐧𝐝𝐚𝐥, 𝐌𝐃 (𝐉𝐮𝐧 11 2020)
कहती हैं -
"𝑻𝒉𝒆 𝒆𝒈𝒈 𝒅𝒆𝒄𝒊𝒅𝒆𝒔 𝒘𝒉𝒊𝒄𝒉 𝒔𝒑𝒆𝒓𝒎 𝒇𝒆𝒓𝒕𝒊𝒍𝒊𝒛𝒆𝒔 𝒊𝒕"
𝑻𝒉𝒆𝒓𝒆 𝒊𝒔 𝒂𝒎𝒑𝒍𝒆 𝒆𝒗𝒊𝒅𝒆𝒏𝒄𝒆 𝒕𝒐 𝒔𝒉𝒐𝒘 𝒕𝒉𝒂𝒕 𝒂𝒔 𝒎𝒊𝒍𝒍𝒊𝒐𝒏𝒔 𝒐𝒇 𝒉𝒖𝒎𝒂𝒏 𝒔𝒑𝒆𝒓𝒎 𝒄𝒆𝒍𝒍𝒔 𝒔𝒘𝒊𝒎 𝒕𝒐𝒘𝒂𝒓𝒅𝒔 𝒂 𝒘𝒂𝒊𝒕𝒊𝒏𝒈 𝒐𝒗𝒖𝒎 𝒐𝒓 𝒆𝒈𝒈, 𝒐𝒏𝒍𝒚 𝒐𝒏𝒆 𝒈𝒆𝒕𝒔 𝒕𝒐 𝒇𝒆𝒓𝒕𝒊𝒍𝒊𝒛𝒆 𝒊𝒕. 𝑵𝒐𝒘, 𝒂 𝒏𝒆𝒘 𝒔𝒕𝒖𝒅𝒚 𝒔𝒉𝒐𝒘𝒔 𝒕𝒉𝒂𝒕 𝒆𝒗𝒆𝒏 𝒕𝒉𝒐𝒖𝒈𝒉 𝒕𝒉𝒆 𝒇𝒂𝒔𝒕𝒆𝒔𝒕 𝒂𝒏𝒅 𝒎𝒐𝒔𝒕 𝒄𝒂𝒑𝒂𝒃𝒍𝒆 𝒔𝒑𝒆𝒓𝒎𝒔 𝒓𝒆𝒂𝒄𝒉 𝒕𝒉𝒆 𝒐𝒗𝒖𝒎 𝒇𝒊𝒓𝒔𝒕, 𝒊𝒕 𝒊𝒔 𝒕𝒉𝒆 𝒆𝒈𝒈 𝒕𝒉𝒂𝒕 𝒉𝒂𝒔 𝒕𝒉𝒆 𝒇𝒊𝒏𝒂𝒍 𝒔𝒂𝒚 𝒐𝒏 𝒘𝒉𝒊𝒄𝒉 𝒔𝒑𝒆𝒓𝒎 𝒇𝒆𝒓𝒕𝒊𝒍𝒊𝒛𝒆𝒔 𝒊𝒕. 𝑻𝒉𝒆 𝒔𝒕𝒖𝒅𝒚 𝒕𝒊𝒕𝒍𝒆𝒅, "𝑪𝒉𝒆𝒎𝒊𝒄𝒂𝒍 𝒔𝒊𝒈𝒏𝒂𝒍𝒔 𝒇𝒓𝒐𝒎 𝒆𝒈𝒈𝒔 𝒇𝒂𝒄𝒊𝒍𝒊𝒕𝒂𝒕𝒆 𝒄𝒓𝒚𝒑𝒕𝒊𝒄 𝒇𝒆𝒎𝒂𝒍𝒆 𝒄𝒉𝒐𝒊𝒄𝒆 𝒊𝒏 𝒉𝒖𝒎𝒂𝒏𝒔," 𝒊𝒔 𝒑𝒖𝒃𝒍𝒊𝒔𝒉𝒆𝒅 𝒊𝒏 𝒕𝒉𝒆 𝒍𝒂𝒕𝒆𝒔𝒕 𝒊𝒔𝒔𝒖𝒆 𝒐𝒇 𝒕𝒉𝒆 𝒋𝒐𝒖𝒓𝒏𝒂𝒍 𝑷𝒓𝒐𝒄𝒆𝒆𝒅𝒊𝒏𝒈𝒔 𝒐𝒇 𝒕𝒉𝒆 𝑹𝒐𝒚𝒂𝒍 𝑺𝒐𝒄𝒊𝒆𝒕𝒚 𝑩. ~ 𝑫𝒓. 𝑨𝒏𝒂𝒏𝒚𝒂 𝑴𝒂𝒏𝒅𝒂𝒍, 𝑴𝑫
((https://www.news-medical.net/news/20200611/The-egg-decides-which-sperm-fertilizes-it.aspx#:~:text=The%20egg%20decides%20which%20sperm%20fertilizes%20it))
अर्थात्
यह दिखाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि चूंकि लाखों मानव शुक्राणु कोशिकाएं प्रतीक्षा कर रहे डिंब या अंडे की ओर तैरती हैं, केवल एक ही इसे निषेचित कर पाता है। अब, एक नए अध्ययन से पता चलता है कि भले ही सबसे तेज़ और सबसे सक्षम शुक्राणु सबसे पहले डिंब तक पहुंचते हैं, लेकिन अंतिम फैसला अंडे का ही होता है कि कौन सा शुक्राणु इसे निषेचित करता है। अध्ययन का शीर्षक है, "अंडों से निकलने वाले रासायनिक संकेत मनुष्यों में गुप्त रूप से मादा चयन की सुविधा प्रदान करते हैं," जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ द रॉयल सोसाइटी बी के नवीनतम अंक में प्रकाशित हुआ है।
इस अध्ययन में मनुष्यों के बीच समान निष्कर्षों को देखा गया।
(https://royalsocietypublishing.org/doi/10.1098/rspb.2020.0805)
(२)"स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी और मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा हुई शोध :
𝐂𝐡𝐞𝐦𝐢𝐜𝐚𝐥 𝐬𝐢𝐠𝐧𝐚𝐥𝐬 𝐟𝐫𝐨𝐦 𝐞𝐠𝐠𝐬 𝐟𝐚𝐜𝐢𝐥𝐢𝐭𝐚𝐭𝐞
