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मातृभूमि धारानगरी : पँवारी स्वाभिमान की कथा

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एक मराठी लेख प्रखर देशाभिमानाची उदाहरणे आपापल्या राष्ट्रा तील माणसाचा राजपूत राजाना केवढा अभिमान असे व राष्ट्रीय इभ्र तीची ते किती पर्वा करीत , तसेच आपल्या मातृभूमीच्या नावाचा राजपूत लोकाना किती अभिमान वाटे व तिच्या सरक्षणाकरिता केवढा आत्मयज्ञ करण्यास ते तयार असत याविषयीची एक सुदर व उद्बोधक आख्यायिका जेसलमीरच्या इतिहासातून टॉडने दिली आहे. देवरावळ येथे देवराज नावाचा राजपूत राजा राज्य करीत होता . ह्या देवरावळचा यशकरण नावाचा एक व्यापारी धारानगरीस गेला असताना तेथील प्रमार राजाने त्यास पकडले व बरीच मोठी खडणी घेऊन सोडून दिले यशकरणने परत येऊन देवराजला आपल्या अपमा नाचे सर्व वर्तमान निवेदन केले देवरावळच्या एका व्यापायाचा अपमान म्हणजे आपल्या राष्ट्राचा अपमान होय असे म्हणून देवराजने ‘ जोपर्यंत मी अपमानाचा सूड घेणार नाही तोपर्यंत तोडात पाण्याचा थेब देखील घालणार नाही ' अशी प्रतिज्ञा केली देवरावळहून धार किती लांब आहे याचे त्यास त्या वेळी भान राहिले नाही आपल्या प्रतिज्ञेचे शब्दश पालन होणे अशक्य आहे हे दिसून आल्यामुळे त्याने आपल्या शहराबाहेर गायची - मातीची - एक खोटीच धारानगरी बनविली व तिच्यावरच आप...

इस्लामी जादूई संख्या ७८६ ओम ही है..

 कुरान की सभी अरबी प्रतियों में 786 अंकित रहस्यमयी आकृति है...      कोई अरबी विद्वान  इस विशेष संख्या की पसंद को परमात्मा के रूप में निर्धारित करने में सक्षम नहीं है।  यह एक स्थापित तथ्य है कि मुहम्मद निरक्षर थे इसलिए यह स्पष्ट है कि वे संख्याओं में अंतर नहीं कर पाएंगे। 😊        यह "जादुई" संख्या कोई और नहीं बल्कि वैदिक पवित्र पत्र "ओम" है जो संस्कृत में लिखा गया है।     जो भी संस्कृत जानता है वह अरबी तरीके से पीछे की तरफ "OM" के लिए प्रतीक को पढ़ने की कोशिश कर सकता है और जादुई रूप से संख्या ६८६ दिखाई देगी।    अपने अज्ञानता में मुसलमानों को यह एहसास नहीं है कि यह विशेष संख्या वैदिक प्रतीकों के पवित्रतम से ज्यादा कुछ नहीं है।   दाईं से बाईं ओर पढ़ें OM 🕉️का यह आंकड़ा 786 संख्याओं का प्रतिनिधित्व करता है एक दर्पण में ओम के इस प्रतीक को देखें और आप देवनागरी (संस्कृत-हिंदी) अंक ७-८-६: ६ से बाहर कर सकते हैं  स्पष्ट है, ७ और बग़ल में इत्तला दे दी है।   "क्या काबा एक मंदिर है ???" यह एक बहुत ह...

रामायणकालीन अस्त्र शतघ्नी

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 #रामायणकालीन_अस्त्र_शतघ्नी...      जिस प्रकार वर्तमान के दो प्रबलतम राष्ट्र रशिया और अमेरिका एक - दूसरे को विरोधी समझकर जिस प्रकार एक - दूसरे के विरुद्ध विविध प्रकार के शस्त्रास्त्र निर्माण करने के होड़ में जुटे थे और जुटे हैं उसी प्रकार प्राचीनकाल में देव (यानी 'सुर') और दैत्य ( यानी 'असुर' ) उनकी भी वापस की होड़ थी और शत्रुत्व था । उस समय भी बड़े - बड़े विचित्र आयुध , प्रभावी शस्त्रास्त्र , सारे विश्व का तेजी से भ्रमण कर सकने वाले यान और तुरन्त एक - दूसरे से वार्तालाप करने के माध्यम उपलब्ध थे ।    रामायण , महाभारत और पुराणग्रंथों में उनका उल्लेख है । प्राचीन सागरीयुत का रामायण के अयोध्याकाण्ड के सर्ग ८४ के पाठवें प्रलोक में उद्धृत वर्णन देखें :- नौवां शतानां पंचान्सं कवर्तानां शतं शतम् । सन्नद्धाना तथा यूनां तिष्ठन्त्वत्यभ्यचोदयत् ।। यानी शत्रु के नौकादल का प्रतिकार करने के लिए सैकड़ों कैवर्त युवक तैयार रहें । #आग्नेयास्त्र  : रामायणकालीन परिभाषा में तोपों को ' शतघ्नी ' यानी ' सैकड़ों व्यक्तियों का अन्त करने वाली ' कहा करते थे । इनका उल्लेख अनेक श्ल...

