भारतीय दर्शन व वैदिक विज्ञान की छाया तले...
भारतीय तत्व दर्शन व वैदिक विज्ञान की छाया तले वर्तमान विज्ञान की पुष्टि सृष्टि व विस्तार हुआ.. वैदिक विज्ञान व दर्शन की छाया तले वर्तमान विज्ञान की पुष्टि प्रादुर्भाव व विस्तार हुआ.. अन्तरिक्षे दुन्दुभयो वितना बदन्ति-अधिकुम्भाः पर्यायन्ति । ( जैमिनि 2-404 ) । अर्थात् अन्तरिक्ष में दुन्दुभि के समान विस्तृत और सर्वव्यापी परम वाक् - ध्वनि होती रहती है । अब तक यह बात समझ में आने न वाली थी पर जब सूर्य की खोज करते - करते सन 1942 में मक्क्रिय ने इस तरह की ध्वनि सचमुच सुनी तो वह आश्चर्यचकित रह गया । उसने अपनी ' फिजिक्स आफ दि सन एण्ड स्टार्स ' पुस्तक के 83 पेज पर लिखा है कि- ' श्री जे.एस. दे द्वारा वर्णित सूर्य से आने वाली ध्वनि ( सोलर न्वाइज ) गलत नहीं है वरन् सूर्य की ध्वनि की तरह ही और भी तारा - मण्डलों ( ग्लैक्सीज ) से ध्वनि तरंगें आ रही हैं । वह सौर - घोष सोलर न्वाइज के समान ही हैं । उनका अनुसंधान किया जाना बहुत आवश्यक है । ' दर्शन से विज्ञानियों की सहमति अवश्य रही तदुपरांत जैसे कथित पश्चिमी विज्ञान आगे बढा वह प्रत्यक्ष को प्रमाण क्या ऐसे स्पष्ट हो जाती। एक समय किसी भी क...