𝐜𝐫𝐲𝐩𝐭𝐢𝐜 𝐟𝐞𝐦𝐚𝐥𝐞 𝐜𝐡𝐨𝐢𝐜𝐞 𝐢𝐧 𝐡𝐮𝐦𝐚𝐧𝐬
शोधकर्ता : John L. Fitzpatrick, Charlotte Willis, Alessandro Devigili, Amy Young, Michael Carroll, Helen R. Hunter and Daniel R. Brison
स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी और मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट (एमएफटी) के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक नए अध्ययन से पता चलता है कि अपने साथी को चुनना सेक्स के बाद भी जारी रहता है - मानव अंडे शुक्राणु को "चुन" सकते हैं। "मानव अंडे केमोआट्रैक्टेंट्स नामक रसायन छोड़ते हैं जो शुक्राणु को अनिषेचित अंडों की ओर आकर्षित करते हैं।"
मानव अंडे (female egg), शुक्राणु (male sperm cells) को आकर्षित करने के लिए रासायनिक संकेतों का उपयोग करते हैं। स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी और मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट के नए शोध से पता चलता है कि अंडे शुक्राणु को "चुनने" के लिए इन रासायनिक संकेतों का उपयोग करते हैं।
"स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी और मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा अंडे से कौन से रासायनिक संकेत मनुष्यों में गुप्त महिला चयन की सुविधा प्रदान करते हैं?
इससे ये सिद्ध हो गया है कि egg ही ये निर्णय लेता है कि कौन सा शुक्राणु उसे निषेचित करेगा। वैसे ही कौनसा गुणसूत्र वो ग्रहण करेगा वह भी egg हीका निर्णय है ये दूसरे शब्दो मे कहने की आवश्यकता नहीं।
((https://www.su.se/english/research/human-eggs-prefer-some-men-s-sperm-over-others-research-shows-1.503532))
➡️लेख का निष्कर्ष :
मणुष्य में बच्चे के लिंग का निर्धारण पुरूष पर निर्भर नही वरन् फिमेल पर यानी मानव अंड (female egg) पर निर्भर होता है।

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