के सुर्यवंशी राजा किम सुरो

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#कोरिया_के_सूर्यवंशी_राजा_किम_सुरों.....     पहली शताब्दी के एक कोरियाई राजा का नाम किम सुरो ( Kim Suro ) था । ' #सुरो ' यह सूर्य शब्द है । '#किम्' यह सिंह का अपभ्रंश है । राजाओं को सूर्यवंशी कहना या समझना वैदिक प्रथा है । 💎 #भारतीय_राजकुल_से_विवाह_सम्बन्ध :के         उस समय अयोध्या में जो सूर्यवंशी हिन्दु राजा राज्य करता था उसकी कन्या से किम् सुरो का विवाह हुआ था । इससे सिद्ध होता है कि कोरिया का राजकुल भी वैदिकधर्मी , आर्य , सनातनी हिन्दु था । कोरिया का यह राजकुल आज भी स्वयं को सुर्य वंशी तथा श्रीराम जी से संबंधित बताता है।            कोरिया के इतिहास में लिखा है कि " ई. स. ४६ में अयोध्या की राज्यकन्या ईश्वरीय आज्ञा के अनुसार नौका से सागर पार कर कोरिया में दाखिल हुई । जिस वैदिक क्षत्रीय कोरियाई राजा से उस भारतीय राजकुमारी का विवाह हुआ वह राजा नौ फुट लम्बा था । " 💎 #कोरिया_की_राजधानी_गया :       उस समय ' गया ' कोरिया की राजधानी थी । उसका उच्चार कोरियन् लोग 'कया' करते थे क्योंकि संस्कृत ' ग ' का उच्चा...

पौंड स्टर्लिंग का वास्तविक इतिहास

पौंड स्टर्लिंग का वास्तविक इतिहास इंग्लैण्ड में '#पौंड_स्टर्लिंग' नाम का एक सिक्का है । वह 'पौंड स्तर लिंग' ऐसा संस्कृत शब्द है ।   #भगवद्गीता के 'पौण्ड्र दध्मौ महाशंखं भीमकर्मा वृकोदरः' वचन से प्रतीत होता है कि किसी भारी या महत्वपूर्ण ( वजनदार ) वस्तु को प्राचीन वैदिक परम्परा में 'पौण्ड' , यह विशेषण लगाया जाता था । उसी का बिगड़ा प्रचलित उच्चार पौण्ड हैं । उसके ऊपर शिवलिंग का छप्पा होने से वह पौण्ड ( यानि भारी ) स्तर का शिवालिंग कहलाया । अत : उस सिक्के को पौण्ड उर्फ  'पौण्ड स्तरलिंग' यह सार्थ नाम पड़ा ।  उसी प्रकार आंग्ल भूमि में भारी वजन को भी 'पौण्ड' कहते हैं अर्थात् वह भी पौण्ड शब्द का ही प्रचलित आंग्ल प्राकृत रूप है । पौण्ड स्तरलिंग के २० भाग किए गए हैं । प्रत्येक भाग एक शिलिंग कहलाता है । ऐसे २० शिलिंग मिलाकर एक पौण्ड स्तरलिंग बन जाता है। इससे तो हमारा निष्कर्ष और भी पक्का साबित होता है । क्योंकि २० शिवलिंगों को ( यानि शिलिगों को मिलाकर ) एक बड़े स्तर का यानि पौण्ड उर्फ ' पौण्ड स्तरलिंग ' बनता है ।   शिलिंग से कम मूल्य के सिक...

