आध्यात्मिक वैज्ञानिकवाद राष्ट्र बचाने का समाधान...
भारतवर्ष के समिप बहोत कम समय शेष है। जो देख सकते हैं वही देख सकते हैं। जो उदासीन है वो धर्मनिरपेक्ष या सेक्युलर नामों से भी जाने जाते हैं। समाधान केवल शिक्षा व्यवस्था का स्वदेशीकरण और वैदिक संविधान को लागू करना है। यही मूल समाधान है। इसी से जनसंख्या नियंत्रण भी हो जाएगी। पापाचारसे मुक्ति मिलेगी। कानून सुधरेंगे, वेद ही मूल है, इसलिए वेदवेदांतविज्ञान की ओर लौटना आध्यात्मिक वैज्ञानिकवाद का पाठ्यक्रम अनिवार्य करवाने का दबाव सरकार पर बनना सभी सनातनीयो का कर्तव्य है। अन्यथा मजहबी कन्वर्शन व विराष्ट्रियकरण इस राष्ट्र को इस्लामिक देश बनाने ही वाला है। प्रचलित हिंदू राष्ट्र घोषित करना या बढती लोकसंख्या हेतु किसी को कुछ अधिकारो से वंचित कर लेना भी समाधान नही है। क्योंकि इसके बिना भी वो शरणार्थी विधर्मी, स्वावलंबी है। अतः रूकेंगे नही। पंचर बनाकर आगे बढ़ेंगे। वोट देने का अधिकार छिनोगे लेकिन फिर भी वो जनसंख्या बढ़ाएंगे, जिहाद करेंगे। रूकेंगे नही। उन्पर इनसब पाबन्दीयो से कोई असर पड़ने वाला है नही।
इसका मूल समाधान इसलिए यह सब भी नही है। इसका समाधान वेद रूपी मूल है। वैदिक शिक्षा पद्धति है। वैदिक संविधान है। जो उन्हे भी तलाक अनेक संतान जिहाद आदि सब से रोकने हेतु कठोर कानून स्वदेशी व्यवस्था बनाकर लाए जाए जो हिंदू पर भी लागू हो व मुस्लिम पर भी ईसाई पर भी। उनको मानव बनाने की शिक्षा व कानून लागू करने, मानव बनने की शिक्षा देने से वैज्ञानिक अध्यात्म पढाने से भला कौन रोकेगा? इस मानवीय आध्यात्मिक वैज्ञानिक शिक्षा मे कौनसी सांप्रदायिकता सिद्ध होती है? कौन इसे सांप्रदायिकता के नामपर मना कर सकता है? सुप्रीम कोर्ट का आदर्श वाक्य है यतो धर्मस्ततो जयः क्या ये सांप्रदायिक है? संविधान निर्माताओं ने कभी धर्म विहिन राष्ट्र की परिकल्पना नही की। एक सेक्यूलर शब्द संशोधन द्वारा इमर्जेंसी मे छल से इंदिरा ने डाल दिया। लेकिन ये परिवर्तन उस सेक्युलरिज्म के विरूद्ध भी नहीं होगा इतना विशुद्ध समाधान है।
आधुनिक युग में " भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक " भारतीय परमाणु भौतिक विज्ञानी (Bhartiya nuclear physicist) होमी जहांगीर भाभा ने कहा है - " श्रीकृष्ण इसलिए मुझे प्रेरित करते हैं , क्योंकि वे महान अध्यात्मवेत्ता दार्शनिक होने के अतिरिक्त महाशस्त्र- प्रज्वलित चक्र थामे हैं और सतत कर्मशील हैं । मेरे विचार से तो वे जीवन विज्ञान के महान वैज्ञानिक हैं । मैं तो कहता हूँ कि भगवद्गीता को राष्ट्रीय पुस्तक एवं वैज्ञानिक अध्यात्म को राष्ट्रीय धर्म के रूप में अपनाया जाना चाहिए..! "
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