संदेश

जनवरी, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्या शीत प्रधान देशों के लिए शराब उपयोगी है ?

क्या शीत प्रधान देशों के लिए शराब उपयोगी है ? इस सम्बन्ध में नशा विशेषज्ञ श्री जी ० ई ० गोलिन का एक लेख ' लिकर कन्ट्रोलो ' में छपा है । उसमें लिखा है - “ ठण्ड से बचाव करने के लिए शराब न केवल व्यर्थ है वरन खतरनाक भी है । अनुनठी प्रिट्ज़ोफ की तरह मैं भी ठण्ड से बचाव के लिए शराब पीने के पक्ष में दी जाने वाली दलीलों के बिल्कुल खिलाफ हूँ और शराब के दुष्परिणामों को देखते हुए यहाँ तक कहने को तैयार हूँ कि शराब पीकर ठंड से बचने से बेमौत मरने तक का खतरा है । " हमारे देश में आर्मी को शराब देना ऐसा ही मूर्खतापूर्ण कुत्सित प्रयास है। ऐसा कहने मे कोई भ्रम व संकोच नहीं। ठंड से बचने के लिए अकेला अश्वगंधारिष्ट पर्याप्त है। हिमालय मे योगी सन्यासी दुबली पतली काया लेकर बिना पुर्ण वस्त्र व भोजन के कयी दिन बर्फ मे रह लेते हैं। फिर सैनिकों को युं बिना शराब थंड न सहनेवाला जाननेवाले भ्रम व अज्ञान मे है। जानकार जानते हैं इसे षड्यंत्र कहने मे संदेश जैसी कोई बात ही नहीं। ये निसंदेह षड्यंत्र ही है और विज्ञान के नामपर फार्मा का ड्रग्स माफिया का, जानलेवा कहर तो महामारी के रूप में वर्ल्ड आर्डर के स्वरूप ...

राम ही राष्ट्र है....

राम ही राष्ट्र है...  धर्मगुरु वाल्मीकि जी लिखते हैं - न चास्य महतीं लक्ष्मी राज्यनाशोऽपकर्षति । लोककान्तस्य कान्तत्वाच्छीतरश्मेरिव क्षयः ॥ ३२ ॥ श्रीराम अविनाशी कान्ति से युक्त थे , इसलिये उस समय राज्य का न मिलना उन लोककमनीय श्रीराम की महती शोभा में कोई अन्तर न डाल सका ; जैसे चन्द्रमा का क्षीण होना उसकी सहज शोभा का अपकर्ष नहीं कर पाता है ।॥ ३२ ॥ न वनं गन्तुकामस्य त्यजतश्च वसुंधराम् । सर्वलोकातिगस्येव लक्ष्यते चित्तविक्रिया ॥३३ ॥ वे वन में जाने को उत्सुक थे और सारी पृथ्वी का राज्य छोड़ रहे थे ; फिर भी उनके चित्त में सर्वलोकातीत जीवन्मुक्त महात्मा की भाँति कोई विकार नहीं देखा गया ॥ ३३ ॥ ऐसे थे राम और इस राष्ट्र की अभिव्यक्ति का एक उच्छ्वास मे किया गया उच्चारण है रामनाम। भगवान राम अयोध्या से चित्रकूट पहुंचे थे। इसके बाद उनके वनवास का निकटम डेढ़ वर्ष चित्रकूट में व्यतीत हुआ और उसके पश्चात वे आगे मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ की ओर बढ़े। सत्यतः यह कहा जाता है कि भगवान राम ने वनवास का पर्याप्त समय दंडकारण्य में व्यतीत किया था और ये आज का छत्तीसगढ़ है। इसलिए यही रामनाम (राम का नाम ) पृथ्वीपति राजा...

संस्कृत मे सुर्य के लिए १३५ से अधिक पर्यायवाची शब्द है और विपन्न भाषा अंग्रेज़ी में केवल एक - sun...

