सावित्रीबाई फुले को पहली महिला शिक्षिका बताना भ्रामक प्रचार...
सावित्रीबाई फुले को पहली महिला शिक्षिका बताना भ्रामक प्रचार...
सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका नही इसके अनेकों प्रमाण है...लेकिन मै वैदिक कालीन दार्शनिक विदुषीयों ऋषिकाओ का उल्लेख नही करूंगा। न ही मध्यकालीन कन्याशालाओ की "उपाध्याया", "आचार्या" जैसे परिभाषित आधिकारिक पदो से सम्पन्न नारीयां : गणितज्ञ लिलावती या भोजदेव की महारानी लिलादेवी के कन्याशाला का उल्लेख करूंगा । कथित प्रथम महिला शिक्षिका के ही समय पर आते हैं।
श्रीमंत सरफॉजी महाराज भोसले तंजावुर के मराठा राज्य व भोसले राजवंश मे छत्रपति शिवाजी के भाई वेंकोजी के वंशज थे। वे एक अच्छे नेत्र चिकित्सक भी थे, इन्होनें सन 1805 में कन्या विद्यालय प्रारम्भ किया था - नवविद्या कलानिधि शाला । जिसमे महिला शिक्षिकाओं की भी नियुक्ति की थी । जबकि सावित्री बाई फुले का जन्म ही 1831 हुआ था । पाठकगण बताइए सन 1805 पहले आता है या 1831 ??
Dr. S. Vanaja kumari की शोध का संदर्भ निम्नलिखित है :
Serfoji founded a school called Navavidhya Kalanidhi Sala where languages , literature , the sciences , arts and crafts were taught in addition to the Vedas and shastras.⁹ Serfoji maintained close ties with the Danes at Tarangambadi and visited their schools quite often and appreciated their way of functioning . Impressed by it , he tried to implement European methods of teachings and education all over his Empire . He was a supporter of the emancipation of Indian women and revolutionized education by appointing women teachers . Serfojis is also credited with installing a hand press with Devanagari type in 1805 , the first of its kind in South India . He also established a stone type press called " Nava Vidhya Kalanidhi Varnayanthra Sala " .
((Ref. shanlax journals Vol . 3 No. 3 January 2016 ISSN : 2321-788X MAHARAJA SERFOJI II - THE FAMOUS THANJAVUR MARATHA KING Dr. S. Vanajakumari (Associate Professor , Department of History , Sri Meenakshi Govt . College))
इसके अतिरिक्त सन 1829 में Cynthia farrar नाम की मिशनरी महिला द्वारा मुम्बई में एक गर्ल्स मिशनरी स्कूल चलाया जा रहा था तथा 1847 में बंगाल में भी कालीकृष्ण कन्या शाला चल रही थी । इनके भी प्रमाण ही प्रमाण है। विपुल प्रमाण है। लेकिन वामपंथीयो ने भारत की समृद्ध इतिहास परंपरा पर कालिख पोतने ये असत्य प्रचार करवा दिया है कि भारत में पहली महिला शिक्षिका उनके द्वारा प्रशस्त एज्युकेशन की शिक्षिका ईसाई मिशनरी फुले की पत्नी सावित्रीबाई थी।
बाकी 1835 से पहले भारत में साक्षरता दर लगभग 99% प्रतिशत थी और सभी को एकसमान शिक्षा सुलभ थी । ये थॉमस मूनरो के रिपोर्ट में विस्तृत है। उसके लिए धर्मपाल जी की पुस्तक "The beautyful Tree" पढ़ने योग्य है। उसमे ब्योरोवार वर्णन उपलब्ध हैं।
नोट- सावित्रीबाई भी ज्योती फुले के कारण ब्रिटीश अधिकारियो और ईसाई मिशनरियो की देखरेख मे शिक्षा ग्रहण कर रही थी। उन्होंने शिव स्तुतिया लिखी है और विद्यालय को सरस्वती का दरबार कहा है। लेकिन ज्योति फुले ने उन्हे ईसाई मिशनरियों के समर्थन में लाकर मिशनरी स्कूल चलाया ।
((https://m.facebook.com/groups/1750873528336204/permalink/5741239822632868/?mibextid=Nif5oz))
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