बाल्हिका की राजकुमारी से भी हुआ था सम्राट विक्रमादित्य पँवार का विवाह

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बाल्हिका की राजकुमारी से भी हुआ था सम्राट विक्रमादित्य पँवार का विवाह    क्या आप जानते हैं? इस्लाम पूर्व अरब पर शासन करने वाले भारतीय सम्राट चक्रवर्ती विक्रमादित्य ने पश्चिमी एशिया के क्षेत्र बाल्हिका के शासक को परास्त किया और बल्ख के शासक से संधि स्वरूप बाल्हिका की राजकुमारी से उनका विवाह हुआ। यह वर्णन कुतुबमीनार के पास लोहे के खंभे पर स्थित शिलालेख में अवतिर्ण है। इसमें उल्लिखित विक्रमादित्य वही उज्जयिनी के मालवगणमुख्य विक्रमादित्य है जिनका वर्णन काबा के शिलालेख में अरबी कवि जरहाम कितनोई के सायर-उल-ओकुल में हुआ है। सम्राट विक्रमादित्य मालवा के गणाध्यक्ष थे तथा प्रमार वंशीय,  गंधर्वसेन के पुत्र थे। नंदसा अभिलेख में इनका मूल वंश सुर्य वंश बताया गया है। इन्हें ही शकारि कहा गया। यही विक्रमादित्य रोम के शासक  जुलिअस सीजर को भी परास्त करने वाले पँवार वंशीय,  दिग्विजयी और चक्रवर्ती विक्रमादित्य महान है जिनके  यशोगान में आज भी विक्रम संवत् चल रहा है।  ~ Vedic ROOTS of pre-Islamic Arabia and the Kaaba - Semantic Scholar

जननायक महाराणा प्रताप और महाराणी अजबदे पँवार

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जननायक महाराणा प्रताप और महाराणी अजबदे पंवार व्यक्तिगत , पारिवारिक हो या फिर सार्वजनिक जीवन , प्रत्येक मानव दोनो ही स्तर पर समन्वय साध्य कर जीवन - यापन करने का यत्न करता है । यह शाश्वत सत्य और कटुसत्य भी है । सार्वजनिक जीवन मे जितने भी महापुरुष हुए है , उनके जीवन में किसी न किसी आदर्श महिला का योगदान अवश्य रहा है । चाहे वह माता , बहन , धर्मपत्नी , पुत्री या फिर किसी अन्य रूप मे सहयोगी की भूमिका में रहा हो । इसी तरह प्रातः स्मरणीय , जन नायक महाराणा प्रताप के जीवन में भी दो निकट संबंधी आदर्श महिलाओं के त्यागमय जीवन का महायोगदान रहा है । प्रथम प्रताप के जन्म से लेकर युवावस्था तक , उनकी माता जैवन्ता बाई का जिन्होंने मानवीय नैतिक मूल्यो के मध्यनजर उच्चकोटि के संस्कारों के साथ अपने पुत्र का लालन पालन कर पुरुषार्थी , धैर्यवान मानव के रूप में प्रताप जैसे आदर्श व्यक्तिव को निखारा । दूसरा युवा अवस्था के बाद गृहस्थ जीवन मे धर्मपत्नी के रूप मे युवरानी अजबदे ने अपने पारिवारिक दायित्व को बखूबी निभाते हुए , प्रताप के सार्वजनिक जीवन में आनेवाले प्रत्येक संघर्ष और संकट की घड़ी में छाया की तरह उनके साथ ...

बिजोलिया की राजकुमारी एवं मेवाड़ की महारानी वीरांगणा अजबदे पंँवार

 बिजोलिया की राजकुमारी एवं मेवाड़ की महारानी वीरांगणा अजबदे पंवार भारतवर्ष की आदर्श नारीयों में इस वीर क्षत्राणी का नाम भी अमर है। कुंवरी अजबदे पँवार विंध्यावली की गोद में बसीं बिजोलिया रियायत की राजकुमारी थी। कंवर अजबदे के पिता मेवाड़ के प्रतिष्ठित सामंत राव माम्रकसिंह एवं मां हंसा थी। राणा प्रताप की वह पहली पत्नी साथ ही प्रिय और एकमात्र प्रेमिका तथा आदर्श पतिव्रता प्रेयसी थीं। इस वीर बाला ने विवाह उपरांत एवं पीता के मृत्यु पश्चात युध्द कला सिख अपनी तलवार से अफगानो की चौकियों को बिजोलिया कि सीमा से खदेड़ने का साहस कीया एवं कयी बार प्रजा जनो की रक्षा भी कीं। अफगानो को धूल चटाने एकबार बिना मेवाड़ के सहयोग के सभी जनता के साथ धन इक्ट्ठा करके सेना खड़ी करने का भी प्रयास किया। इसमें अंतः में कुंवर प्रताप का हस्तक्षेप हुआ और उनके नेतृत्व में शम्स खान का पुत्र बादशाह खान का वध हुआ।  अजबदे स्वतन्त्रता प्रेमी , स्वाभिमानी वीरवर महाराणा प्रताप की रानी थी । तत्कालीन अन्य रियासतों के राजा महाराजा मुगल बादशाह अकबर की अधीनता स्वीकार कर आराम की जिन्दगी बिता रहे थे परन्तु प्रताप ने अभी तक मुग...

महान बलिदानी राणी कलावती और आर्य क्षत्राणीयांँ

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