संस्कृत मे सुर्य के लिए १३५ से अधिक पर्यायवाची शब्द है और विपन्न भाषा अंग्रेज़ी में केवल एक - sun... ऐसी ओछी भाषा में यदि कोई संपूर्ण पारंगत हो - १००%, तदुपरांत भी वो संस्कृत को 5% जाननेवाले के समक्ष बच्चा ही है। व्याकरण विहिन रद्दी विपन्न भाषा अंग्रेज़ी दरिद्र अपरिष्कृत है। संस्कृत विद्वानों की भाषा है। अंग्रेजी तो इंग्लैंड में गधे से गधा मूर्ख से भी मूर्ख गटर सफाई करनेवाला भी बोल लेता है। थोड़ी बहोत अंग्रेजी चले वो ठीक है, इसपर फादर कामिल बुल्के ने कहा है - अंग्रेजी नोकरानी है। हिंदी बहुरानी है और संस्कृत माँ है। तो नोकरानी के बिना काम तो चल नही सकता, आवश्यकता पडे तो करवा ले। अतः ये भारत में मानसिक दास जो इस भाषा को नोकरी मे अनिवार्य बनाए है, गुलामी के प्रतिक गर्मी में काली तिरपाल वाले कोर्ट में अनिवार्य बनाए हुए हैं, वो गोरो का मल मुत्र सेवन कर रहे हैं यही उनकी स्थिति है। निष्पक्ष रूप से अंग्रेजी घटिया व ओछी भाषा है। इसे हमपर जबरन थोपा गया। अंग्रेजी औपनिवेशिक दासता का प्रतीक है। जिसको ढोना मूर्खता है। ऐसी व्यवस्था जो इसे अनिवार्य बनाए हुए हैं अंग्रेजो की दास है।  सुर्य = आदित्य ...

सनातनीयो को एक अनिवार्य संदेश...

चित्र
सनातनीयो को एक अनिवार्य संदेश...  भारतवर्ष के समिप बहोत कम समय शेष है। जो देख सकते हैं वही देख सकते हैं। जो उदासीन है वो धर्मनिरपेक्ष या सेक्युलर नामों से भी जाने जाते हैं। मजहब विशेष की बढती संख्या तबसे बढ रही है जब देश में वोटिंग ही नहीं होती थी, और जहां वो बढते है वो प्रदेश विखंडन होकर अलग देश बनकर इस्लामी राष्ट्र बन जाता है। उन्होंने अफगानिस्तान पाक बांग्ला ऐसे ही जनसंख्या बढाकर बना दिया। भारत में कितने ही राज्यों में हिन्दू अल्पसंख्यक है। 12-13 राज्य ऐसे ही समस्या से जूझ रहे हैं। उनकी सुविधा हटाने व नोकरी न रहने से वे रूकेंगे भ्रम है। ऐसा सोचने मे हानि हिन्दूओ की ही है। इसके मूल समाधान पर कोई मिडिया कभी बात नही करती है। मजहबी कन्वर्शन व विराष्ट्रियकरण इस राष्ट्र को इस्लामिक देश बनाने ही वाला है। प्रचलित हिंदू राष्ट्र घोषित करना या बढती लोकसंख्या हेतु किसी को कुछ अधिकारो से वंचित कर लेना भी समाधान नही है। क्योंकि इसके बिना भी वो सब शरणार्थी विधर्मी, स्वावलंबी है। अतः रूकेंगे नही। पंचर बनाकर आगे बढ़ेंगे। पुरूषार्थ करो लक्ष्मी प्राप्ति होगी ये वेद की शिक्षा उन्होंने धर ली है। वो...

आध्यात्मिक वैज्ञानिकवाद राष्ट्र बचाने का समाधान...

भारतवर्ष के समिप बहोत कम समय शेष है। जो देख सकते हैं वही देख सकते हैं। जो उदासीन है वो धर्मनिरपेक्ष या सेक्युलर नामों से भी जाने जाते हैं। समाधान केवल शिक्षा व्यवस्था का स्वदेशीकरण और वैदिक संविधान को लागू करना है। यही मूल समाधान है। इसी से जनसंख्या नियंत्रण भी हो जाएगी। पापाचारसे मुक्ति मिलेगी। कानून सुधरेंगे, वेद ही मूल है, इसलिए वेदवेदांतविज्ञान की ओर लौटना आध्यात्मिक वैज्ञानिकवाद का पाठ्यक्रम अनिवार्य करवाने का दबाव सरकार पर बनना सभी सनातनीयो का कर्तव्य है। अन्यथा मजहबी कन्वर्शन व विराष्ट्रियकरण इस राष्ट्र को इस्लामिक देश बनाने ही वाला है। प्रचलित हिंदू राष्ट्र घोषित करना या बढती लोकसंख्या हेतु किसी को कुछ अधिकारो से वंचित कर लेना भी समाधान नही है। क्योंकि इसके बिना भी वो शरणार्थी विधर्मी, स्वावलंबी है। अतः रूकेंगे नही। पंचर बनाकर आगे बढ़ेंगे। वोट देने का अधिकार छिनोगे लेकिन फिर भी वो जनसंख्या बढ़ाएंगे, जिहाद करेंगे। रूकेंगे नही। उन्पर इनसब पाबन्दीयो से कोई असर पड़ने वाला है नही। इसका मूल समाधान इसलिए यह सब भी नही है। इसका समाधान वेद रूपी मूल है। वैदिक शिक्षा पद्धति है। वैदिक संविध...

सावित्रीबाई फुले को पहली महिला शिक्षिका बताना भ्रामक प्रचार...

सावित्रीबाई फुले को पहली महिला शिक्षिका बताना भ्रामक प्रचार...  सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका नही इसके अनेकों प्रमाण है...लेकिन मै वैदिक कालीन दार्शनिक विदुषीयों ऋषिकाओ का उल्लेख नही करूंगा। न ही मध्यकालीन कन्याशालाओ की "उपाध्याया", "आचार्या" जैसे परिभाषित आधिकारिक पदो से सम्पन्न नारीयां : गणितज्ञ लिलावती या भोजदेव की महारानी लिलादेवी के कन्याशाला का उल्लेख करूंगा । कथित प्रथम महिला शिक्षिका के ही समय पर आते हैं। श्रीमंत सरफॉजी महाराज भोसले तंजावुर के मराठा राज्य व भोसले राजवंश मे छत्रपति शिवाजी के भाई वेंकोजी के वंशज थे। वे एक अच्छे नेत्र चिकित्सक भी थे, इन्होनें सन 1805 में कन्या विद्यालय प्रारम्भ किया था - नवविद्या कलानिधि शाला । जिसमे महिला शिक्षिकाओं की भी नियुक्ति की थी । जबकि सावित्री बाई फुले का जन्म ही 1831 हुआ था । पाठकगण बताइए सन 1805 पहले आता है या 1831 ?? Dr. S. Vanaja kumari की शोध का संदर्भ निम्नलिखित है : Serfoji founded a school called Navavidhya Kalanidhi Sala where languages , literature , the sciences , arts and crafts were taught ...

सावित्रीबाई फुले को पहली महिला शिक्षिका बताना भ्रामक प्रचार..

श्रीमंत सरफॉजी महाराज भोसले तंजावुर के मराठा राज्य व भोसले राजवंश मे छत्रपति शिवाजी के भाई वेंकोजी के वंशज थे। वे एक अच्छे नेत्र चिकित्सक भी थे, इन्होनें सन 1805 में कन्या विद्यालय प्रारम्भ किया था - नवविद्या कलानिधि शाला । जिसमे महिला शिक्षिकाओं की भी नियुक्ति की थी । जबकि सावित्री बाई फुले का जन्म ही 1831 हुआ था । पाठकगण बताइए सन 1805 पहले आता है या 1831 ?? प्रमाण :  Dr. S. Vanajakumari की शोध मे महाराज के शैक्षणिक बदलाव उद्धृत है :  Educational reforms : Serfoji founded a school called Navavidhya Kalanidhi Sala where languages , literature , the sciences , arts and crafts were taught in addition to the Vedas and shastras.⁹ Serfoji maintained close ties with the Danes at Tarangambadi and visited their schools quite often and appreciated their way of functioning . Impressed by it , he tried to implement European methods of teachings and education all over his Empire . He was a supporter of the emancipation of Indian women and revolutionized education by appointing women teach...